क्या भारत के प्रति बदल रही तालिबान की सोच? काबुल में दूतावास फिर से शुरू करने का अनुरोध
नई दिल्ली, 20 अगस्त: अफगानिस्तान सरकार के सरेंडर के बाद से पूरे देश पर तालिबान का कब्जा हो गया है। ऐसे में वहां पर नए सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है। हालांकि अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि तालिबान राष्ट्रपति या उसके समकक्ष की जिम्मेदारी किसे देगा। इसको लेकर कई नामों पर चर्चा हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत ने काबुल स्थित दूतावास को बंद कर दिया। साथ ही वहां से राजदूत समेत सभी स्टॉफ को एयरलिफ्ट कर वापस देश बुला लिया, लेकिन तालिबान चाहता है कि भारत काबुल से राजनयिक संबंध बनाए रखे।

शेरू ने औपचारिक अनुरोध भेजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई उर्फ शेरू अफगानिस्तान पहुंच गए हैं। वो चाहते हैं कि भारत अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक उपस्थिति बनाए रखे। इस हफ्ते की शुरुआत में दोहा वार्ता में शामिल शेरू ने इसके संबंध में औपचारिक अनुरोध भी किया है। हालांकि भारत सरकार अपने नागरिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, जिस वजह से हाल ही में भारतीय वायुसेना की मदद से 200 ज्यादा लोगों को वापस लाया गया। जिसमें भारतीय राजदूत भी शामिल थे।

'ना करें कर्मचारियों की चिंता'
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जब तालिबानी नेता का संदेश भारतीय अधिकारियों को मिला, तो वो अचंभित रह गए, क्योंकि पहले तालिबान अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की आलोचना करता नजर आता था। शेर मोहम्मद ने अपने मैसेज में कहा कि उनका संगठन काबुल के हालत पर भारत की चिंताओं को समझता है, लेकिन उन्हें काबुल में भारतीय मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा की फिक्र नहीं करनी चाहिए।

काबुल में लश्कर के आतंकी?
वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी काबुल पहुंच गए हैं। इसके अलावा वो विभिन्न चेकपोस्ट पर तालिबानी आतंकियों के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। इस पर शेर मोहम्मद ने कहा कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। सभी एयरपोर्ट के साथ अन्य सभी चेकपोस्ट पूरी तरह से तालिबान के कब्जे में है। वो सिर्फ और सिर्फ तालिबानी लड़ाकों द्वारा संचालित की जा रही है।

अभी क्या हुआ फैसला?
तालिबान के ऑफर के बाद तुरंत भारत सरकार ने अधिकारियों के साथ इसका मूल्यांकन किया। साथ ही ये फैसला लिया कि अभी दूतावास को खोलना सही नहीं है। ऐसे में जिस तरह से वहां पर भारतीय लोगों और कर्मचारियों को निकालने का काम चल रहा है, वो वैसे ही जारी रहेगा।












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