टैड्रोस फिर बने WHO चीफ, चीन के बचाव से लेकर तानाशाह को गुडविल एम्बेस्डर बनाने तक, जानिए उनसे जुड़े 5 विवाद
WHO के महानिदेशक टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस एक बार फिर से दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनका यह कार्यकाल 5 वर्षों का होगा। इस बार किसी अन्य उम्मीदवार ने टैड्रोस ग़ैबरेयेसस को इस पद के लिए चुनौती नहीं दी।
लंदन, 24 मईः WHO के महानिदेशक टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस एक बार फिर से दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनका यह कार्यकाल 5 वर्षों का होगा। इस बार किसी अन्य उम्मीदवार ने टैड्रोस ग़ैबरेयेसस को इस पद के लिए चुनौती नहीं दी। इस कारण एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के सदस्य देशों द्वारा वे दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए। कोरोना मामले में चीन का बुरी तरह बचाव करने से लेकर एक तानाशाह को गुडविल एम्बैस्डर बनाने तक उनसे जुड़े 5 विवादों को जानिए।

कोरोनाकाल थे सबसे अधिक दिखने वाला चेहरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन का नेतृत्व करने वाले गैबरेयेसस अफ्रीका के पहले व्यक्ति हैं। कोरोना महामारी के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें घर-घर मशहूर कर दिया। हालांकि दूसरी बार पद पर चुने जाने के पश्चात टैड्रोस गैबरेयेसस ने कोरोना व अन्य महामारी के खतरों पर बोलने के बजाय युद्ध की विभीषका पर अपनी बात की। उन्होंने कहा कि महामारी से भी अधिक युद्ध उस नींव को हिलाता और चकनाचूर कर देता है जिस पर पहले एक स्थिर समाज खड़ा था। युद्ध एक मनोवैज्ञानिक निशान छोड़ देता है जिसे ठीक होने में वर्षों या दशकों लग सकते हैं।

डॉक्टर नहीं हैं टैड्रोस गैबरेयेसस
टैड्रोस गैबरेयेसस अफ्रीकी देश इथियोपिया के एक पूर्व सरकार के मंत्री रह चुके हैं। वह विश्व स्वास्थ्य संगठन का नेतृत्व करने वाले पहले ऐसे महानिदेशक हैं जो मेडिकल डॉक्टर के रूप में योग्य नहीं हैं। कोरोना महामारी के दौरान उनकी नीतियों की खूब आलोचना हुई। टेड्रोस के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी चीन सहित उन देशों को उनकी गलतियों के लिए रोकने में विफल रही। इन देशों ने महीनों तक मास्क पहनने के खिलाफ सलाह दी थी और शुरू में कहा था कि कोरोना वायरस के तेजी से स्वरूप बदलने की संभावना नहीं है।

कोरोना के दौरान विवाद
चीन में कोरोनोवायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए WHO द्वारा भेजे गए वैज्ञानिकों ने कहा था कि पिछले साल एक रिपोर्ट जारी करने के बाद महत्वपूर्ण जांच 'ठप' हो गई थी, यहां तक कि WHO प्रमुख ने भी स्वीकार किया था कि उन्होंने समय से पहले प्रयोगशाला से वायरस के प्रसार की संभावना से इनकार किया था।

चीन का किया बचाव
कोरोना महामारी पूरी दुनिया में फैल गई और इसमें लाखों मौते हुईं। WHO द्वारा सही वक्त पर सही गाइडलाइन्स जारी कर इस त्रासदी को कम किया जा सकता था। मगर यह हो न पाया, इस संगठन ने अपनी भूमिक मुस्तैदी से नहीं निभाई। कोरोना वायरस संक्रमण के दुनिया भर में फैल जाने के पीछे चीन को जिम्मेदार ठहराए पर टेड्रोस ने चीन की तरफदारी की चीन के प्रति टैड्रोस गैबरेयेसस की सहानुभूति के लिए उनकी खूब आलोचना हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन ने इथोपिया में भारी निवेश कर रखा है, चूंकि ट्रैड्रोस एक राजनेता रहे हैं इसलिए वह चीन के एहसान तले दबे हुए हैं और उसका बचाव कर रहे हैं।

आतंकी संगठन से रहा है संबंध
टैड्रोस गैबरेयेसस एक घनघोर कम्युनिस्ट नेता रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक वह टिगरे पीपल्स लिबरेशन फ्रंट/आर्मी संगठन के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण पदाधिकारी थे। यह संगठन इथोपिया की एक राजनीतिक पार्टी है, लेकिन 1990 के दशक में अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा था। नब्बे के दशक की शुरूआत में इस संगठन को ग्लोबल टेररिज्म डेटाबेस में लिस्टेड किया गया था। इस पार्टी से जुड़े होने के कारण टैड्रोस को आतंकी कहा गया।

तानाशाह को ही बना दिया गुडविल एम्बेस्डर
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक 2017 में WHO के प्रमुख का पद संभालने के बाद टैड्रोस गैबरेयेसस ने जिम्बाब्वे के पूर्व तानाशाह रॉबर्ट मुगाबे को गुडविल एम्बेसडर नियुक्त कर दिया। उनके द्वारा इस नियुक्ति पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद मुगाबे को पद से हटाना पड़ा।

नस्ली सफाई का लगा आरोप
साल 2000 और 2010 के दौरान इथोपिया में कॉलरा महामारी के समय भी टैड्रोस गैबरेयेसस पर अनदेखी करने के आरोप लगे। इसके अलावा विदेश मंत्री रहते हुए उन पर एक ब्रिटिश नागरिक को जबरन प्रताड़ित करने का भी आरोप लगा। इसके अलावा, नस्ली हिंसा को लेकर मानवाधिकार वॉच ने इथोपिया सरकार पर 400 मौतों, 70 हजार प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और 15 हजार लोगों के विस्थापन का ज़िम्मेदार माना था। इस दौरान वह इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री थे। इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन पर ये आरोप लगा कि अमहारा प्रजाति के लोगों में जन्मदर बेहद कम हो गयी है। इसके साथ ही इथोपिया की जनगणना के दौरान इस प्रजाति के 20 लाख सदस्य गायब कर दिए गए हैं। इस घटना को एथनिक क्लीन्जिंग अर्थात नस्ली सफाई कहा गया।
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