सीरिया के किस हिस्से को कौन करता है कंट्रोल, विद्रोही कौन हैं, अलेप्पो पर कब्जे से गृहयुद्ध पर क्या होगा असर?
Syria Civil War Explained: सीरिया में पिछले कुछ साल से गृहयुद्ध की आग की लपटें थम गईं थीं, लेकिन विद्रोहियों ने सरकारी फोर्स के खिलाफ सबसे बड़े हमले को अंजाम देते हुए अलेप्पो शहर पर कब्जा कर लिया है, जिसने एक बार फिर से गृहयुद्ध के ज्वाले को भड़कने की आशंका को जन्म दे दिया है।
विद्रोहियों का नया सैन्य अभियान अचानक बुधवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अलेप्पो प्रांत में शुरू हुआ। ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, गुरुवार को विपक्षी बलों ने आगे बढ़ते हुए कई नए गांवों पर कब्जा कर लिया है।

एक विद्रोही कमांडर ने कहा, कि इस हमले का मकसद सरकारी बलों और उनके ईरान समर्थित मिलिशिया सहयोगियों के हमलों को रोकना है।
सीरिया में विद्रोहियों ने अचानक हमले उस वक्त शुरू किए हैं, जब इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच चल रहे घातक संघर्ष ने ईरान को अपने प्रॉक्सी की मदद करने के लिए मजबूर कर दिया और ईरान का ध्यान सीरिया से बंट गया। इसी का फायदा विद्रोही बलों ने उठाया और देश के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया।
दो दिनों की भीषण लड़ाई में दोनों पक्षों के 150 से ज्यादा लड़ाके मारे गए हैं। ऑब्जर्वेट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में करीब 100, विद्रोही समूह से हैं, जबकि 54 लड़ाके सरकारी हैं। हालांकि, हम मरने वालों की सटीक संख्या की पुष्टि करने में असमर्थ हैं और संख्या की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
वहीं, बचाव समूह व्हाइट हेल्मेट्स ने कहा है, कि सीरियाई और रूसी हवाई हमलों में एक दर्जन से अधिक नागरिक मारे गए हैं।
सीरिया में पिछले कई सालों से बशर अल-असद का शासन है, जिनकी सत्ता को बनाए रखने में लगातार रूस और ईरान ने मदद की है। रूस ने विद्रोहियों पर एयरस्ट्राइक किए हैं। बशर अल-असद का शासन निरंकुश और क्रूर माना जाता है और उनके नेतृत्व में देश का विकास ठप पड़ गया है।

सीरिया गृहयुद्ध में विद्रोही कौन हैं?
विद्रोहियों के अचानक हमले और अलेप्पो शहर पर कब्जे ने एक बार फिर से तमाम सरकार विरोधी गुटों को एकजुट करना शुरू कर दिया है, लिहाजा गृहयुद्ध के फिर से भड़कने की संभावना काफी ज्यादा बन गई है। 2011 से शुरू हुए इस युद्ध में विद्रोहियों ने राष्ट्रपति अल-असद को सत्ता से बाहर निकालने के लिए कड़ी लड़ाई लड़ी है और एक समय पर उन्होंने देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था, लेकिन रूसी एयरस्ट्राइक की वजह से उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सीरिया के मुख्य विद्रोही समूह का नाम हयात तहरीर अल-शाम है, जो पहले आतंकवादी समूह अल-कायदा से जुड़ा हुआ था। यह उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित करता है, जो अभी भी विपक्षी समूहों के कब्जे में है।
सीरिया के विद्रोही समूह को ISIS जैसे आतंकी संगठनों के साथ साथ तुर्की के विद्रोही समूह का भी समर्थन हासिल है।
हालांकि, इन सभी विद्रोहियों का मकसद बशर अल-असद के शासन को खत्म कर पूरे सीरिया पर अपना नियंत्रण हासिल करना है, लेकिन साझा दुश्मन होने के बाद भी ये विद्रोही गुट आपस में भी लड़ते रहते हैं, जिसकी वजह से भारी संख्या में आम लोग मारे जाते हैं। आपसी झगड़ों की वजह से इनके शासन से लड़ने की क्षमता भी लगातार कमजोर होती रहती है।

आक्रामक हमले के लक्ष्य क्या हैं?
विद्रोहियों के ऑपरेशन रूम के सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल हसन अब्दुलगनी ने हमले की घोषणा करते हुए एक वीडियो बयान में कहा है, कि हमले का मकसद विपक्ष के कब्जे वाले क्षेत्र पर सीरियाई हवाई हमलों और अन्य हमलों को रोकना था।
बयान में कहा गया, कि "हमारे लोगों से उनकी गोलीबारी को पीछे धकेलने के लिए, यह ऑपरेशन कोई विकल्प नहीं है। यह हमारे लोगों और उनकी भूमि की रक्षा करने का दायित्व है।" उन्होंने कहा, कि "यह सभी के लिए स्पष्ट हो गया है कि ईरानी भाड़े के सैनिकों सहित शासन के मिलिशिया और उनके सहयोगियों ने सीरियाई लोगों पर खुले युद्ध की घोषणा की है।"
ईरान ने पूरे युद्ध में सीरियाई सरकार का समर्थन किया है, अपने शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड बल के सलाहकारों और कमांडरों को ठिकानों और अग्रिम पंक्तियों में भेजा है और सरकार की रक्षा के लिए हजारों लड़ाकों के साथ मिलिशिया का समर्थन किया है।

सीरिया की सरकार ने हमले पर क्या कहा?
सीरियाई सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया, कि सरकारी बल गांवों, कस्बों और सैन्य स्थलों पर "बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले" का सामना कर रहे हैं। विद्रोह के शुरुआती दिनों से ही सरकार ने सभी विद्रोहियों को "आतंकवादी" बताया है।
सरकार ने कहा कि वह "मित्रवत बलों के साथ सहयोग करके" जवाब दे रही है, लेकिन उसने यह नहीं बताया, कि वे बल कौन थे। उसने विद्रोही पक्ष को भारी नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया है।

मिडिल ईस्ट संकट का सीरिया पर असर?
हालांकि, सीरिया पिछले एक साल में मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा है, लेकिन इसका क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के लिए छद्म युद्धक्षेत्र रहा है। इजराइल लगातार सीरिया पर भीषण हमले करता रहा है। इजराइल का दावा है, कि हिज्बुल्लाह ने सीरिया में कई ठिकाने बना रखे हैं। 7 अक्टूबर 2023 को गाजा पट्टी से इजराइल पर हमास के हमले के बाद इजराइल ने लगातार सीरिया पर बम बरसाए हैं।
इजराइली सेना ने कहा है, कि इनमें से कुछ हमले हिज्बुल्लाह और ईरान के बीच हथियारों और खुफिया जानकारी के प्रवाह को रोकने के लिए किए गए हैं। हथियार और पैसा, लंबे समय से ईरान से सीरिया की सीमाओं के पार लेबनान में हिज्बुल्लाह तक जाता रहा है। इसी साल अप्रैल में, सीरिया के दमिश्क में ईरानी दूतावास परिसर के एक हिस्से पर हुए घातक इजराइली हमले में कई वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारे गए थे।
ईरानी मीडिया ने गुरुवार को बताया, कि विद्रोहियों के नए हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक कमांडर की मौत हो गई है।
सीरिया के किस हिस्से पर किसका कंट्रोल?
सीरिया में पिछले 10 सालों से ज्यादा वक्त तक प्रत्यक्ष युद्ध, गृहयुद्ध और छद्मयुद्ध चला है और इस्लामिक स्टेट समूह के आक्रमण ने सीरिया को अलग-अलग नियंत्रण वाले क्षेत्रों में विभाजित कर दिया है।
सरकार अब देश के 60% से ज्यादा हिस्से पर नियंत्रण रखती है, जिसमें ज्यादातर बड़े शहर शामिल हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। गृहयुद्ध में विपक्ष की ताकत के चरम के समय और इस्लामिक स्टेट समूह द्वारा सीरिया के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने के बाद, सरकार ने देश के ज्यादातर हिस्से पर नियंत्रण खो दिया था।
लेकिन 2015 में स्थिति बदल गई, जब रूस की सेना ने राष्ट्रपति असद की मदद के लिए हस्तक्षेप किया।
हालांकि, रूस के युद्ध में शामिल होने के बाद भी देश के बड़े हिस्से सरकार के नियंत्रण से बाहर है, जिसमें उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में विपक्ष के कब्जे वाले इलाके शामिल हैं, जहां संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समर्थित कुर्द नेतृत्व वाली मिलिशिया का दबदबा है।
सीरिया के सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्से, जिन्हें विद्रोही कंट्रोल करते हैं, उनमें इदलिब और अलेप्पो प्रांत के कुछ हिस्से शामिल हैं और इन हिस्सों में करीब 50 लाख लोग रहते हैं। उनमें से आधे से ज्यादा लोग सीरिया में अपने घरों से विस्थापित हो गए थे।
हालांकि इस्लामिक स्टेट समूह के 2019 में सीरिया से पैर पूरी तरह उखड़ गये, लेकिन एक बार फिर से उसने अपने स्लीपर सेल बनाने शुरू कर दिए हैं, जिनके बारे में माना जाता है, कि वे सीरिया के विशाल रेगिस्तान में छिपे रहते हैं और सरकारी सैनिकों और नागरिकों पर हमले करते हैं।
कितना महत्वपूर्ण शहर है अलेप्पो?
हजारों सालों से व्यापार मार्गों और साम्राज्यों के चौराहे पर स्थित, अलेप्पो मध्य पूर्व में वाणिज्य और संस्कृति के केंद्रों में से एक है। युद्ध से पहले अलेप्पो में 23 लाख लोग रहते थे। विद्रोहियों ने 2012 में शहर के पूर्वी हिस्से पर कब्जा कर लिया और यह सशस्त्र विपक्षी गुटों की उन्नति का सबसे गौरवपूर्ण प्रतीक बन गया।
2016 में, रूसी हवाई हमलों ने सरकारी बलों का समर्थन किया और जमकर बमबारी की। रूस मिसाइल हमलों की वजह से विद्रोहियों के पैर उखड़ने लगे और आखिरकार अलेप्पो शहर पर फिर से सरकार का नियंत्रण स्थापित हो गया। हालांकि, शहर अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है।












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