भारत खरीदता है दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार, तीसरे नंबर पर पहुंचा यूक्रेन, अमेरिका बना हुआ है आर्म्स लीडर
चीन सबसे ज्यादा हथियार पाकिस्तान को बेचता है, जबकि भारत ने हथियारों को लेकर रूस पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है। 2018 से 2022 के बीच भारत ने रूसी हथियारों की खरीददारी 19 प्रतिशत कम कर दी है।

SIPRI Report on Arms Sales: रूसी आक्रमण के बाद यूक्रेन समेत तमाम यूरोपीय देशों ने काफी तेजी के साथ हथियारों की खरीददारी शुरू कर दी है और SIPRI, जो पूरी दुनिया में होने वाले आर्म्स डील पर नजर रखता है, उसने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, कि पिछले साल मॉस्को के आक्रमण के बाद यूक्रेन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बनकर उभरा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने सोमवार को अपनी नई रिपोर्ट में कहा है, कि यूरोपीय राज्यों ने वैश्विक रुझानों को तोड़ दिया और 2018 और 2022 के बीच पांच साल की अवधि में प्रमुख हथियारों के आयात में 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
यूरोपीय देशों में हथियारों का आयात बढ़ा
यूरोपीय देशों में नाटो गठबंधन में शामिल देशों में भी हथियार खरीदने को लेकर प्रतियोगिता देखी जा रही है और यूरोपीय नाटो देशों में प्रमुख हथियारों के आयात में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, हथियारों के हस्तांतरण के वैश्विक स्तर में 5.1 प्रतिशत की कमी आई है। SIPRI आर्म्स ट्रांसफर प्रोग्राम के वरिष्ठ शोधकर्ता पीटर डी वीज़मैन ने कहा, कि "भले ही वैश्विक स्तर पर हथियारों के ट्रांसफर में गिरावट आई है, लेकिन रूस और अधिकांश अन्य यूरोपीय देशों के बीच तनाव के कारण यूरोप में तेजी से हथियारों की बिक्री हुई है।" उन्होंने कहा, कि "यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद, यूरोपीय राज्य और अधिक हथियार आयात करना चाहते हैं।" SIPRI आर्म्स ट्रांसफर प्रोग्राम के वरिष्ठ शोधकर्ता पीटर डी वीज़मैन ने कहा, कि "भले ही वैश्विक स्तर पर हथियारों के हस्तांतरण में गिरावट आई है, रूस और अधिकांश अन्य यूरोपीय राज्यों के बीच तनाव के कारण यूरोप में तेजी से वृद्धि हुई है।" उन्होंने कहा, कि "यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद, यूरोपीय राज्य और अधिक हथियार आयात करना चाहते हैं।"

हथियार बाजार में अमेरिका की बल्ले-बल्ले
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया पिछले पांच सालों में यूरोप में नाटो राज्यों के सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता हैं, जबकि अमेरिका, पोलैंड, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ने पिछले साल यूक्रेन को सबसे अधिक हथियारों की आपूर्ति की है। हालांकि, यूक्रेन को जो हथियार बेचे गये हैं, उनमें से ज्यादातर हथियार नये नहीं, बल्कि स्टॉक किए गये हथियार शामिल हैं। SIPRI ने कहा, यूक्रेन को अमेरिका से 228 तोपें, अनुमानित 5,000 गाइडेड आर्टिलरी रॉकेट, पोलैंड से 280 टैंक और यूके से 7,000 से ज्यादा एंटी-टैंक मिसाइलें मिली हैं। हालांकि, यूक्रेन को इतना हथियार बेचने के बाद भी यह उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जो हथियार अमेरिका ने पिछले चार सालों में कुवैत, सऊदी अरब, कतर और जापान को बेचे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यूक्रेन को अमेरिकी आपूर्ति में अपेक्षाकृत कम एडवांस और मुख्य रूप से पुराने सैन्य उपकरण भेजे गये हैं, जबकि बाकी चारों देशों को एडवांस नए हथियार, लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली बेचे गये हैं।
युद्ध से अमेरिका को होता है फायदा
दुनिया के किसी भी कोने में अगर युद्ध की आग भड़कती है, तो उसका सबसे ज्यादा फायदा अमेरिका को ही होता है और अमेरिका अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार का बाजार बना हुआ है। सिप्री के मुताबिक, हथियारों की बिक्री में अमेरिका ही हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है। वहीं, अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश रूस की हिस्सेदारी अब 22 प्रतिशत से गिरकर सिर्फ 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है। SIPRI के आर्म्स ट्रांसफर प्रोग्राम के वरिष्ठ शोधकर्ता सीमन टी वेजेमैन ने कहा, कि "इस बात की संभावना है, कि यूक्रेन पर आक्रमण, रूस के हथियारों के निर्यात को और सीमित कर देगा।" उन्होंने कहा, कि "ऐसा इसलिए है, क्योंकि रूस अपने सशस्त्र बलों की आपूर्ति को प्राथमिकता देगा और रूस पर इतने ज्यादा प्रतिबंध लगाए गये हैं, कि ज्यादातर देश रूसी हथियार खरीदने की कोशिश नहीं करेंगे। वहीं, रूसी हथियार खरीदने पर अमेरिका और यूरोप की नाराजगी झेलने का दबाव अलग से है।"
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हथियार बिक्री में रूस को बड़ा झटका
SIPRI के मुताबिक, मिस्र, जो रूस के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है, उसने 2022 में लड़ाकू विमानों के लिए एक बड़ा ऑर्डर रद्द कर दिया और इसके पीछे अमेरिकी दबाव को वजह माना जा रहा है। वहीं, भारत ने भी रूसी हथियारों की खरीददारी कम कर दी है और भारत के लिए नये हथियार बाजार, फ्रांस और इजरायल बन रहे हैं। वहीं, रूसी हथियारों में आई गिरावट के बीच, फ्रांस, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। एशिया प्रशांत और मध्य पूर्व में राज्यों को निर्यात के कारण 2018 और 2022 के बीच की अवधि में फ्रांस की हथियार बेचने में हिस्सेदारी 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई है। SIPRI ने कहा है, कि फ्रांस की हथियार बेचने में हिस्सेदारी अभी और बढ़ने वाली है, क्योंकि 2022 के अंत तक फ्रांस के पास रूस की तुलना में हथियारों के निर्यात के लिए कहीं ज्यादा ऑर्डर थे।
किन देशों ने बढ़ाई हथियारों की खरीददारी
यूरोप के साथ साथ, पूर्वी एशिया, जहां जियो-पॉलिटिक्स में काफी तनाव देखा जा रहा है, वहां भी हथियारों की खरीददारी में भारी इजाफा देखा गया है। अमेरिका के दो बड़े सहयोगियों, जापान और दक्षिण कोरिया ने हथियारों की खरीददारी में विशालकाय इजाफा किया है। दक्षिण कोरिया ने हथियार खरीदने में 61 प्रतिशत का इजाफा किया है, जो जापान ने 171 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने आयात में 23 प्रतिशत की वृद्धि की है। SIPRI ने जापान और दक्षिण कोरिया के भारी संख्या में हथियार खरीदने के पीछे की सबसे बड़ी वजह चीन और उत्तर कोरिया को बताया है। SIPRI ने कहा, कि जापान और दक्षिण कोरिया, उन्नत लड़ाकू विमान और लंबे वक्त तक हमला करने वाले मिसाइलों को खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन के आयात में भी 4.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिसमें ज्यादातर ट्रांसफर रूस से हुआ है।
सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश है भारत
वहीं, SIPRI की रिपोर्ट में दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले देशों की लिस्ट में भारत शीर्ष पर बरकरार है। SIPRI ने कहा है, कि दुनिया में कुल हथियारों के आयात में भारत की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है और साल 2018 से 2022 के बीच भारत ने सबसे ज्यादा हथियार खरीदे हैं। इससे पहले भारत, साल 1993 से ही दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बना हुआ है। हालांक, अब भारत सरकार ने हथियारों के आयात के जगह आत्मनिर्भर भारत के तरफ ध्यान दिया है और कई हथियारों का निर्माण अब भारत में ही किया जाने लगा है। वहीं, साल 2018 से 2022 के बीच भारत ने रूस से हथियार खरीदने में काफी कमी कर दी है और इन चार सालों में भारत का रूस से हथियार आयात 64 प्रतिशत से गिरकर 45 प्रतिशत तक आ गया है और आने वाले वक्त में इसमें और कमी आने की संभावना है।
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