SIPRI Report: भारत से चार गुना ज्यादा चीन ने किया सैन्य खर्च, 23 लाख करोड़ बहाकर ड्रैगन ने क्या किया?

दुनिया में होने वाले सैन्य खर्च ने अभी तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। प्रमुख मिलिट्री थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में विश्व सैन्य खर्च 2.24 ट्रिलियन डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

SIPRI Report

SIPRI World Military Spending Report: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के मुताबिक, कुल वैश्विक सैन्य खर्च 2022 में 2240 अरब डॉलर के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो वास्तविक रूप से 2021 के मुकाबले, 3.7 प्रतिशत ज्यादा है।

सिप्री की रिपोर्ट में कहा गया है, कि यूक्रेन में रूस के आक्रमण के बाद से दुनिया के देश खुद को असुरक्षित करने लगे हैं, वहीं चीन के डर की वजह से जापान और ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैन्य खर्च में भारी इजाफा करना शुरू कर दिया है।

भारत के बजट से चार गुना ज्यादा

SIPRI की रिपोर्ट से पता चलता है, कि भारत के मुकाबले चीन का बजट करीब 4 गुना ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि साल 2022 में भारत का सैन्य खर्च 6 लाख करोड़ था, जबकि चीन का सैन्य खर्च 23 लाख करोड़ हो चुका है।

सैन्य एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन ने अभी हिन्द महासागर में कदम रखा ही है और अगर भारत, चीन को काउंटर करने के लिए तत्काल अपने प्लान को अमलीजाना पहनाना शुरू नहीं करता है, तो भविष्य में भारत के लिए काफी मुसीबतें खड़ी होंगी। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल चीन ताइवान में उलझा हुआ है और ताइवान ही चीन के लिए फिलहाल मुख्य मकसद बना हुआ है। लेकिन, जिस दिन चीन ने ताइवान विवाद को सुलझा लिया, वो उसके बाद सीधे तौर पर हिन्द महासागर में दाखिल होने की कोशिश करेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि 'इंडियन ओसियन मतलब भारत का समुद्र नहीं' बयान देकर सालों पहले ही चीन अपनी मंशा जता चुका है, कि वो हिन्द महासागर में निश्चित तौर पर आएगा। वहीं, ताजा रिपोर्ट्स बताते हैं, कि म्यांमार के कोको आइलैंड और श्रीलंका में सैन्य अड्डा बनाने के लिए जमीन मांगकर, चीन हिन्द महासागर में कदम फैलाना शुरू कर चुका है। लिहाजा अब भारत को वक्त बर्बाद किए बगैर, अपने समुद्र को सुरक्षित करने के लिए काम करना शुरू कर देना चाहिए।

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विशालकाय सैन्य खर्च का क्या है मकसद?

चीन ने पिछले साल भी कहा था, कि उसका मकसद साल 2035 तक विश्व की सबसे मजबूत सेना का निर्माण करना है और इसके लिए वो पानी की तरह पैसे बहा रहा है। पेंटागन की पिछले साल नवंबर महीने की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था, कि जिस रफ्तार से चीन परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है, उस हिसाब से साल 2035 तक चीन के पस 1500 परमाणु हथियार होंगे।

चीन अलग अलग क्षमता वाले परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है, जिसका इस्तेमाल वो अपनी जरूरत के हिसाब से कर सके। चीन के पास फिलहाल 400 परमाणु हथियार हैं। और चीन अपने भूमि, समुद्र और वायु आधारित परमाणु प्लेटफार्मों में निवेश करने के साथ साथ तेजी के साथ उनका विस्तार कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस पर नजर रखने वाले 'स्टेटिका' ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि, चीन ने अपनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दुनिया की सबसे विशालकाय आर्मी बना दी है। 2021 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, अब चीन के पास कुल मिलाकर 21 लाख 85 हजार सैनिक हैं, जो रजिस्टर्ड हैं।

चीन लगातार दावा करता आया है कि, विश्व की सबसे बड़ी आर्मी उसी के पास है और चीन ने अपनी सेना को पांच अलग अलग हिस्सों में बांट रखा है, जिनमें ग्राउंड फोर्स, एयरफोर्स, नेवी, रॉकेट फोर्स और स्ट्रैटिजिक सपोर्ट फोर्स शामिल हैं और इसके अलावा चीन ने अपनी सेना को पांच अलग अलग थियेटर कमांड में भी बांट रखा है।

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नौसेना-वायुसेना पर अरबों डॉलर खर्च

अपनी नौसेना की मारक क्षमता का विस्तार करने के लिए चीन लगातार युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त चीन के पास 62 पनडुब्बी मौजूद हैं, जिनमें से सात पनडुब्बी न्यूक्लियर पॉवर से संचालित हैं। हालांकि, चीन के पास सिर्फ 3 ही एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। लेकिन, 2030 तक चीन के पास 7 एयरक्राफ्ट कैरियर हो जाएंगे।

इसके साथ ही, पिछले साल प्रकाशित अमेरिकी रक्षा सचिव कार्यालय की एक वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2,500 से अधिक विमानों और लगभग 2,000 लड़ाकू विमानों के साथ वायु सेना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी और दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी हो गई है।

चीन की वायु सेना के पास अब स्टील्थ फाइटर जेट्स का एक बेड़ा है, जिसमें जे-20 जैसे चीन के सबसे उन्नत युद्धक विमान शामिल हैं। इसे स्वतंत्र रूप से विकसित किया गया था और इसे अमेरिका की एफ-22 को टक्कर देने के लिए चीनी सेना ने डिजाइन किया था। इसके अलावा, चीन एच-6एन विमान के लिए हवा में दागे जाने वाले उन्नत किस्म के हाइपरसोनिक मिसाइलों को निर्माण भी कर रहा है।

यानि, चीन दुनिया के लिए आदमखोर बनता जा रहा है, लिहाजा भारत को भी उस हिसाब से तैयारी करनी होगी।

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