Lahore Places Renamed: पाकिस्तान में सनातन युग की वापसी! बाबरी चौक बना 'जैन मंदिर', इस्लामपुरा हुआ 'कृष्णनगर'

Lahore Places Renamed: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर इन दिनों अपनी ऐतिहासिक जड़ों की ओर लौट रही है। दशकों तक चले कट्टर इस्लामीकरण के दौर के बाद, ऐतिहासिक पहचान को संजोने के लिए शहर की 9 प्रमुख जगहों के नाम बदलकर उनके मूल हिंदू, जैन और ब्रिटिश विरासत वाले पुराने नामों पर बहाल कर दिए गए हैं।

जिसने लाहौर नहीं देखा, उसका जन्म ही नहीं हुआ' की कहावत को चरितार्थ करने वाला यह ऐतिहासिक शहर अब राजनीतिक तुष्टिकरण के फैसलों को पलटकर अपनी पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब और मूल पहचान को वापस पा रहा है।

Lahore Places Renamed

इस्लामपुरा बना कृष्णनगर, बाबरी चौक अब जैन मंदिर चौक

लाहौर में बदलाव के इस पहले चरण में 9 प्रमुख स्थानों पर आधिकारिक रूप से पुराने नामों के बोर्ड लगा दिए गए हैं। इसके तहत अब प्रसिद्ध 'इस्लामपुरा' इलाके को उसके मूल नाम 'कृष्णनगर' के रूप में जाना जाएगा। वहीं, 1990 के दशक में राजनीतिक कारणों से बदला गया 'बाबरी मस्जिद चौक' अब फिर से अपने वास्तविक नाम 'जैन मंदिर चौक' के रूप में पहचाना जाएगा।

लक्ष्मी चौक और आम जनता की पीढ़ियों पुरानी यादें

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कागजों में भले ही लक्ष्मी चौक का नाम बदलकर 'मौलाना जफर अली चौक' कर दिया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के दिलों से लक्ष्मी चौक का नाम कभी नहीं मिटा। स्थानीय बुद्धिजीवियों और बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का मानना है कि पीढ़ियों से चला आ रहा यह नाम उनकी साझी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे किसी भी राजनीतिक या मजहबी फैसले से अलग नहीं किया जा सकता।

सूफी और स्थानीय मौलानाओं का बड़ा यू-टर्न

इस बदलाव पर लाहौर के स्थानीय धार्मिक गुरुओं और सूफी विचारकों का रुख भी काफी सकारात्मक रहा है। अनारकली इलाके के मौलानाओं का स्पष्ट मानना है कि इस्लाम को किसी मंदिर, गुरुद्वारे या ऐतिहासिक हिंदू नाम से कोई खतरा नहीं है। 90 के दशक में नामों को बदलना महज एक सियासी फैसला था। जिन पूर्वजों ने ये पुराने नाम रखे थे, वे भी इसी मिट्टी के थे और इससे किसी के ईमान पर कोई आंच नहीं आती।

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कट्टरपंथियों की खामोशी और मरियम सरकार का एक्शन

पंजाब सूबे की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बुलाई उच्च स्तरीय बैठक में 'लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल' प्रोजेक्ट के तहत यह कड़ा फैसला लिया गया। खास बात यह है कि इस बदलाव के खिलाफ वहां का कोई भी कट्टरपंथी संगठन मोर्चा नहीं खोल पाया। दरअसल, सड़कों पर उत्पात मचाने के लिए कुख्यात 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान' (TLP) पर मरियम सरकार ने पहले से ही कड़ा बैन लगा रखा है।

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परकोटा शहर के दरवाजों का जीर्णोद्धार और अगला चरण

लाहौर के पुराने ऐतिहासिक परकोटा शहर (Walled City) की पहचान उसके ऐतिहासिक दरवाजों से है। मुख्यमंत्री मरियम नवाज के निर्देशानुसार अब 'दिल्ली गेट' समेत लाहौर के सभी आठों ऐतिहासिक दरवाजों का जीर्णोद्धार कर उनका पुराना वैभव लौटाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, लाहौर की इस सफल मुहिम के बाद दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी ऐतिहासिक हिंदू और मूल नामों को दोबारा बहाल करने का ऐलान किया जा सकता है।

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