Afghanistan बन रहा North Korea, Taliban ने इंटरनेट पर लगाया बैन, ठप हुईं बैकिंग और फ्लाइट सेवा
Afghanistan: तालिबान सरकार ने पूरे देश में दूरसंचार सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट काटे जाने के कुछ हफ्तों बाद उठाया गया। इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, देश पूरी तरह से इंटरनेट ब्लैकआउट का सामना कर रहा है। राजधानी काबुल स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया के दफ्तरों से भी संपर्क टूट गया है।
बैंकिंग और फ्लाइट सेवाओं पर असर
मोबाइल इंटरनेट, सैटेलाइट टीवी और अन्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। काबुल एयरपोर्ट से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं। राजनयिक अधिकारियों ने बताया कि इंटरनेट कटौती से बैंकिंग और ई-कॉमर्स सिस्टम पर बड़ा असर पड़ सकता है। जिसके बाद हर सेक्टर में कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तालिबान ने कारण नहीं बताया
तालिबान ने इस प्रतिबंध का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि "अनैतिकताओं को रोकने" के लिए इंटरनेट को फ़िल्टर करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। लेेकिन अनैतिकताओं को रोकने का तालिबान का ये कदम अब इलाके में सेवाओं को चलाने में भी बाधा बन रहा है।
आम लोग परेशान
कई अफगान नागरिकों ने बताया कि इंटरनेट बंद होने से उनकी पढ़ाई और काम प्रभावित हुआ है। एक पिता ने कहा कि उनकी बेटियों की ऑनलाइन क्लास रुक गई हैं। वहीं, एक महिला छात्रा ने बताया कि अब पढ़ाई और नौकरी की उम्मीदें भी टूट चुकी हैं। सिर्फ छात्रा ही नहीं बल्कि बड़ी तादाद में छात्रों को भी इसी तरह की कई समस्याओं से जूझना पड़ा रहा है।
उत्तर कोरिया से तुलना
पूर्व सांसद मरियम सोलेमनखिल ने सोशल मीडिया पर एलन मस्क को टैग करते हुए लिखा कि अफगान आवाजों की ऑनलाइन खामोशी बहरी कर देने वाली है। वहीं, अफगान पत्रकार हामिद हैदरी ने कहा कि अफगानिस्तान अब इंटरनेट डिस्कनेक्शन के मामले में उत्तर कोरिया जैसा हो गया है।
महिलाओं पर खास असर
तालिबान की पाबंदियों का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। उन्हें स्कूलों और विश्वविद्यालयों से दूर कर दिया गया है। अब इंटरनेट बंद होने के बाद उनकी आखिरी पढ़ाई का जरिया भी खत्म हो गया है।
महिलाओं की किताबें भी बैन कर चुका है तालिबान
इस फरमान के पहले तालिबान ने महिलाओं द्वारा लिखी गईं किताबों को सिलेबस से हटाते हुए बैन कर दिया था। इसके अलावा महिला लेखकों और रिसर्चर्स को आगे भी किताबें लिखने पर पाबंदी लगा दी है। तालिबान की इन दमनकारी नीतियों की चर्चा अब हर जगह हो रही है।
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