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धरती से कल टकराएगा सूरज से निकला 'सांप के आकार' का तूफान, अमेरिका में असर दिखना शुरू

19 जुलाई यानि आज नासा ने इस सौर तूफान को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा कि, सौर तूफान का भड़कना पृथ्वी के भू-चुंबकीय क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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वॉशिंगटन, जुलाई 19: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चेतावनी देते हुए कहा है कि, सूरज से निकला खतरनाक सौर तूफान कल धरती से टकरा सकता है और इसकी वजह से पृथ्वी के भू-चुंबकीय क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, रिपोर्ट ये भी है कि, इस हफ्ते हमारी धरती के चारों तरफ एक सौर तूफान भी जन्म ले रहा है, जिसकी वजह से कई सैटेलाइट पर गहरा असर पड़ सकता है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों का कहना है कि, पृथ्वी को जो सौर तूफान घेर रहा है, वो कुछ दिनों पहले सूरज सा निकला ये तूफान सांप के आकार का रेडिएशन लहर है और ये हमारी पृथ्वी तक पहुंच चुकी है।

कल धरती से टकराएगा सौर तूफान

कल धरती से टकराएगा सौर तूफान

अंतरिक्ष मौसम शोधकर्ता डॉ तमिथा स्कोव की हालिया भविष्यवाणी के अनुसार, सूरज से निकला विशालकाय सौर तूफान 20 जुलाई को हमारी पृथ्वी से टकरा सकता है और दुनियाभर के सौन वैज्ञानिक लगातार इस सौर तूफान पर नजर रख रहे हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि, पृथ्वी पर जैसे ही ये सौर तूफान टकराएगा, एक जोरदार सोलर फ्लेयर का निकास हो सकता है। वहीं, रिपोर्ट है कि, सौर तूफान की वजह से 15 जुलाई को अमेरिका में कई जगहों पर रेडियो सिग्नल्स प्रभावित हुए थे।

सौर डिस्क पर बनेगा सनस्पॉट

सौर डिस्क पर बनेगा सनस्पॉट

पूरे सप्ताह पृथ्वी के सामने वाले सौर डिस्क पर नए सनस्पॉट दिखाई देने की उम्मीद है, और राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने भविष्यवाणी की है, कि सौर तूफान का पृथ्वी से टकराना करीब करीब तय है। वहीं, सौर तूफान के टकराने के बाद जो सनस्पॉट बनेगा, वो एक्स क्लास का होगा और उसका अधिकतम प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि ये काफी शक्तिशाली सौर फ्लेयर्स को उत्पन्न करेगा, जिसकी वजह से जीपीएस को नुकसान पहुंच सकता है और रेडियो ब्लैकऑउट हो सकता है, वहीं, इसकी वजह से इंटरनेट और सेल नेटवर्क भी प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई को शक्तिशाली सोलर फ्लेयर की वजह से सोलर रेडिएशन पैदा हुआ था, जिसने जीपीएस को बंद कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी सूरज से निकला ये सौर विकिरण पृथ्वी के चारों ओर जमा है और घेरा बना रहा है। पहले कई वैज्ञानिकों का मानना था, कि ये सौर तूफान थम चुका है, लेकिन अब ऐसा पता चल रहा है, कि कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई), जो सौर ज्वाला से निकला था, वह पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है और हमसे टकराएगा।

नासा ने जारी की है चेतावनी

नासा ने जारी की है चेतावनी

19 जुलाई यानि आज नासा ने इस सौर तूफान को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा कि, सौर तूफान का भड़कना पृथ्वी के भू-चुंबकीय क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। नासा ने जनता को 19 जुलाई की शाम को महत्वपूर्ण रेडियो और जीपीएस सिग्नल व्यवधानों की आशंका के लिए भी चेतावनी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तूफान का लेवल केपी-4 यानि जियोमैग्नेटिक एक्टिविटि केपी-4 लेवल पर मापा गया है, लेकिन माना जा रहा है, कि ये तूफान केपी-5 तक पहुंच सकता है और उस वक्त इसे जी-1 लेवल का सौर तूफान कहा जाएगा। आपको बता दें कि, पृथ्वी के वातावरण में भू-चुंबकीय गतिविधियों को मापने के लिए केपी का इस्तेमाल किया जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि, भू-चुंबकीय तूफान की तीव्रता को एक से पांच तक बढ़ाया जा सकता है, जिसमें से एक छोटे तूफान को दर्शाता है और पांच एक चरम को दर्शाता है। इसका तात्पर्य यह है कि एक मजबूत चमक कई क्षेत्रों में रेडियो और संचार को बाधित कर सकती है।

सैटेलाइट पर होगा असर

सैटेलाइट पर होगा असर

अमेरिकी एजेंसी एनओएए ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि, इस तेज रफ्तार सौर तूफान की वजह से कई सैटेलाइट भी खराब हो सकते हैं और कई तरह की गलत जानकारियां दे सकते हैं। जिसका मतलब ये हुआ कि, उन सैटेलाइट्स पर फिर से नियंत्रण हासिल करना होगा और उन्हें ठीक करना होगा। आपको बता दें कि, सौर तूफान को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निंया की वैज्ञानिक संगीता अब्दू ज्योति ने पिछले दिनों बताया था कि, आने वाल भविष्य में धरती को बड़े सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। सौर तूफान का मतलब सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास है, जो बेहद नुकसानदायक और प्रयलकारी साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस सौर तूफान के कारण धरती पर इंटरनेट सर्विस ठप हो सकती है और कई दिनों तक बंद रह सकती है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

क्या कहता है वैज्ञानिकों का रिसर्च

क्या कहता है वैज्ञानिकों का रिसर्च

संगीता ने अपनी रिसर्च में कहा है कि सौर तूफान के कारण स्थानीय इंटरनट प्रणाली पर कम असर होगा, लेकिन दुनियाभर के समुद्रों में फैली इंटरनेट केबल पर इसका असर पड़ सकता है। शोध के मुताबिक इंटरनेट के फाइबर ऑप्टिक्स पर सौर तूफान के दौरान निकली जियोमैग्नेटिक करंट का सीधा असर नहीं होगा, लेकिन दुनिया के देशों को जोड़ने वाली समुद्री इंटरनेट केबल इससे प्रभावित होगी और जिन देशों ने इन केबल को अपने ऑप्टिक्स से जोड़ा है, वहां कई दिनों तक इंटरनेट सेवा बाधित रह सकती है।

सौर तूफान पर जानकारी कम

सौर तूफान पर जानकारी कम

शोधकर्ता के मुताबिक सौर तूफान को लेकर हमारी जानकारी कम है और हमारे पास इससे संबंधित डेटा की कमी है, जिसक कारण इसका नुकसान अधिक हो सकता है। शोध के मुताबिक सौर तूफान पावर ग्रिड्स को नुकसान पहुंचाता है। धरती पर आने वाले सौर तूफान की आशंका को देखते हुए दुनिया के कई देशों में ब्लैकआउट का खतरा मंडराने लगा है। दुनिया के कई देश अंधेरे में डूब सकते हैं। इंटरनेट सर्विस को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर नविगेशन, सैटलाइट्स पर पड़ सकता है।

टेलीकॉम सेक्टर्स पर भी असर

टेलीकॉम सेक्टर्स पर भी असर

उन्होंने कहा कि, अगर तेज सौर तूफान उठता है, तो टेलीकॉम सेक्टर ठप हो सकता है, डिफेंस सेक्टर, आईटी, बैंकिंग सर्विसेस बंद हो सकती है। शोध के मुताबिक, सौर तूफान को लेकर कम जानकारी के कारण इसका असर कितना भयानक हो सकता है, इसकी पूरी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। संगीता के मुताबिक दुनिया इस सौर तूफान के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है, जिसके कारण इसका असर और प्रलयकारी हो सकता है। हम इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं कि, अगर इंटरनेट सेवा ठप हुई तो क्या असर होने वाला है। इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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English summary
Dangerous solar storm emanating from the sun will hit the earth tomorrow, which is likely to have a wide impact.
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