बर्दाश्त नहीं अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हमले, तालिबान की चेतावनी, भारतीय हेलीकॉप्टर करेगा इस्तेमाल!
पाकिस्तान और तालिबान के बीच की दूरी की सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है, जो पाकिस्तानी सैनिकों को लगातार निशाना बना रहा है...
काबुल/इस्लामाबाद, अप्रैल 25: पिछले साल 15 अगस्त को अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी करने वाले तालिबान को पाकिस्तान से काफी समर्थन मिला था और तालिबान की वापसी पर पाकिस्तान में जश्न मनाया गया था, लेकिन एक साल से कम भी वक्त में तालिबान शासन और पाकिस्तान के बीच में लड़ाई की नौबत आ चुकी है और तालिबान शासन ने धमकी देते हुए कहा है, कि अगर अफगानिस्तान पर अब पाकिस्तान हमला करता है, तो उसके अंजाम काफी भयानक होंगे।

पाकिस्तान को चेतावनी
अफगानिस्तान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि, तालिबान प्रशासन अपने पड़ोसियों से "आक्रमण" बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तानी हवाई हमलों में कथित तौर पर 47 अफगानी नागरिक मारे गए हैं, जिसके बाद पाकिस्तान को लेकर तालिबान बुरी तरह से भड़क गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान को इस बात का डर है, कि अफगानिस्तान के लोगों के बीच कहीं ये संदेश ना चला जाए, कि पड़ोसी देशों से अफगानिस्तान को बचाने में तालिबान सक्षम नहीं है, लिहाजा, तालिबान की स्थापना करने वाले मुल्ला उमर के बेटे याकूब उमर ने कहा कि, 'हम दुनिया और हमारे पड़ोसियों दोनों की समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और इसका स्पष्ट उदाहरण कुनार में हमारे क्षेत्र में उनके (पाकिस्तान) द्वारा आक्रमण है।" आपको बता दें कि, पिछले कुछ महीने में पाकिस्तान और तालिबान के बीच व्यापक मतभेद शुरू हो गये हैं।

तहरीक-ए-तालिबान का उपद्रव
दरअसल, पाकिस्तान और तालिबान के बीच की दूरी की सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है, जो पाकिस्तानी सैनिकों को लगातार निशाना बना रहा है और पिछले दो हफ्ते में ही टीटीपी ने करीब 20 पाकिस्तानी सैनिकों, यहां तक की एक कर्नल और एक मेजर तक को मौत के घाट उतार चुका है, जिससे बौखलाए पाकिस्तानी एयरफोर्स ने अफगानिस्तान में घुसकर टीटीपी के ठिकानों पर बमबारी की है। पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तानी एयरफोर्स ने लगातार दूसरी बार बमबारी की है, जिससे तालिबान बौखला गया है। पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में अफगानिस्तान के अशांत कबायली इलाके वजीरिस्तान क्षेत्र में दर्जनों लोग मारे गये हैं। इस्लामाबाद इस बात से नाराज है, कि तालिबान टीटीपी के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उस पर कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहा है।

टीटीपी पर फंस गया है पाकिस्तान!
तहरीक-ए-तालिबान वही संगठन है, जिसे पाकिस्तान 'बुरा' कहता आया है, जबकि अफगानिस्तान के तालिबान को पाकिस्तान ने हमेशा से 'अच्छा' तालिबान कहा है। लेकिन, असलियत ये है, कि दोनों तालिबान एक ही हैं। जब तक अफगानिस्तान में अमेरिका रहा, पाकिस्तान का ये प्रोपेगेंडा काम करता रहा, लेकिन अमेरिकी सैनिकों के निकलते ही अब पाकिस्तान के पास भागने के लिए जगह नहीं मिल रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि, टीटीपी का मकसद पाकिस्तान में शरिया आधारित हार्डकोर इस्लामिक शासन की स्थापना करनी है, जैसा अफगानिस्तान में किया गया है। टीटीपी पाकिस्तान के संविधान को खारिज कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान के लिए टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई करना इसलिए काफी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी टीटीपी को समर्थन करती है और ऐसे आतंकी, जो पकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हैं, उन्हें पाकिस्तान के अंदर ही छिपा लिया जाता है और सेना उन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती है।

टीटीपी और तालिबान के रिश्ते
पिछले साल अगस्त में काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने सबसे पहले जो काम किया, वो ये था, कि उसने टीटीपी के हार्डकोर नेताओं को जेल से रिहा कर दिया, जिसे पूर्ववर्ती अशरफ गनी के शासनकाल में गिरफ्तार किया गया था। वहीं, टीटीपी को अफगानिस्तान के अंदर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करवाए गये हैं और उन्हें पाकिस्तान में हमला करने के बाद अफगानिस्तान के अंदर सुरक्षा दी जाती है, जिससे पाकिस्तान काफी नाराज रहता है। कुछ महीने पहले तहरीक-ए-तालिबान ने तो यहां तक धमकी देते हुए कहा था, कि अगर पाकिस्तान में शरीयत कानून लागू कर दिया जाता है, तो वो पाकिस्तान की सेना को सार्वजनिक तौर पर माफी दे देगा, जैसा अफगानिस्तान में किया गया है। उस धमकी के बाद भी तत्कालीन इमरान खान की सरकार ने टीटीपी के साथ शांति वार्ता करने की कोशिश की थी, जिसे टीटीपी ने खारिज कर दिया था।

16 अप्रैल को स्थिति हुई खराब
16 अप्रैल को स्थिति उस वक्त और खराब हो गई, जब तालिबान ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के अंदर सीमा पार सैन्य हमले शुरू करने का आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 47 अफगान मारे गए थे। काबुल की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी हवाई हमलों ने खोस्त में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक किए, जिसमें 47 लोग मारे गये। पाकिस्तानी हमलों के बाद अफगानिस्तान के कई इलाकों में पाकिस्तान के खिलाफ भीषण प्रदर्शन शुरू हो गये, जिसमें पाकिस्तान विरोधी नारे तो लगाए ही गये, साथ ही तालिबान प्रशासन पर भी देश की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए गये।

सीमा पर मजबूत स्थिति बने
पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों से गुस्साए तालिबान के अंतरिम विदेश मंत्री मुत्ताकी ने काबुल में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत मंसूर अहमद खान को अपने दफ्तर में तलब कर लिया और बकायदा उन्हें धमकी भी दी गई। मुत्ताकी के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि, 'अफगान पक्ष ने खोस्त और कुनार प्रांतों पर हाल के हमलों की निंदा की है और इस तरह के कृत्यों को रोकने पर जोर दिया'। तालिबानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी, कि पाकिस्तान द्वारा सैन्य उल्लंघन से द्विपक्षीय संबंध बिगड़ेंगे और अगर पाकिस्तान फिर भी ऐसा करता है, तो फिर पाकिस्तान को इसका खामियाजा भुगतना होगा।

भारतीय हेलीकॉप्टर पर नजर
वहीं, अब रिपोर्ट ये भी है, कि अफगानिस्तान पर शासन करने वाला तालिबान, पाकिस्तानी एयरफोर्स के हमलों से काफी घबराया हुआ है और अब उसने अपनी वायुसेना को मजबूत करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान शासन ने भारत की चीतल हेलीकॉप्टर्स को भी ठीक करने के लिए कहा है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि, पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार को भारत की तरफ से जो चीतल हेलीकॉप्टर दिए गये थे, उसे ठीक कर लिया गया है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्ला खावरजमी ने रविवार को अपने बयान में कहा है कि, अफगानिस्तान में मौजूद हेलीकॉप्टर्स को ठीक किए जा रहे हैं। उन्होंन कहा कि, तालिबान की सरकार के पास फिलहाल 60 एयरक्राफ्ट हैं, जिसे इंजीनियर्स की टीम रिपेयर कर रही है। यानि, अब अगर पाकिस्तान की तरफ से एयरस्ट्राइक किए जाते हैं, तो तालिबान की तरफ से जवाबी कार्रवाई भी का जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications