तालिबान में बंधक अमेरिकी नागरिक क्या रिहा करा पाएंगे बाइडेन? उम्मीद पूरी, डील अब तक अधूरी
Taliban Us Hostage Deals Biden: राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तीन अमेरिकी नागरिकों के परिवारों से संपर्क कर तालिबान के बंधकों की रिहाई के प्रयासों पर चर्चा की। इनमें रयान कॉर्बेट, जॉर्ज ग्लेज़मैन, और महमूद हबीबी शामिल हैं।
अमेरिकी सरकार इन नागरिकों को छुड़ाने के लिए ग्वांतानामो बे में बंद तालिबान से जुड़े मुहम्मद रहीम की रिहाई पर विचार कर रही है, लेकिन अब तक कोई डील पूरी नहीं हो पाई है।

तालिबान के बंधक: कौन हैं ये अमेरिकी नागरिक?
रयान कॉर्बेट
- 2021 में अफगानिस्तान में अमेरिकी समर्थित सरकार के पतन के बाद वहां रह रहे थे।
- अगस्त 2022 में तालिबान ने उन्हें व्यावसायिक यात्रा के दौरान अगवा कर लिया।
जॉर्ज ग्लेज़मैन
- अटलांटा में एयरलाइन मैकेनिक।
- दिसंबर 2022 में अफगानिस्तान छोड़ने की कोशिश के दौरान तालिबान ने हिरासत में ले लिया।
महमूद हबीबी
- अफगान-अमेरिकी व्यवसायी, जो एक दूरसंचार कंपनी के लिए ठेकेदार थे।
- 2022 में तालिबान ने अगवा किया। ड्राइवर और अन्य 29 कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया, लेकिन हबीबी अब भी बंदी हैं।
रहीम की रिहाई: क्यों है डील जटिल?
- मुहम्मद रहीम पर अल-कायदा का संदेशवाहक और संचालक होने का आरोप है।
- 2008 से ग्वांतानामो बे में हिरासत में हैं, लेकिन उनके खिलाफ कभी कोई आरोप नहीं लगाया गया।
- अमेरिका उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
- रहीम के वकील का दावा है कि अमेरिकी सरकार ने उन्हें गुप्त रखा है और उनके खिलाफ सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
बाइडेन की स्थिति
- 12 जनवरी को बाइडेन ने कहा कि तालिबान महमूद हबीबी को रिहा नहीं करता, तो रहीम को भी रिहा नहीं किया जाएगा।"
- परिवारों ने बाइडेन की प्रतिबद्धता की सराहना की, लेकिन उनसे त्वरित निर्णय लेने की अपील की।
बंधकों की रिहाई पर बनी असहमति
- 20 जनवरी तक डील नहीं होने पर, यह मामला ट्रंप प्रशासन को सौंपा जाएगा।
- ट्रंप प्रशासन का रुख ग्वांतानामो बंदियों की रिहाई को लेकर स्पष्ट नहीं है।
- रहीम का मामला जटिल है, और नई सरकार इसे कैसे संभालेगी, यह अनिश्चित है।
परिवारों की अपील
रयान कॉर्बेट के वकील रयान फेही ने कहा कि अब फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी जीवन को प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्वांतानामो: रहीम और अन्य बंदियों की स्थिति
- ग्वांतानामो में अब सिर्फ 15 बंदी बचे हैं।
- पूर्व में यहां 800 से अधिक बंदी थे।
- रहीम उन कुछ बंदियों में से एक हैं, जिन पर कभी औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए।
क्या डील संभव है?
- तालिबान-अमेरिका के बीच यह डील अस्थिरता और अविश्वास के कारण जटिल हो गई है।
- बाइडेन प्रशासन तेजी से डील पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।
- अगर डील समय पर पूरी नहीं होती, तो यह मामला नई सरकार के एजेंडे में जाएगा।
ये भी पढ़ें- Diplomacy: भारत-तालिबान की दोस्ती देख पाकिस्तान हैरान, मोदी की डिप्लोमेसी से कैसे करीब आया अफगानिस्तान?












Click it and Unblock the Notifications