Solar flare के चलते इन दो महाद्वीपों में रेडियो ब्लैकआउट, अगले हफ्ते सूर्य को लेकर बड़ी भविष्यवाणी
वाशिंगटन, 18 अप्रैल: इस साल सूर्य अपने सौर चक्र में कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो चुका है। साल का चौथा ही महीना बीत रहा है और उसकी सतह पर हुए विस्फोट की वजह से धरती कई बार भू-चुंबकीय तूफान की गवाह बन चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिलसिला अगले हफ्ते भी जारी रहेगा। लेकिन,उससे पहले एक सोलर फ्लेयर की वजह से दो महादेशों के कुछ हिस्सों को रेडियो ब्लैकआउट जैसे वैज्ञानिक संकट से जूझना पड़ा है। ये दोनों महादेश हैं- एशिया और ऑस्ट्रेलिया। यहां के कई इलाकों में यह समस्या पैदा हुई है।

दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में रेडियो ब्लैकआउट
एक भू-चुंबकीय तूफान के धरती से टकराने के कुछ दिनों बाद सौर गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ने लगी हैं और इस हफ्ते और भी ज्यादा सोलर फ्लेयर्स पैदा होने की संभावना जताई जा रही है। रविवार को सूर्य की सतह से एक ओर सोलर फ्लेयर भड़का है, जिसके चलते दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में बहुत ही सख्त शॉर्टवेव रेडियो ब्लैकआउट की समस्या पैदा हो गई। सूर्य के सक्रिय सतह पर एक्स 1 क्लास की धधक के साथ एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) की स्थिति बनी, जिसने सूरज के पूर्वी छोर पर दिखने से पहले महत्वपूर्ण तरह की जगमगाहट पैदा की थी। सूर्य पर यह फ्लेयर उसके 2994 और 2993 क्षेत्रों से शुरू हुआ और इसके चलते थोड़ी देर के लिए रेडियो ब्लैकआउट की समस्या आई, जिसे टाइप-2 सोलर रेडियो बर्स्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया।

अगले हफ्ते भी जारी रहेगी सौर गतिविधि-एनओएए
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अधीन आने वाली एजेंसी की ओर से अपडेट में कहा गया है, 'यह सौर गतिविधि अगले हफ्ते तक सक्रिय रहने की संभावना है, क्योंकि ये सनस्पॉट पूरे विजिबल डिस्क में स्थांतरित होते हैं।' स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर की ओर से यह ताजा पूर्वानुमान सूर्य पर विस्फोट होने के बाद आता है, जो सूरज से निकली धधकती ऊर्जा को पृथ्वी समेत आंतरिक ग्रहों की ओर तेजी से धकेलता है। सौर मंडल का प्रमुख और सबसे गर्म सितारा पहले भी फट चुका है और पृथ्वी की ओर अपनी असीम ऊर्जा धकेल चुका है, जिसके चलते पिछले हफ्ते भी भू-चुंबकीय तूफान पैदा हुआ था।

एक और सीएमई के धरती की ओर बढ़ने की संभावना
स्पेसवेदर डॉट कॉम के मुताबिक सनस्पॉट कॉम्पलेक्स एआर2993-94 ने कहा है कि 17 अप्रैल को एक्स1-क्लास का जो सोलर फ्लेयर पैदा हुआ, वह एक शुरुआत भर हो सकता है। इसके ठीक पीछे ही एक और संभावित रूप से और भी बड़ा सक्रिय क्षेत्र है। यह सनस्पॉट रविवार को दिखाई पड़ा है और नासा का सोलर डिनामिक्स ऑब्जर्वेटरी इसकी प्रगति को ट्रैक कर रहा है। अंतरिक्ष पर नजर रखने वाली एजेंसी ने कहा है, 'यह सनस्पॉट ग्रुप एक हफ्ते से ज्यादा वक्त से सक्रिय है, जो बहुत ही तेजी से सीएमई और प्लाजमा को अपने स्थान से सूर्य से दूर वाले किनारे की ओर धकेल रहा है। अब यह धरती की ओर मुड़ रहा है और इसके धीमा होने के कोई भी संकेत नहीं दिख रहे हैं।'

सोलर फ्लेयर कैसे पैदा होती है ?
सूरज की सतह पर सोलर फ्लेयर की स्थिति तब पैदा होती है, जब वहां अचानक,तेजी से और बहुत शक्तिशाली विस्फोट होता है। यह तब होता है, जब सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा इकट्ठा हो जाती है और अचानक उससे निकल जाती है। इस विस्फोट की वजह से पूरे ब्रह्मांड में हर तरफ रेडिएशन पैदा होने लगता है, जो सौर मंडल के विभिन्न ग्रहों की ओर धकेल दिया जाता है। इस रेडिएशन में रेडियो वेव, एक्स-रे और गामा रे शामिल होती हैं।

सोलर फ्लेयर तीन चरणों में होती है
सोलर फ्लेयर के तीन चरण हैं। पहले चरण में सॉफ्ट एक्स-रे उत्सर्जन के साथ चुंबकीय ऊर्जा निकलनी शुरू हो जाती है। दूसरे चरण में प्रोटोन और इलेक्ट्रोन 10 लाख इलेक्ट्रोन वोल्ट के बराबर ऊर्जा में ऐक्सलरेट होता है। तीसरे चरण में एक्स-रे का धीरे-धीरे निर्माण और फिर उसका समाप्त होना शामिल है। सूर्य इस समय 11वें सौर चक्र में है, जिसे कि उसकी सतह पर सबसे ज्यादा सक्रियता के लिए जाना जाता है। (तस्वीरें-प्रतीकात्मक)












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