Ali Khamenei Burial Delay: खामेनेई की आखिरी विदाई पर ब्रेक! किस वजह से टाला गया सुपुर्द-ए-खाक? अब कब होगा?

Ali Khamenei Burial Delay: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ज्वॉइंट एक्शन में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। जिसके करीब 131 दिनों के बाद उनको सुपुर्द-ए-खाक किया जाना था। यह प्रोग्राम 5 जुलाई से शुरू होकर अगले 5 दिनों में पूरा होना था। लेकिन अब खबर आ रही है कि उनके जनाजे को रोक दिया गया है और उनका सुपुर्द-ए-खाक किया जाना भी अगले आदेश तक के लिए टाल दिया गया है। क्या है इसकी वजह और कब होगा दोबारा जनाजा, जानेंगे इस खबर में।

इराक में क्या रही देरी की वजह?

दरअसल अली खामेनेई की 5 दिन चलने वाले जनाजे को गुरुवार को पूरा होना था। जिसके लिए उनको पड़ोसी देश इराक के शहर कर्बला और उसके बाद नजफ में उम्मीद से ज्यादा भीड़ पहुंच गई। इसकी वजह से पूरा प्रोग्राम दोबारा से बनाना पड़ा और पूरी तैयारी भी दोबारा करना पड़ी। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि रस्मों को पूरा होते तक काफी समय लग गया।

Ali Khamenei Burial Delayed

भीषण गर्मी और चढ़ते सूरज के बावजूद शिया समुदाय के लिए अपने नेता को आखिरी सलामी देने के लिए उनके नजदीकी शहर पहुंचे और मातम मनाया। हर किसी व्यक्ति में एक ही जुनून था कि कैसे भी कर के वह अली खामेनेई के ताबूत को छू ले। नतीजतन इसमें काफी समय खर्च हो गया। लिहाजा ईरान के प्रशासन ने दफनाने के समय को कुछ देर के लिए टाल दिया है।

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कैसे इराक पहुंचा खामेनेई का शव?

अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर पिछले मंगलवार को ही एक विशेष विमान से इराक लाया गया था। इस राजकीय यात्रा में उनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची भी मौजूद थे। नज़फ़ में इमाम अली की दरगाह पर नमाज-ए-जनाजा पूरी होने के बाद ही उनके शरीर को कर्बला के रास्ते ईरान वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

दोबारा शुरू हुई अमेरिका ईरान की जंग

इससे इतर, अमेरिका ने ईरान के साथ किया सीजफायर अब खत्म करने का ऐलान करने के साथ ईरान पर दोबारा बड़े हमले करना शुरू कर दिया है। जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कतर में मिसाइलें दागी हैं। मौजूदा हालात की बात करें तो अली खामेनेई के शव को जिस मशहद शहर में दफनाया जाना है वहां जाने वाले दोनों बड़े फ्लाईओवर को मिसाइल हमले से तोड़ दिया गया है। ऐसे में उन्हें दफनाने को लेकर भी संशय जारी है। अमेरिका और ईरान के हमले एक दूसरे के ठिकानों पर हर वक्त बढ़ रहे हैं। जिसका असर अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी दिखने लगा है।

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