तालिबान ने बनाया अफगानिस्तान सिखों को निशाना, गुरुद्वारे का किया नाकाबिल-ए-माफी अपमान
अफगानिस्तान में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों को तालिबानी आतंकी लगातार निशाना बनाते रहते हैं।
काबुल, अगस्त 06: कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तालिबान ने एक बार फिर से अफगानिस्तान में सिख धर्म का अपमान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने पूर्वी अफगानिस्तान के पकतिया प्रांत के एक गुरुद्वारे का अपमान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक तालिबानी आतंकियों ने गुरुद्वारे से पवित्र ध्वज निशान साहिब को हटा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के मुताबिक निशान साहिब को पखतिया प्रात के चमकानी इलाके में गुरुद्वारा थाला साहिब की छत से उतारा गया है।

तालिबान की करतूत
रिपोर्ट के मुताबिक निशान साहिब को ऐतिहासिक गुरुद्वारे से हटा दिया गया था, जिसे कभी सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक ने देखा था। इससे पहले पिछले साल अफगानिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय के नेता निदान सिंह सचदेवा को तालिबान ने गुरुद्वारे से अगवा कर लिया था। सचदेवा का 22 जून, 2020 को पखतिया प्रांत में अपहरण कर लिया गया था, और अफगानिस्तान सरकार और समुदाय के बुजुर्गों द्वारा किए गए प्रयासों के बाद रिहा कर दिया गया था। वहीं, गुरुद्वारे से पवित्र निशान के हटाए जाने के बाद सिख समुदाय में आक्रोश देखा जा रहा है। लेकिन मजहबी उन्माद में आतंकी बन चुके इन इस्लामी चरमपंथियों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
अफगानिस्तान में निशाने पर सिख
आपको बता दें कि अफगानिस्तान में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों को तालिबानी आतंकी लगातार निशाना बनाते रहते हैं। इससे पहले 25 मार्च को काबुल में एक पूजा स्थल पर इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने सिख समुदाय के कई लोगों को अगवा कर लिया था और फिर 30 सिखों को मार दिया था। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने कहा था कि हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी इसमें शामिल थे। आपको बता दें कि तालिबान अफगानिस्तान में अपने हिसाब से शरिया कानून के तहत राज स्थापित करना चाहता है और वो दूसरे धर्म मानने वालों को लगातार प्रताड़ित कर रहा है। हालांकि, वारदातों को अंजाम देने के बाद तालिबान के आतंकी घटना में हाथ होने की बात से साफ इनकार कर देते है।

अल्पसंख्यकों पर आतंक
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच अफगानिस्तान में काफी तेजी से हिंसा में वृद्धि देखी जा रही है। तालिबान मई की शुरुआत से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में कब्जा जमा चुका है और अब हेरात से काबुल की तरफ तालिबानी आतंकी बढ़ रहे हैं। हाल के हफ्तों में कई अफगान शहरों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है और कई अन्य शहरों में लड़ाई तेज हो गई है। युद्दग्रस्त इलाकों में पिछले कई सालों से लगातार अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, पकतिया इलाके में कई गुरुद्वारों को तालिबानी आतंकी तोड़ चुके हैं।

पाकिस्तान का साथ
आपको बता दें कि, तालिबान को लगातार पाकिस्तान का साथ भी मिल रहा है। अफगान सरकार ने कहा है कि 10,000 से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकवादी अफगानिस्तान घुस चुके हैं। इतना ही नहीं अफगानिस्तान सरकार ने यहां तक कहा है कि तालिबान के आतंकवादियों को पाकिस्तानी संस्थाओं में ट्रेनिंग दी गई है और इसका पूरा खर्चा इमरान खान की सरकार उठा रही है। अफगानिस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया को भेजे एक वीडियो संदेश में अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रवक्ता ने कहा है कि अफगानिस्तान में छद्म युद्ध जारी रखने के लिए हजारों आतंकी पाकिस्तान से दाखिल हो चुके हैं। इस संदेश में कहा गया है, 'हमारे पास पुख्ता खुफिया रिपोर्ट हैं कि पाकिस्तान से 10,000 से ज्यादा पाकिस्तानी अफगानिस्तान में घुस चुके हैं, जबकि 15,000 और को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा चुका है। इससे जाहिर होता है कि वहां तालिबान को संस्थागत रूप से लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है और उसपर खर्च किया जा रहा है।












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