तालिबान लोगों की पहचान के लिए आज़मा रहा ये ख़ास तरीक़ा- ग्राउंड रिपोर्ट

अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान
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अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी प्रांत कंधार की राजधानी के मुख्य स्थान कंधार शहर से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल तक जाने वाली सड़क के आसपास का अधिकांश क्षेत्र अब तालिबान के नियंत्रण में है.

इस रास्ते पर पड़ने वाले बड़े शहरों में से केवल तीन या चार पर ही अफ़ग़ान सरकार का कंट्रोल है. कंधार के रहने वाले एक व्यक्ति दाऊद (बदला हुआ नाम) ने हाल ही में कंधार से काबुल तक सड़क मार्ग से यात्रा की और बीबीसी उर्दू को अपनी यात्रा का आँखों देखा हाल सुनाया.

कंधार शहर से निकलते ही तालिबान के सफेद झंडे दिखने शुरू हो जाते हैं. जगह-जगह सड़क के दोनों ओर तालिबान के लोग खड़े नज़र आते हैं.

कई जगहों पर अफ़ग़ान सेना से जंग के बाद ज़ब्त की गई गाड़ियां भी दिखाई देती हैं, जिन पर तीन रंगों वाले अफ़ग़ान झंडे के बजाय सफेद झंडा लहरा रहा है.

कंधार शहर से ज़ाबुल प्रांत की राजधानी कलात शहर तक, सड़क के आस-पास के सभी क्षेत्र तालिबान के नियंत्रण में दिखाई दिए और कंधार शहर से निकलने के बाद पहली बार, कलात शहर के अंदर अफ़ग़ान सेना नज़र आई.

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कलात के बाद काबुल तक, पूरे रास्ते में भी अफ़ग़ान सरकार का अधिकार केवल शहरों में ही था जबकि शहरों के बाहरी इलाक़े से लेकर दूरदराज़ के गाँवों तक सभी क्षेत्रों में तालिबान का प्रभुत्व नज़र आया.

रास्ते में, तालिबान लड़ाकों ने उन सभी चौकियों पर अपने झंडे लगाए हुए थे, जहाँ इससे पहले अफ़ग़ान सेना के चेक पोस्ट और क़िले होते थे.

तालिबान रास्ते में हर गाड़ी को नहीं रोकते और न ही सभी गाड़ियों की तलाशी लेते हैं, लेकिन जिनके बारे में तालिबान के जासूसी नेटवर्क ने उन्हें पहले से सूचित किया हो, उस गाड़ी को रोक कर उसमे मौजूद व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही थी.

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तालिबान का जासूसी नेटवर्क

दाऊद सहित उस रास्ते पर यात्रा करने वाले दो अन्य लोगों के अनुसार, तालिबान के जासूस कंधार और काबुल के ठिकानों सहित रास्ते में सभी बस स्टॉप और महत्वपूर्ण स्थानों पर पाए जाते हैं, जो इस रास्ते पर आने-जाने वाले सभी व्यक्तियों पर नज़र रखते हैं.

जहां भी वे किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं, जिस पर उन्हें किसी तरह का संदेह होता है, वे उसका पीछा करते हैं और वह व्यक्ति जिस गाड़ी में यात्रा करता है, जासूस, उस गाड़ी का नंबर और संदिग्ध के हुलिये की जानकारी फ़ोन के ज़रिए रास्ते में मौजूद अपने साथियों को दे देते हैं.

दाऊद ने बीबीसी को बताया कि यात्रा के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि तालिबान जिन लोगों को पूछताछ के लिए नीचे उतारते थे, उनमें ज़्यादातर लोग सरकारी कर्मचारियों, अफ़ग़ान सेना या पुलिस विभाग से संबंध रखने वाले, या उन लोगों की होती थी, जिन पर तालिबान विरोधी होने का संदेह हो.

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स्मार्टफ़ोन के बिना यात्रा

कंधार से क़ाबुल या क़ाबुल से कंधार तक यात्रा करने के लिए इस रास्ते पर जाने वाले अधिकांश लोग अपने साथ कोई स्मार्टफ़ोन नहीं ले जाते हैं. दाऊद ने भी अपने स्मार्टफ़ोन को गाड़ी में अपने सामान में छिपा कर रखा और एक सामान्य फ़ोन सेट के साथ यह यात्रा शुरू की.

दाऊद का कहना है कि इस रास्ते पर लोग अपने साथ स्मार्टफ़ोन इसलिए नहीं ले जाते हैं क्योंकि अगर तालिबान ने पकड़ लिया तो वे फ़ोन का सारा डेटा चेक करते हैं और फ़ोन में मौजूद तस्वीरों पर भी पूछताछ करते हैं.

दाऊद अपने एक अन्य दोस्त का हवाला देते हुए बताते हैं कि तालिबान ने उनके एक दोस्त के मोबाइल फ़ोन में एक महिला की तस्वीर देखी, तो उनसे (उनके दोस्त से) पूछा कि यह महिला कौन है?

उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि वह उनकी पत्नी है, तो तालिबान ने न केवल उस व्यक्ति को थप्पड़ मारा, बल्कि उसका मोबाइल फ़ोन भी यह कहते हुए तोड़ दिया, कि "महिलाओं की तस्वीरें लेने से अश्लीलता और नग्नता फैलती है."

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दाऊद ने बताया कि अगर किसी यात्री के फ़ोन में किसी अफ़ग़ान सेना या अफ़ग़ान पुलिस अधिकारी की तस्वीर मिलती है, तो उसे उतार लिया जाता है और उस तस्वीर के बारे में उससे पूरी जानकारी ली जाती है.

तालिबान ऐसे लोगों पर अफ़ग़ान सेना या पुलिसकर्मी होने का संदेह करते हैं और अगर ऐसा होता है तो उनका वहीं से अपहरण कर लेते हैं. दाऊद ने बीबीसी को तालिबान के पूछताछ करने के अंदाज़ और अनोखे तरीक़ों के बारे में भी जानकारी दी.

अपने एक परिचित के बारे में वह बताते हैं कि उनके मोबाइल फ़ोन में कुछ अफ़ग़ान अधिकारियों की तस्वीरें मिली थी, जिसके बाद तालिबान ने उन्हें उतार लिया और उन्हें पास की एक चौकी पर ले गए.

बीबीसी के साथ साझा की गई इस घटना में, उन्होंने बताया कि तालिबान ने उस व्यक्ति के मोबाइल फ़ोन में डायल लिस्ट में मौजूद एक नंबर पर फ़ोन किया. कॉल रिसीव होने पर, तालिबान ने अपना परिचय एक अफ़ग़ान पुलिस अधिकारी के रूप में दिया और कहा कि वह जिस व्यक्ति के नंबर से कॉल कर रहे हैं, उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है, इसलिए उन्हें इनके बारे में जानकारी दें ताकि उनकी मदद की जा सके.

जवाब में फ़ोन करने वाले ने जो जानकारी दी उससे यह साबित हुआ कि तालिबान ने जिस व्यक्ति को पकड़ा है उसका पुलिस या सेना से कोई संबंध नहीं था. हालांकि, तालिबान ने उसे रिहा करने से पहले उसका फ़ोन पूरी तरह से तोड़ दिया.

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विशेष कंपनी का सिम कार्ड मिलने पर 'चबा कर खाना पड़ेगा'

दाऊद ने बीबीसी को बताया कि काबुल और कंधार के बीच इस रास्ते पर यात्रा करते समय बहुत से लोग स्मार्टफ़ोन न ले जाने के साथ-साथ एक अफ़ग़ान टेलिकॉम कंपनी का सिम कार्ड भी साथ नहीं ले जाते हैं.

क्योंकि किसी भी व्यक्ति के पास जब ये विशेष सिम कार्ड मिलता है, तो तालिबान उन्हें ज़बरदस्ती उस सिम कार्ड को चबा का खाने पर मजबूर कर देते हैं. अफ़ग़ानिस्तान की सरकारी टेलिकॉम कंपनी 'सलाम' लंबे समय से तालिबान की हिट लिस्ट में है.

पूर्व में तालिबान ने देश के कई प्रांतों में काम करने वाली मोबाइल कंपनियों को रात में सिग्नल बंद करने की धमकी दी थी, जिसके बाद उनमें से कई कंपनियों ने इस मांग को स्वीकार कर लिया था.

लेकिन चूंकि सलाम टेलिकॉम एक सरकारी कंपनी थी, इसलिए उन्होंने कभी भी तालिबान की बात नहीं मानी और कहा जाता है कि इसी वजह से तालिबान आज तक इस मोबाइल कंपनी के ख़िलाफ़ है.

तालिबान कई इलाक़ों में रात में मोबाइल सिग्नल बंद करने का दबाव इसलिए डालते थे, क्योंकि उनके मुताबिक़ रात में ही मोबाइल फ़ोन के ज़रिये उनके लड़ाकों की जासूसी होती थी, जिसके बाद अफ़ग़ान सेना उनके ठिकानों पर हवाई या ज़मीनी हमले करते हैं.

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