दिल्ली से दरभंगा नहीं बल्कि हंगरी से वेस्टर्न यूरोप जा रही है यह ट्रेन
बुडापेस्ट। यूरोप इस समय बड़ी संख्या में आ रहे शरणार्थियों के संकट से जूझ रहा है। आलम यह है कि यूरोप के कई बड़े देशों ने आईएसआईएस से प्रभावित देशों के नागरिकों को अपने यहां लेने से मना कर दिया है।

हंगरी से जर्मनी की ओर से जाने वाली कई ट्रेनों को बंद कर दिया गया है। जो ट्रेनें चल रही हैं, उनमें यह नजारा आम है। भीड़ इस कदर है कि आपको पैर तो क्या सांस लेने के लिए भी ठीक से जगह नहीं मिल पाएगी।
जहां एक ओर ब्रिटेन के राष्ट्रपति डेविड कैमरॉन ने साफ कर दिया है कि उनका देश शरणार्थियों को जगह देने को तैयार है तो वहीं दूसरी तरफ अब संयुक्त राष्ट्र को इस मसले पर आगे आना पड़ा है।
यूएन ने साफ कर दिया है कि यूरोपियन यूनियन को किसी भी तरह से 200,000 रिफ्यूजीज को अपने यहां शरण देनी ही पड़ेगी।
जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस, इटली, हंगरी, ऑस्ट्रिया और पौलेंड ने साफ इंकार कर दिया है कि वे किसी भी तरह से अपने यहां पर सीरिया और आईएसआईएस प्रभावित दूसरे जगहों से आने वाले लोगों को पनाह नहीं देंगे।
तीन वर्ष के बच्चे अयलान की मौत के बाद से अब यूरोप के रवैये पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यूएन का कहना है कि इस संकट ने दुनिया के लिए कभी न भूलने वाला पल लेकर आया है। इससे दुनिया को निबटना ही पड़ेगा और शरणार्थियों को जगह देनी ही पड़ेगी।












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