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भारत की मदद का एहसान चुकाएगा यह देश, चीन को हिन्द महासागर से भगाने हाथ में देगा ब्रह्नास्त्र

India-Sri Lanka News: पिछले साल जब श्रीलंका घनघोर आर्थिक संकट में घिरा हुआ था, उस वक्त भारत ने अपने पड़ोसी देश की दिल-खोलकर मदद की थी। अब श्रीलंका फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने लगा है और अब वो भारत का एहसान चुकाने जा रहा है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के विदेश मंत्री ने सोमवार को कहा है, कि श्रीलंका अगले सप्ताह नई दिल्ली में राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान ऊर्जा, बिजली और बंदरगाह परियोजनाओं पर चर्चा कर सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत अपने संकटग्रस्त पड़ोसी के साथ रुकी हुई योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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भारत-श्रीलंका में होंगे समझौते

पिछले साल श्रीलंका के लिए भारत का समर्थन काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि उसके पास डॉलर लगभग खत्म हो गए थे और वह वित्तीय संकट में फंस गया था, जिससे उसे ईंधन और दवा सहित आवश्यक आयात के लिए संघर्ष करना पड़ा।

भारत ने 2022 में जनवरी और जुलाई के बीच लगभग 4 अरब डॉलर की त्वरित सहायता श्रीलंका को प्रदान की थी, जिसमें क्रेडिट लाइन, मुद्रा-स्वैप व्यवस्था और स्थगित आयात भुगतान शामिल थे। इसके अलावा भारत ने, द्वीप देश के 2 करोड़ 20 लाख लोगों के लिए आवश्यक दवाओं से भरा एक युद्धपोत भी भेजा था।

वहीं अब, श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने संवाददाताओं से कहा, कि श्रीलंका अब दोनों देशों के बीच ग्रिड कनेक्टिविटी, बंदरगाह विकास और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो मुख्य रूप से द्वीप के उत्तरी हिस्से में स्थित है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे 21 जुलाई से दो दिनों के लिए भारत का दौरा करेंगे।

भारत के लिए ऊर्जा परियोजना और बंदरगाह ऐसे हथियार हैं, जिनके जरिए वो आने वाले सालों में चीन की नाक में नकेल कर सकता है। चीन, पहले ही श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर कब्जा जमाए हुआ है, लिहाजा अगर भारत को श्रीलंका में रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण बंदरगाह बनाने का मौका मिलता है, तो ये सोने पर सुहागा जैसा होगा।

श्रीलंका के पूर्वोत्तर तट पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्राकृतिक बंदरगाह का जिक्र करते हुए साबरी ने कहा, कि "त्रिंकोमाली ऊर्जा-हब विकास, बंदरगाह विकास, संभावित रिफाइनरी को लेकर मूल रूप से हम भारत के साथ चर्चा कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, कि "हम अब लगातार प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और यदि संभव हो तो उसे तेजी से ट्रैक करने के तरीके ढूंढ रहे हैं।"

आपको बता दें, कि दोनों देश त्रिंकोमाली बंदरगाह को एक प्रमुख बंदरगाह के रूप में विस्तारित और विकसित करना चाहते हैं।

क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी भारत और चीन लंबे समय से श्रीलंका में प्रभाव के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो रणनीतिक रूप से हिंद महासागर में स्थित है।

चीन को काउंटर करने का बड़ा हथियार

श्रीलंका के विदेश मंत्री सबरी ने कहा, कि चाइना हार्बर कॉर्प और सिनोपेक भी श्रीलंका में निवेश करने के इच्छुक हैं। दक्षिणी श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के पास 4 अरब डॉलर की रिफाइनरी के लिए सिनोपेक को पहले ही सूचीबद्ध किया जा चुका है।

लिहाजा, ये काम अगर भारत को मिलता है, तो भारत सीधे तौर पर हंबनटोटा बंदरगाह पर नजर रख सकता है, जहां से चीन भारत के खिलाफ भविष्य में सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे सकता है।

श्रीलंका पिछले साल मई मे डिफॉल्ट करने के बाद अपने कर्ज पर दोबारा बातचीत करने के लिए दोनों देशों के साथ बातचीत कर रहा है। साबरी ने कहा कि बातचीत अच्छी प्रगति कर रही है।

उन्होंने कहा, "सितंबर तक इन सभी चीजों को पूरा करने और आधिकारिक तौर पर दिवालियापन से बाहर आकर पुनर्भुगतान शुरू करने का विचार है।"

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