South Korea: जनसंख्या रोककर अमीर बना दक्षिण कोरिया, अब यहां के लोग बच्चे क्यों नहीं पैदा कर पा रहे?
South Korea Population: वैसे तो बूढ़ी होती आबादी से दुनिया के कई देश जूझ रहे हैं, लेकिन दक्षिण कोरिया इस संकट में सबसे ज्यादा फंस गया है और अब एक्सपर्ट्स ने चेतावनी देनी शुरू कर दी है, कि अगर बच्चों का जन्मदर नहीं बढ़ाया गया, तो इस देश के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा।
पिछले 60 वर्षों में, दक्षिण कोरिया के मानव इतिहास में सबसे तेजी से प्रजनन क्षमता में गिरावट आई है। साल 1960 में दक्षिण कोरिया में एक महिला के प्रजनन वर्षों के दौरान बच्चे पैदा की क्षमता 6 बच्चों के करीब था, लेकिन अब इस आंकड़ों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।

दक्षिण कोरिया में रसातल में गया जन्मदर
ताजा आंकड़ों से पता चला है, कि दक्षिण कोरिया में साल 2022 में बच्चों का जन्म दर घटकर 0.78 पर पहुंच गया है, जो खतरे की घंटी जोर जोर से बजा रहा है। यानि, 1960 के दशक में दक्षिण कोरिया में एक महिला करीब 6 बच्चों को जन्म देने की क्षमता रखती थीं, जो अब 0.78 पर पहुंच गया है। यानि, एक महिला एक बच्चे को भी जन्म नहीं दे सकती है।
दक्षिण कोरिया दुनिया का एकमात्र देश है, जहां प्रति महिला एक बच्चे से कम की प्रजनन दर दर्ज की गई है, हालांकि यूक्रेन, चीन, स्पेन और जापान भी दक्षिण कोरिया की स्थिति के ही करीब पहुंच रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जन्मदर में आई जबरदस्त गिरावट का दक्षिण कोरिया की स्थिति पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ये देश के आर्थिक विकास को ध्वस्त कर सकता है और ये देखते ही देखते, बेहद कम आबादी वाला देश बन जाएगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी देश में बाहर से आने वाले लोगों को अगर छोड़ दिया जाए, तो एक देश को लगातार अपनी जनसंख्या में संतुलन बनाकर चलने के लिए जन्म दर 2.1 होना जरूरी है, लेकिन दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर 1984 से लगातार उस संख्या से नीचे रही है और 1984 में पहली बार दक्षिण कोरिया का जन्मदर 2.17 से घटकर 1.93 पर पहुंच गया था।
साल 1800 में अमेरिका की कुल प्रजनन दर 6.0 से ज्यादा थी और उसे 2.1 की सीमा पर पहुंचने में 170 सालों से ज्यादा का वक्त लगा। लेकिन दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर 6.0 से गिरकर 0.8 सिर्फ 60 सालों में ही हो गई, जो आश्चर्यजनक है।
जन्मदर घटने का त्वरित फायदा तो काफी तेजी से दिखता है और देश की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत होती दिखाई देती है। देश में प्रति व्यक्ति आय में काफी जदरदस्त इजाफा होता है और देश में हर तरफ खुशहाली दिखाई देती है, लेकिन धीरे धीरे समाज को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है, क्योंकि देश काफी तेजी से बूढ़ा होने लगता है और समाज में युवाओं की संख्या कम होने के साथ साथ देश में कामगारों की संख्या में भी भारी कमी आ जाती है और आखिरकार देश की अर्थव्यवस्था भी खतरे में आ जाती है।
और दक्षिण कोरिया में यही हुआ है। प्रजनन क्षमता में गिरावट ने दक्षिण कोरिया को एक बहुत गरीब देश से एक बहुत अमीर देश में बदलने में मदद की, लेकिन अब इसका विपरीत असर भी हो रहा है।
जनसंख्या कम करने के लिए कार्यक्रम
दक्षिण कोरिया की सरकार ने देश को अमीर बनाने के लि्ए 1960 के दशक में एक आर्थिक नियोजन कार्यक्रम और एक जनसंख्या और परिवार नियोजन कार्यक्रम अपनाया।
उस समय तक, दक्षिण कोरिया 1950 से 1953 के कोरियाई युद्ध के कारण अपनी अर्थव्यवस्था और समाज को नष्ट होते देख रहा था। वास्तव में 1950 के दशक के अंत तक, दक्षिण कोरिया दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बन चुका था। 1961 में, इसकी वार्षिक प्रति व्यक्ति आय केवल लगभग 82 डॉलर सलाना थी।
लेकिन, आर्थिक विकास में नाटकीय वृद्धि 1962 में शुरू हुई, जब दक्षिण कोरियाई सरकार ने पांच साल की आर्थिक विकास योजना पेश की। दक्षिण कोरिया की सरकार ने देश की प्रजनन दर को कम करने के लिए जनसंख्या नियोजन कार्यक्रम भी शुरू किया। इसमें 45% विवाहित जोड़ों को गर्भनिरोधक का उपयोग करने का लक्ष्य शामिल था और उस वक्त तक, बहुत कम कोरियाई लोग गर्भनिरोधक का उपयोग करते थे।
इससे देश की प्रजनन क्षमता में कमी आई और लोगों के मन में ये बात घर कर गई, कि कम बच्चे होने से अक्सर पारिवारिक जीवन स्तर में सुधार होगा, जैसा की अभी भारत में भी हो रहा है और धीरे धीरे ज्यादातर लोग एक ही बच्चे की तरफ बढ़ रहे हैं। परिणामस्वरूप, देश की आश्रित आबादी - युवा और बुजुर्ग - कामकाजी उम्र की आबादी की तुलना में छोटी हो गई।
हालांकि, इस दौरान दक्षिण कोरिया का विकास दर 10 प्रतिशत को पार कर गया और दक्षिण कोरिया अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर काफी मजबूत हो गया और दक्षिण कोरिया आज 35,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय के साथ दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है।

जनसंख्या घटने के खतरनाक परिणाम
दक्षिण कोरिया एक खुशहाल देश तो बन गया, लेकिन जनसंख्या कम होने का खामियाजा भुगतने का समय अब आ गया है। 0.78 की बेहद कम प्रजनन दर के साथ, दक्षिण कोरिया में हर साल जनसंख्या कम हो रही है और जन्म से ज्यादा मौतें हो रही हैं। एक समय का जीवंत देश, अब बहुत सारे बुजुर्ग लोगों और कम श्रमिकों वाला देश बनने की राह पर है।
कोरियाई सांख्यिकी कार्यालय ने हाल ही की अपनी रिपोर्ट में बताया है, कि देश में पिछले तीन वर्षों में जनसंख्या में भारी कमी आई है। दक्षिण कोरिया में साल 2020 में 32,611 लोगों की कमी आई, साल 2021 में 57,118 लोगों की और साल 2022 में 123,800 लोगों की कमी आई है। साल 2023 में ये आंकड़ा और ज्यादा बढ़ जाएगा।
दक्षिण कोरिया की मौजूदा जनसंख्या करीब 5 करोड़ 10 लाख है और अगर यही ट्रेंड चलता रहा, तो अगले 50 सालों में दक्षिण कोरिया की जनसंख्या 3 करोड़ से कम हो जाएगी और इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों का होगा, जिनकी आयु 65 साल से ज्यादा की होगी। दक्षिण कोरिया की 65 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या साल 2000 में जनसंख्या का 7% के करीब थी, जबकि आज, लगभग 17% दक्षिण कोरियाई वृद्ध लोग हैं।
दक्षिण अफ्रीका के पास अब विकल्प क्या हैं?
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि दक्षिण कोरिया के मूल निवासी अब देश की जनसंख्या बढ़ाने के काबिल ही नहीं रहे और दक्षिण कोरिया की आबादी अब तभी बढ़ेगी, जब सरकार दूसरे देशों के लोगों को अपने देश में बसाए।
दूसरे देशों से आने वाले प्रवासी आम तौर पर युवा होते हैं और उनमें बच्चे पैदा करने की क्षमता ज्यादा होती है। और आमतौर पर उनके मूल-निवासी आबादी की तुलना में ज्यादा बच्चे होते हैं। लेकिन, दक्षिण कोरिया में बसने के नियम अत्यधिक सख्त हैं।
दक्षिण कोरिया की नागरिकता लेने का सिर्फ एक उपाय है, और वो है दक्षिण कोरिया के किसी नागरिक से शादी करना। दक्षिण कोरिया, प्रवासियों को नागरिकता किसी भी हाल में नहीं देता है। इसके विपरीत, अमेरिका ने हमेशा अपनी कामकाजी आबादी को बढ़ाने के लिए आप्रवासन पर भरोसा किया है, जहां अब विदेशी मूल के निवासियों की संख्या 14% से अधिक है। लेकिन, दक्षिण कोरिया की घटती प्रजनन दर की भरपाई के लिए आप्रवासन के लिए, विदेशी श्रमिकों की संख्या लगभग दस गुना बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
और अगर दक्षिण कोरिया ऐसा नहीं करता है, तो ये एक बूढे लोगों का देश बन जाएगा, जो अमीर तो होगा, लेकिन जिनके पास करने के लिए कुछ नहीं होगा।












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