'एक साल बाद तालिबान-चीन-पाकिस्तान करेंगे भारत पर हमला'
काबुल, 16 अगस्त। अफगानिस्तान के तकरीबन पूरे हिस्से पर अब तक तालिबान का कब्जा हो गया है। कंधार के बाद तालिबानी लड़ाके काबुल पहुंच गए हैं और उन्होंने राष्ट्रपति के पैलेस पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही तालिबान ने आधिकारिक ऐलान कर दिया है कि हम उन लोगों साथ खून-खराबा नहीं करना चाहते हैं जो इस्लामिक रिपब्लिक गवर्नमेंट के समर्थन में थे, हम सत्ता का हस्तांतरण चाहते हैं।
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तालिबान के हाथ में अफगानिस्तान
ऐसे में अब यह तय है कि तालिबान अफगानिस्तान में नई सरकार चलाएगा, इसके साथ ही 2001 में 9/11 के बाद अमेरिका की अफगानिस्तान में शुरू हुई आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई फिर से उसी मुहाने पर आकर खड़ी हो गई है जहां से यह शुरू हुई थी। अफगानिस्तान में एक बार फिर से तालिबान का कब्जा हो गया है। ऐसे में भारत के लिए अफगानिस्तान के हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं।

भारत के सामने दो बड़ी चुनौती
तालिबान काबुल शहर में प्रवेश कर चुका है, हालांकि काबुल एयरपोर्ट पर गोलीबारी की खबर सामने आई है लेकिन किसी के मारे जाने की खबर सामने नहीं आई है। इन मुश्किल हालात में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैसे इस मानवीय संकट से निपटा जाए। बड़ी संख्या में लोग अपनी जान बचाने के लिए शरण ले रहे हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या है कि जो लोग तालिबान के डर से अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं वह आनन-फानन में भारत के वीजा और पासपोर्ट के लिए आवेदन करेंगे, इस स्थिति को कैसे संभाला जाए। फिलहाल अफगानिस्तान में सबसे बड़ा खतरा महिलाओं और बच्चों को है।

भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर
भारत ने अमेरिका में करोड़ों, अरबों रुपए का निवेश किया था, लेकिन जिस तरह से तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया उसके बाद भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां भारत का अफगानिस्तान में किया गया निवेश पूरी तरह से दांव पर है तो दूसरी तरफ तालिबान के जरिए चीन और पाकिस्तान का खतरा भी भारत के लिए नए संकट के रूप में सामने आकर खड़ा हो गया है।

एक साल बाद भारत पर करेंगे हमला
वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इस बात की आशंका जताई है कि एक साल तक तालिबान अफगानिस्तान में अपने पैर मजबूत करेगा और इसके बाद पाकिस्तान और चीन के साथ मिलकर भारत पर हमला करेगा। स्वामी ने कहा कि अफगानिस्तान में काबिज होने के बाद तालिबान पहले एक साल में अफगानिस्तान सरकार के नेताओं के रूप में होगा,जिनके विचार उदारवादी हैं। इस दौरान प्रांतीय नेता अपनी बर्बरता और वास्तविक क्रूरता को लागू करेंगे और कट्टर तालिबानी नेताओं के तौर पर प्रतिनिधित्व करेंगे। एक साल के बाद अफगानिस्तान सुरक्षित होगा और तालिबान, पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत पर हमला करेंगे।

पीएम मोदी को दी ये सलाह
वहीं अमेरिका की ओर से कई देशों को एडवांस नोटिस जारी की गई है। अमेरिकी नोटिस में भारत का जिक्र नहीं किया गया है जिसे स्वामी भारत के लिए कूटनीतिक हार के तौर पर देख रहे हैं। स्वामी ने कहा कि पीएम मोदी को इसका संज्ञान लेना चाहिए। अमेरिकी लोगों की बिना लेन-देन के आवभगत करना बड़ी भूल होगी। अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अफगानिस्तान छोड़ने वाले लोगों को हर संभव मदद करने के लिए हम कोशिश कर रहे हैं।












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