तालिबान ने किया डूरंड रेखा को मानने से इनकार, PAK की उड़ी नींद, 'TTP का डर' बना महा-टेंशन

Taliban rejects Durand Line: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी हिंसक झड़पें तब और गंभीर हो गईं जब तालिबान ने खुलकर डूरंड रेखा को अस्वीकार करने का ऐलान कर दिया है। 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद, तालिबान अब उस सीमा रेखा को नहीं मानता जिसे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के रूप में मान्यता देता है।

इस तनाव का मुख्य कारण पाकिस्तान के अंदरूनी आतंकी हमलों के लिए तहरीक-ए-तालिबान (TTP) को जिम्मेदार मानना है, जिसे इस्लामाबाद अफगानिस्तान सरकार का संरक्षित बताता है। सीमा पर यह संघर्ष ऐसे समय में तेज हुआ जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री भारत दौरे पर थे, जिससे यह सवाल गहरा हो गया है कि क्या पाकिस्तान को अफगानिस्तान का भारत से मेलजोल बढ़ाना रास नहीं आ रहा है।

Taliban rejects Durand Line

तालिबान का खुला ऐलान, डूरंड रेखा को मानने से इनकार

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ता संघर्ष 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्ज़े के बाद से लगातार जारी है। दोनों देशों के सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें अब एक नियमित घटना बन गई हैं, जिसके मूल में कई ऐतिहासिक और सामरिक विवाद हैं।

तालिबान से बदला और TTP का मुद्दा

पाकिस्तान आज जिस तालिबान का विरोध कर रहा है, वह कभी उसका करीबी सहयोगी था। लेकिन अब पाकिस्तान सरकार का मानना है कि उसके क्षेत्र में होने वाले आतंकी हमलों के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जिम्मेदार है, जिसे कथित तौर पर अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबान सरकार का संरक्षण प्राप्त है। पाकिस्तान का दावा है कि तालिबान की सत्ता आने के बाद TTP की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, जिससे वह सीमा पार हवाई हमलों के लिए मजबूर हुआ है। वहीं, अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल बिना किसी उकसावे के उसके सीमा क्षेत्र में हवाई हमले कर रहे हैं। यह स्थिति पाकिस्तान की पुरानी सामरिक गहराई (Strategic Depth) की नीति के लिए एक बड़ी विफलता है।

डूरंड रेखा: ऐतिहासिक विवाद की जड़

दोनों देशों के आपसी विवाद की सबसे बड़ी वजह डूरंड रेखा (Durand Line) है, जिसे ब्रिटिश हुकूमत ने 1893 में खींचा था। पाकिस्तान इस 2,670 किलोमीटर लंबी रेखा को कानूनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन तालिबान ने अब औपचारिक रूप से इसे अस्वीकार करने का ऐलान कर दिया है। अफगानिस्तान में पश्तूनिस्तान बनाने के मुद्दे पर 1949 में पाकिस्तान के हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं रहे हैं। यह ऐतिहासिक विभाजन आज भी सीमा पर रहने वाले पश्तून आदिवासी समुदायों के बीच एक बड़े भौगोलिक और राजनीतिक तनाव का कारण बना हुआ है, जिसे तालिबान अब और हवा दे रहा है।

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भारत से मेलजोल और पाकिस्तान की बेचैनी

दोनों देशों के बीच यह हिंसक संघर्ष तब हुआ जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर थे। इससे यह राजनीतिक सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान के भारत के साथ बढ़ते राजनयिक और राजनीतिक मेलजोल से बेचैन है। ठीक उसी तरह, जैसे पाकिस्तान भारत की सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ कराता रहा है, अब वह अफगानिस्तान पर भी TTP आतंकियों को समर्थन देने का आरोप लगा रहा है। डूरंड रेखा पर तालिबान का खुला रुख और TTP का मुद्दा, दोनों देशों के बीच तनाव को निकट भविष्य में कम होने देने के कोई संकेत नहीं देते हैं।

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