बामियान में हजारा नेता की मूर्ति तोड़ कर तालिबान ने अपना रंग दिखाया, जानिए 20 साल पहले क्या हुआ था ?
काबुल, 18 अगस्त: तालिबान लगता है कि बदला नहीं है। उसने 20 साल पहले वाला ही अपना क्रूर चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है। तालिबान में अफगानिस्तान के काबुल शहर पर कब्जा करने के दो दिन बाद ही बामियान में हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की मूर्ति को उड़ा दिया है। यह घटना 2001 के आतंक की याद दिला रही है। तब तालिबान ने महात्मा बुद्ध की भव्य प्रतिमा को तबाह कर दिया था। हाल के दिनों में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि तालिबान बदल चुका है, लेकिन पिछले दोनों की कुछ घटनाओं ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तालिबान ने उड़ाई हजारा नेता की मूर्ति
अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले आतंकी संगठन तालिबान ने कथित रूप से बामियान में हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की प्रतिमा को तबाह कर दिया है। गौरतलब है कि हजारा समुदाय के नेता मजारी की हत्या 1995 में तालिबान ने ही कर दी थी। मजारी की मूर्ति तोड़े जाने की जानकारी मानवाधिकार कार्यकर्ता सलीम जावेद ने ट्विटर पर उनकी तस्वीरें शेयर करके दी हैं। गौरतलब है कि वैसे तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में आम माफी की घोषणा कर रखी है और महिलाओं तक से उनकी सरकार में शामिल होने को कहा है। ऐसा करके तालिबान यह साबित करना चाहता है कि वह सुधर चुका है और उसके रवैए में बदलाव आ चुका है। लेकिन, उसकी हरकत काफी भयावह लग रहे हैं। (अब्दुल अली मजारी की मूर्ति-सौजन्य सलीम जावेद ट्विटर )

तालिबान ने धोखे से की थी मजारी की हत्या
अब्दुल अली मजारी हजारा समुदाय के एक बड़े नेता थे और उन्होंने तालिबान के खिलाफ संघर्ष की अगुवाई की थी। 1946 में पैदा हुए मजारी ने सोवियत संघ की सेना के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी थी। वह हिज्ब-ए-वहादत पार्टी के नेता थे और तालिबान ने तब धोखे से उनकी हत्या कर दी थी और यह बात कबूलने के लिए तैयार नहीं हुआ। दरअसल, 1995 में मजारी को तालिबान ने एक बैठक के नाम पर बुलाया और अगवा कर लिया। बाद में उन्हें अत्यधिक यातनाएं देकर मार डाला। लेकिन, तालिबान की ओर से दलील दी गई कि कंधार ले जाते वक्त उन्होंने हमले की कोशिश की थी और उसी दौरान उनकी मौत हो गई। मरने के बाद उन्हें मजार-ए-शरीफ में दफन किया गया और 2016 में अफगान सरकार ने उन्हें शहीद घोषित किया।

2001 में तालिबान ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा तबाह कर दी थी
अकेले मजारी नहीं हैं। तालिबान ने हजारा समुदाय को लगातार निशाना बनाया है। यह समुदाय मुख्य तौर पर मध्य अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाके में बसा है, जिसे हजारात के नाम से जाना जाता है। हजारों को मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खां का वंशज माना जाता है, जिसने 13वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर राज किया था। हजारा सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने सलिमा मजारी को भी कैद कर लिया है, जो देश की कुछ महिला जिला गवर्नरों में से एक हैं। वह बल्ख की हजारा जिला चहारकिंत की गवर्नर हैं। तालिबान की ताजा करतूत उसके 20 साल पहले वाले आतंक की याद ताजा कर रहा है। 2001 में उसने बामियान घाटी में भगवान महात्मा बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा को भंग कर दिया था। दूसरी संस्कृति पर तालिबान के प्रहार का वह सबसे बड़ा प्रमाण बन गया।

अफगानिस्तान लौट रहा है तालिबान का आतंक राज
सलीम जावेद ने भगवान बुद्ध वाली घटना का जिक्र करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है, 'तो तालिबान ने बामियान में मारे गए हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की मूर्ति को उड़ा दिया है। पिछली बार उन्होंने उन्हें मार डाला था, बुद्ध की विशाल मूर्तियों और सभी ऐतिहासिक और पुरातत्व स्थलों को उड़ा दिया था।' तालिबान ने सबको माफ करने का दावा करते हुए शरिया कानून के मुताबिक महिलाओं को भी काम करने की आजादी देने की बात कही है। इसपर सलीम ने तंज कसा है, 'बहुत ज्यादा 'आम माफी' ।'












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