कश्मीरी मुसलमानों के लिए आवाज उठाएगा तालिबान, शुरू किया भारत के खिलाफ जहरीला प्रोपेगेंडा
तालिबान ने पहले कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा बताया था, लेकिन अब तालिबान ने कश्मीर को लेकर अपना बयान पूरी तरह से बदल दिया है।
काबुल, सितंबर 03: आज अफगानिस्तान में सरकार बनाने जा रहे तालिबान ने भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। तालिबान ने कहा है कि उसे कश्मीरी मुसलमानों को लेकर आवाज उठाने का हक है। भारत को हमेशा से तालिबान से लेकर जिस बात की आपत्ति रही है, तालिबान ने भारत के खिलाफ वही चाल चलने की कोशिश की है। हालांकि, पहले तालिबान लगातार कश्मीर में हस्तक्षेप की बात से इनकार कर रहा था, लेकिन अब जब तालिबान की सरकार बनने जा रही है, तो उसने कश्मीर को लेकर जहरीला बयान दे दिया है।
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तालिबान का जहरीला प्रोपेगेंडा
तालिबान ने कहा है कि उसे कश्मीर सहित पूरी दुनिया में मुसलमानों के लिए अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। नई दिल्ली को हमेशा से इस बात की चिंता रही है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल इस्लामी कट्टरपंथी समूह भारत विरोधी गतिविधि के लिए कर सकते हैं और तालिबान के इस जहरीले बयान के बाद अब इस बात में कोई आशंका नहीं रही, कि तालिबान आने वाले वक्त में आतंकियों को भारत के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा। पाकिस्तान की जियो न्यूज के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि, "मुसलमान होने के नाते हमें कश्मीर, भारत और किसी भी अन्य देश में मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। हम अपनी आवाज उठाएंगे और कहेंगे कि मुसलमान आपके अपने लोग हैं, आपके अपने नागरिक हैं और वे आपके कानूनों के तहत समान अधिकारों के हकदार हैं,"।

हथियार नहीं उठाएगा तालिबान
हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने हालांकि यह भी कहा, कि तालिबान की किसी देश के खिलाफ हथियार उठाने की नीति नहीं है। शाहीन की टिप्पणी कश्मीर पर तालिबान के द्वारा पहले के बयानों के ठीक उल्टा है, क्योंकि काबुल पर नियंत्रण करने के कुछ दिनों बाद ही तालिबान ने कहा कि कश्मीर एक "द्विपक्षीय और आंतरिक मामला" है। गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि अफगानिस्तान में भारत का तत्काल ध्यान यह सुनिश्चित करना है कि, अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाए। बागची ने यह भी कहा कि तालिबान को किसी भी संभावित मान्यता देने के बारे में बात करना अभी "बहुत जल्दबाजी" होगी।

तालिबान को लेकर भारत चिंतित
तालिबान के साथ भारत की बातचीत को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि "यह हमारा ध्यान नहीं है। हमारा ध्यान इस बात पर है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और किसी भी तरह के आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए।" इससे पहले कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने मंगलवार को तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई से मुलाकात की थी और भारत की चिंताओं से तालिबानी नेता को अवगत कराया था, कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारत की चिंता लाजिमी
भारत इस बात से चिंतित है कि सुन्नी और वहाबी आतंकवादी समूह तालिबान को अपनी पनाहगाह में बदल देंगे। और अफगानिस्तान इस्लामी आतंकवाद का केंद्र बन सकता है। वहीं माना जा रहा है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ी कर सकता है। इस मामले से परिचित लोगों ने पिछले महीने एएनआई को बताया था कि, "कश्मीर में सुरक्षा चौकसी बढ़ाई जाएगी लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह से नियंत्रण में हैं और अफगानिस्तान में पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों के पास कश्मीर में साजिश रचने की क्षमता अभी काफी कम है।"

पाकिस्तान को तालिबान ने वादा किया?
आपको बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की एक महिला नेता ने कहा था कि, तालिबान भारत से कश्मीर को 'आजाद' करने में पाकिस्तान की मदद करेगा। पीटीआई नेता नीलम इरशाद शेख ने एक टेलीविजन समाचार बहस के दौरान कहा था कि, "तालिबान ने कहा है कि वे हमारे साथ हैं और वे कश्मीर [मुक्त] में हमारी मदद करेंगे।" इससे पहले पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा था कि अफगानों ने "गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं"।












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