टोलो न्यूज के पत्रकार को तालिबान ने गरीबी पर रिपोर्ट बनाने के लिए पीटा, मौत की बात को बताया अफवाह

तालिबान ने काबुल में टोलो न्यूज के पत्रकार को पीटा, मौत की बात अफवाह

काबुल, अगस्त 26: अफगानिस्तान के पहले स्वतंत्र समाचार चैनल टोलो न्यूज के पत्रकार जिआर खान को तालिबानी आतंकियों ने जमकर पिटाई की है, लेकिन उनकी मौत की खबर गलत है। काबुल में टोलो न्यूज ने अपने रिपोर्टर जिआर खान याद ने अपनी मौत की खबर को अफवाह बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिआर खान को राजधानी काबुल के न्यू सिटी इलाके में तालिबानी आतंकियों द्वारा बंदूक की नोक से खतरनाक तरीके से पीटा गया। जिसकी पुष्टि खुद रिपोर्टर जिआर खान ने एक ट्वीट में की है। और मौत की बात का खंडन कर दिया है।

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    Afghanistan: Tolo New Reporter Ziar Yaad Khan की मौत की खबर का सच | Taliban | वनइंडिया हिंदी
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    पहले उड़ी थी मौत की अफवाह

    पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि तालिबान ने टोलो न्यूज के पत्रकार की हत्या कर दी है, जिसका खंडन खुद पत्रकार जिआर खान ने किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि, "रिपोर्टिंग के दौरान मुझे काबुल के न्यू सिटी में तालिबान ने पीटा है। कैमरा, तकनीकी उपकरण और मेरा निजी मोबाइल फोन भी छीन लिया गया है। कुछ लोगों ने मेरी मौत की खबर फैला दी है जो झूठी है। तालिबान एक बख्तरबंद गाड़ी से आये थे और बंदूक की नोक से मेरी पिटाई की थी''

    'पता नहीं क्यों की मारपीट'

    घटना के बाद ट्वीट करते हुए टोलो न्यूज के पत्रकार जिआर खान ने कहा कि ''मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि आखिर उन लोगों ने मेरे साथ मारपीट क्यों की, अचानक मेरे ऊपर उन्होंने हमला क्यों कर दिया। मेरे साथ जो सलूक किया गया है, उस मुद्दे को तालिबान के नेताओं के साथ शेयर किया गया है, हालांकि, अभी तक हमला करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया गया है, जो अफगानिस्तान में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर काफी गंभीर खतरा है।

    आपको बता दें कि तालिबान पहले भारतीय पत्रकार और पुलित्जर अवार्ड विजेता दानिश सिद्धीकी की हत्या कर चुका है। उनकी हत्या उस वक्त की थी, जब तालिबान और अफगान सैनिकों के बीच लड़ाई चल रही थी। वहीं, काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने महिलाओं के ऑफस जाने पर पाबंदी लगा दी है। वहीं, सरकारी न्यूज एजेंसियों में महिलाओं की एंट्री पर ही बैन लगा दिया गया है। तालिबान ने साफ कर दिया है कि अब अफगानिस्तान में महिलाओं को इस्लामी कानून के हिसाब से रहना पड़ेगा।

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