Bangladesh में इतिहास से छेड़छाड़! 'राष्ट्रपिता' नहीं रहे बंगबंधु मुजीबुर रहमान, बदली ‘मुक्तियुद्ध' की परिभाषा

Bangladesh Row: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 'राष्ट्रपिता' का खिताब अब बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से हटा दिया है। इस कदम के तहत एक कानून में संशोधन करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों की परिभाषा को भी बदल दिया गया है। यह जानकारी बुधवार को मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई। मंगलवार (3 मई) को उठाए गए इस कदम से कुछ दिन पहले ही मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने नए मुद्रा नोटों से देश के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटा दी थी।

बदलाव किस कानून में हुआ है

ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 'नेशनल फ्रीडम फाइटर्स काउंसिल एक्ट' (राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी परिषद अधिनियम) में संशोधन किया है, जिससे स्वतंत्रता सेनानी की परिभाषा में बदलाव हुआ है। कानून, न्याय और संसदीय कार्य मंत्रालय ने मंगलवार रात इस संबंध में अध्यादेश जारी किया।

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राष्ट्रपिता की उपाधि हटाई गई

रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधन में 'राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान' शब्द और उन सभी धाराओं को हटा दिया गया है, जिनमें मुजीबुर रहमान का नाम उल्लेखित था। bdnews24.com पोर्टल ने भी पुष्टि की है कि मुजीबुर रहमान का नाम कानून से हटा दिया गया है।

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मुक्तियुद्ध की परिभाषा भी बदली

The Daily Star अखबार के अनुसार, नए अध्यादेश में 'मुक्तियुद्ध' की परिभाषा में भी थोड़ा बदलाव किया गया है। पहले की परिभाषा में यह कहा गया था कि युद्ध बंगबंधु के स्वतंत्रता के आह्वान पर शुरू हुआ था, जबकि अब उनके नाम का कोई उल्लेख नहीं है।

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संशोधित कानून के मुख्य बिंदु

  • 1971 में मुजीबनगर सरकार (अस्थायी सरकार) से जुड़े सभी MNAs और MPAs, जो पहले स्वतंत्रता सेनानी माने जाते थे, अब 'मुक्तियुद्ध के सहयोगी' कहलाएंगे।
  • 26 मार्च से 16 दिसंबर 1971 के बीच जिन नागरिकों ने युद्ध की तैयारी की, प्रशिक्षण लिया, या पाकिस्तानी सेना और उसके स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ हथियार उठाया, उन्हें स्वतंत्रता सेनानी माना जाएगा (यदि वे उस समय सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयु के भीतर थे)।
  • स्थानीय सहयोगियों में रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स, मुस्लिम लीग, जमात-ए-इस्लामी, निज़ाम-ए-इस्लाम और पीस कमिटी के सदस्य शामिल हैं।
  • सशस्त्र बलों, ईस्ट पाकिस्तान राइफल्स (EPR), पुलिस, मुक्ति बहिनी, मुजीबनगर सरकार और उसके मान्यता प्राप्त बलों, नेवल कमांडो, किलो फोर्स और अंसार के सदस्य भी स्वतंत्रता सेनानी के रूप में माने जाएंगे।
  • युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगियों द्वारा प्रताड़ित की गई महिलाएं (वीरांगना) अब स्वतंत्रता सेनानी मानी जाएंगी।
  • जिन डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल सहायकों ने युद्ध के दौरान घायल लड़ाकों की फील्ड अस्पतालों में सेवा की, उन्हें भी यह दर्जा मिलेगा।
  • मुक्तियुद्ध की नई परिभाषा: यह अब उस सशस्त्र संघर्ष के रूप में वर्णित है, जो 26 मार्च से 16 दिसंबर 1971 तक बांग्लादेश की जनता द्वारा एक संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र की स्थापना के उद्देश्य से, समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित था जो पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ा गया।

पाठ्यपुस्तकों में भी बदलाव

जनवरी में अंतरिम सरकार ने 2025 शैक्षणिक सत्र के लिए नई प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल की किताबें पेश की थीं। इनमें अब यह उल्लेख है कि 1971 में सेना के मेजर और बाद में सेक्टर कमांडर बने जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। पहले की किताबों में यह श्रेय शेख मुजीबुर रहमान को दिया गया था।

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