अमेरिकी हथियारों के खजाने तक पहुंचे पाकिस्तान के दुश्मन, तालिबान के डबल गेम से खतरे में कराची, इस्लामाबाद
Taliban News: अगस्त 2021 में जब ताबिलान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया था, तो पाकिस्तान में जश्न मनाया गया था, लेकिन तालिबान के डबल गेम ने पाकिस्तान को खतरे में डाल दिया है। तालिबान को सत्ता में लाने के लिए पाकिस्तान ने हर तरह की कोशिश की, लेकिन ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के डबल गेम से लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहर खतरे में आ गये हैं।
तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान में आतंकी हमलों में बाढ़ आ गई है और ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जिसे टीटीपी कहा जाता है, उसकी पहुंच अमेरिकी हथियारों तक हो गई है, जिसके बाद पाकिस्तान में भीषण हमलों की आशंका जताई गई है।

टीटीपी के हाथ लगे अमेरिकी हथियार
अफगान पीस वॉच (एपीडब्ल्यू) ने अफगानिस्तान के हेलमंज, कंधार और नंगरहार में पिछले साल के अंत में रिसर्च किए हैं और स्मॉल आर्म्स सर्वे की हालिया रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है, कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की अमेरिकी हथियारों तक पहुंच हो गई है। आपको बता दें, कि अमेरिका ने जब अफगानिस्तान छोड़ा था, तो वो करोड़ों-अरबों रपये के हथियार छोड़कर चले गये थे और उन हथियारों पर अब तालिबान का कब्जा है।
लेकिन, तालिबान ने अब उन हथियारों को टीटीपी को भी बांटना शुरू कर दिया है, जो पाकिस्तान में आतंकी हमले करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान की पूर्व सेना, जिसे अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बल (एएनडीएसएफ) कहा जाता था, उसके हथियार भंडार पर नियंत्रण कर लिया है। और अब टीटीपी की पहुंच भी उन हथियारों के साथ साथ अमेरिकी हथियारों तक हो गई है।
तालिबान एक तरफ कहता है, कि अफगानिस्तान में टीटीपी का कोई नामोनिशान नहीं है, लेकिन हकीकत ये है, कि टीटीपी के हाथ में अमेरिका के घातक हथियार लग चुके हैं और उन हथियारों को तस्करी करते हुए पाकिस्तान से सटे बॉर्डर इलाकों में भेजा जाता है, ताकि आसानी से पाकिस्तान पर हमले किए जा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि टीटीपी और अफगान तालिबान आंतरिक गतिशीलता, व्यापार, राजनीतिक और सुरक्षा हित और सांस्कृतिक तौर पर इतने घुले-मिले हुए हैं, कि असल में टीटीपी को खत्म किया ही नहीं जा सकता है और हथियार तस्करी के इस नेटवर्क को तालिबान का पूरा समर्थन हासिल है।
यानि, जो पाकिस्तान सोच रहा था, कि तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान उसका पाचवां प्रांत बन जाएगा, वो अब पाकिस्तान की बर्बादी की वजह बन चुका है। हकीकत ये है, कि टीटीपी अब अपनी मर्जी के हिसाब से पाकिस्तान पर हमले करता है।
ग्राउंड रिपोर्टिंग से पता चला है, कि अमेरिका के घातक हथियार, जैसे एम-4 और एम-16 असॉल्ट राइफल, नाइट विजन लेंस और चश्मे, थर्मल हथियार और भी कई तरह के हथियारों के भंडार तालिबान के नियंत्रण में हैं, जिनका अगर आतंकवादी इस्तेमाल करे, तो किसी भी देश की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
बुरे का अंजाम बुरा
भारत में आतंकवाद फैलाने वाला पाकिस्तान भूल गया था, कि बुरे का अंजाम भी बुरा होता है। पाकिस्तान के लिए अब टीटीपी को रोकना अत्यंत मुश्किल साबित हो रहा है।
एम45 और एम16 असॉल्ट राइफल्स की कीमत, एक एके-पैटर्न असॉल्ट राइफल की कीमत से लगभग दो से तीन गुना ज्यादा है और ऐसे हथियारों तक टीटीपी की पहुंच हो चुकी है, लिहाजा तालिबान और पाकिस्तान के बीच के संबंध और भी ज्यादा बिगड़ने वाले हैं।
निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए आधुनिक हथियारों और "परिष्कृत" नाइट-विज़न उपकरणों का इस्तेमाल, टीटीपी, पाकिस्तान में हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहा है।
पिछले साल अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया था, कि तालिबान के कब्जे के बीच जब अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से बाहर निकले थे, तो उन्होंने 7.12 अरब डॉलर के हथियार और उपकरण अफगानिस्तान में छोड़ दिए थे।
वहीं, फॉरेन पॉलिसी ने पिछले अप्रैल में रिपोर्ट दी थी, कि अमेरिका के चले जाने पर अफगान बलों को 48 मिलियन डॉलर का गोला-बारूद उपलब्ध कराया गया था, जो अब तालिबान के नियंत्रण में है।












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