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Feature: वो देश, जहां पत्नियों को सौंपकर लोग करते हैं मेहमानों का स्वागत, लेकिन अब खतरे में पड़ा अस्तित्व

Himba Tribe Story: दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका में आदिवासी महिलाएं अपना दिन गाय का दूध निकालने, अपने बच्चों की देखभाल करने और अजनबियों के साथ यौन संबंध बनाने में बिताती हैं। ये हिम्बा जनजाति के लोग हैं, जो उत्तरी नामीबिया की एक अर्ध-खानाबदोश जनजाति है, जो आगंतुकों के साथ यौन संबंध बनाने को मेहमाननवाजी और अपना सबसे बड़ा काम मानती हैं।

लेकिन, हिम्बा जनजाति की आबादी अब सिकुड़ रही है और अब इनके अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिम्बा जनजाति की आबादी लगभग 50,000 है और यह एक बहुत ही पारंपरिक, शिकारी-संग्रहकर्ता जीवन शैली जीते हैं।

वहीं, इस जनजाति के मर्ज खेती करते हैं, पशुओं की देखभाल करते हैं, उन्हें चराते हैं और जानवरों का शिकार करते हैं, ताकि परिवार का पेट भर सकें। जबकि महिलाएं और लड़कियां, गांव में पानी ले जाने, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने और गायों का दूध निकालने जैसे ज्यादातर मेहनती काम करती हैं। लेकिन, जब आगंतुक जनजाति के साथ घुलने-मिलने के लिए आते हैं, तो उन्हें एक बहुत ही एक्स-रेटेड काम भी सौंपा जाता है।

The story of Himba tribe

मेहमानों का अनोखा स्वागत

इस समुदाय से मिलने जब कोई मेहमान आता है, भले ही वो कोई अजनबी ही कोई क्यों ना है, लेकिन अगर वो किसी के घर ठहरने चला जाता है, तो फिर उस परिवार की ये जिम्मेदारी बन जाती है, कि उस मेहमान के स्वागत में कोई कमी ना रहे।

मेहमानों रात में आनंद ले सकें, इसके लिए परिवार की महिलाएं रात का वक्त मेहमान के साथ बिताती हैं और उनके साथ यौन संबंध बनाती हैं। इसके पीछे उनका मानना होता है, कि मेहमानों की रात बेहतरीन गुजरे और उनके स्वागत में कोई कमी ना रगे।

आदिवासी महिलाएं अपने पतियों को अपना स्वामी मानती हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है, कि वे उनकी आज्ञा का पालन करें, इसलिए यदि वह उनसे किसी अतिथि के साथ सोने के लिए कहता है, तो उन्हें उसका पालन करना होता है।

उसके पास उसके साथ यौन संबंध बनाने से इनकार करने का विकल्प भी होता है, लेकिन अगर वह ऐसा करती हैं, तो भी उसे उसके साथ उसी कमरे में सोना होगा। यानि, भले ही यौन संबंध ना बनाएं, लेकिन उन्हें सोना मेहमान के कमरे में ही पड़ेगा।

घाना के एक लोकप्रिय यूट्यूबर वोडे माया ने इस जनजाति क्षेत्र का दौरा किया और बताया, कि ये परंपराएं कैसे काम करती हैं।

कैसे काम करती हैं ये परंपरा?

यूट्यूबर वोडे माया ने बताया, कि "जब कोई मेहमान घर आता है, तो एक व्यक्ति उसे ओकुजेपिसा ओमुकाज़ेंदु ट्रीटमेंट देकर अपने अतिथि को देखने की स्वीकृति और खुशी दिखाता है। पत्नी को मेहमान के साथ रात बिताने के लिए कहा जाता है, जबकि पति दूसरे कमरे में सोता है।"

उन्होंने कहा, कि "ऐसे मामले में, जहां कोई दूसरा कमरा उपलब्ध नहीं होता है, उस वक्त उसका पति बाहर सोएगा।"

यूट्यूबर वोडे माया ने एक जनजाति के सदस्य से पूछा, कि उन्होंने अपनी पत्नियों को सेक्स के लिए क्यों पेश किया, तो उन्हें जवाब मिला "हिम्बा संस्कृति बहुत अलग है।" जनजाति के एक आदमी ने आगे कहा, कि "इसका मतलब ये नहीं है, कि कोई महिला धोखा दे रही है, बल्कि, जब आप एक आगंतुक के रूप में यहां आते हैं, और आपके पास सोने के लिए कोई जगह नहीं है, और मेरे पास एक पत्नी से ज्यादा है, तो मैं अपनी पत्नी को बता सकता हूं, कि मेरा चचेरा भाई आया है और हम उसे, उसके लिए तैयार करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, कि "उनके पास अपने लिए पूरा कमरा होगा। हम अपने आगंतुकों को अपनी पत्नियां देते हैं और यही हमारी संस्कृति है।" उन्होंने कहा, कि हम दिखाते हैं, कि "हम अपने आगंतुकों के साथ कितना अच्छा व्यवहार करते हैं।"

यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, क्योंकि इससे समुदाय को "लाभ" होने का दावा किया जाता रहा है।

आदिवासियों का मानना है, कि यह ईर्ष्या को कम करता है और स्वस्थ, खुशहाल, पोषित रिश्तों को बढ़ावा देता है।

इस तथ्य के बावजूद, कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की कोई भूमिका नहीं है।

वे एक बहुपत्नी जनजाति हैं, और समुदाय के भीतर पुरुषों को जितनी चाहें उतनी महिलाओं से शादी करने की अनुमति है।

औसत हिम्बा पुरुष कम से कम दो पत्नियां रखता है और उसे 10 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने की भी इजाजत होती है।

जनजाति के भीतर महिलाओं को अपने पति की मांगों के प्रति पूरी तरह से समर्पित होना जरूरी होता है।

इसके अलावा, एक और असामान्य परंपरा ये भी है, कि जब कोई मर्द अपने ससुराल जाता है, तो उसकी पत्नी को अपनी सहेलियों को अपने पति को सौंपना पड़ता है।

The story of Himba tribe

धीरे-धीरे आ रहा है बदलाव

चूंकि पश्चिमी प्रभाव नामीबिया में फैलना शुरू हो गया है, तो हिम्बा समुदाय के नये जेनरेशन का कहना है, कि उन्हें अपने "पिछड़े" तरीकों पर शर्म आती है।

हिम्बा नाम के व्यक्ति ओवेन कटापारो ने बीबीसी को बताया, कि जनजाति के भीतर जीवन बदलना शुरू हो गया है।

उन्होंने खुलासा किया, कि ज्यादातर युवा पुरुष, अब शहर जाने लगे हैं, उनके कपड़े बदलने शुरू हो गये हैं, और अब उन्होंने शहरों में नौकरियां करनी शुरू कर दी है।

नये बच्चे कहते हैं, कि "जब ये बच्चे स्कूल जाते हैं, तो ज्यादातर बच्चों को शर्मिंदगी महसूस होती है। उन्हें लगता है, कि ज्यादातर बच्चे उनके बारे में बात कर रहे हैं, कि वे इतने सुंदर नहीं दिख रहे हैं।" यहां तक कि, गांव के मुखिया भी इस बात से सहमत हैं, कि हिम्बा के बच्चों को जीवन के दूसरे तरीके की तैयारी करनी चाहिए।

इस समुदाय के प्रमुखृ नोंगाबा ने कहा, कि "मैं चाहता हूं कि वे डॉक्टर, शिक्षक बनें, सरकारी नौकरी करें।"

उन्होंने कहा, कि "मैं चाहता हूं कि वे मुझसे अलग जीवन जिएं, मैं चाहता हूं कि वे आपके जैसे दिखें।

"दुनिया बदल गई है।"

हाल के वर्षों में दुनिया भर में कई जनजातियां पश्चिमीकरण की तरफ तेजी से बढ़ी हैं। लिहाजा, अब इस समुदाय के लोगों की जीवनशैली भी बदलने लगी है, उनके जीवन में भी बदलाव आने लगा है और वो उम्मीद जताते हैं, कि उनका जीवन भी आने वाले वक्त में पूरी तरह से बदल जाएगा।

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