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Shubhanshu Shukla Salary: स्पेस में इतिहास रचने वाले शुभांशु शुक्ला की कितनी है सैलरी? जानें क्या मिलेगा बोनस?

Shubhanshu Shukla Net Worth: लखनऊ के 39 वर्षीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूरा कर 15 जुलाई 2025 को प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की। एक्सिओम-4 मिशन के तहत भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में इतिहास रचने वाले शुभांशु ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि लाखों युवाओं को अंतरिक्ष अन्वेषण का सपना देखने के लिए प्रेरित किया।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसरो के अंतरिक्ष यात्री जैसे शुभांशु शुक्ला कितना कमाते हैं? आइए, उनकी सैलरी और वैश्विक अंतरिक्ष यात्रियों की तुलना में इसरो की सैलरी के बारे में जानते हैं...

Shubhanshu Shukla Net Worth

Shubhanshu Shukla Salary: शुभांशु शुक्ला की सैलरी: कोई अतिरिक्त बोनस नहीं

शुभांशु शुक्ला को एक्सिओम-4 मिशन के लिए कोई विशेष बोनस या अतिरिक्त भुगतान नहीं मिला। भारत सरकार ने इस मिशन के लिए 548 करोड़ रुपये (लगभग 65 मिलियन डॉलर) खर्च किए, जिसमें शुभांशु का प्रशिक्षण, यात्रा, प्रक्षेपण रसद, और शोध शामिल हैं। हालांकि, उनकी सैलरी भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन के वेतनमान के आधार पर ही तय होती है, क्योंकि वह इसरो या नासा के पेरोल पर नहीं हैं।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन के रूप में, शुभांशु की वार्षिक सैलरी 12 लाख से 20 लाख रुपये के बीच है, जो उनके अनुभव, प्रदर्शन, और मिशन की भूमिका पर निर्भर करती है। इसमें मूल वेतन के साथ-साथ डियरनेस अलाउंस (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे लाभ शामिल हैं। हालांकि, अंतरिक्ष मिशन के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाती। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी सैलरी 30-46 लाख रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है, जो फिर भी कई भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तुलना में कम है।

वैश्विक अंतरिक्ष यात्रियों की सैलरी: इसरो से तुलना

इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों का वेतन वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है। आइए, कुछ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों की सैलरी पर नजर डालें:-

  • नासा (NASA): नासा के अंतरिक्ष यात्री GS-12 से GS-13 ग्रेड में आते हैं, जिनका वार्षिक वेतन 65,140 डॉलर (लगभग 56 लाख रुपये) से 100,701 डॉलर (लगभग 86 लाख रुपये) तक होता है। अनुभवी अंतरिक्ष यात्री, जो पर्यवेक्षी भूमिकाओं में हैं, 104,898 डॉलर (90 लाख रुपये से अधिक) तक कमा सकते हैं।
  • यूके स्पेस एजेंसी (UKSA): प्रवेश स्तर के अंतरिक्ष यात्री को 40,000 पाउंड (लगभग 46 लाख रुपये) और अनुभवी अंतरिक्ष यात्री को 86,000 पाउंड (लगभग 99 लाख रुपये) का वेतन मिलता है।
  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA): ESA के अंतरिक्ष यात्री प्रति माह 6,301 यूरो (लगभग 6 लाख रुपये) से 9,035 यूरो (लगभग 9 लाख रुपये) तक कमाते हैं।
  • रूस और कनाडा: इन देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां भी भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की तुलना में अधिक वेतन देती हैं।

इसरो का वेतन भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम हो, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह मिशन सम्मान और देश की सेवा का प्रतीक है। शुभांशु जैसे अंतरिक्ष यात्री आर्थिक लाभ से ज्यादा देश के लिए गौरव और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने की भावना से प्रेरित होते हैं।

एक्सिओम-4 मिशन: भारत के लिए मील का पत्थर

शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए उड़ान भरी थी। 26 जून को वे ISS पहुंचे और 18 दिन तक 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें माइक्रोग्रैविटी में माइक्रोएल्गी की वृद्धि, मांसपेशियों के नुकसान, और अंतरिक्ष में मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन जैसे अध्ययन शामिल थे। यह मिशन भारत के गगनयान मिशन (2027) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा।

भारत ने शुभांशु की सीट और प्रशिक्षण के लिए 548 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसे कुछ लोगों ने महंगा बताया, लेकिन इसरो और नासा ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुभव के लिए जरूरी माना।

शुभांशु शुक्ला: एक प्रेरणा, मिसाल

लखनऊ में जन्मे शुभांशु ने 2005 में नेशनल डिफेंस एकेडमी से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की और 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए। 2,000 घंटे से अधिक के उड़ान अनुभव के साथ, उन्होंने Su-30 MKI, MiG-21, और Jaguar जैसे विमानों को उड़ाया है। 2019 में इसरो ने उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना, और उन्होंने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठिन प्रशिक्षण लिया।

उनकी मां आशा शुक्ला ने कहा, 'हम पहले डर रहे थे, लेकिन शुभांशु ने हमें और पूरे देश को गर्व से भर दिया।' उनकी पत्नी, कामना मिश्रा, जो एक डेंटिस्ट हैं, ने भी उनकी उपलब्धि को देश के लिए प्रेरणा बताया।

सैलरी से बड़ा है मिशन का महत्व

हालांकि शुभांशु की सैलरी वैश्विक अंतरिक्ष यात्रियों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन उनकी उपलब्धि का मूल्य पैसे से कहीं अधिक है। एक्सिओम-4 मिशन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और गगनयान मिशन के लिए अनुभव प्रदान किया। शुभांशु की यह यात्रा न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अंतरिक्ष में भारत का झंडा बुलंद करने का सपना देखते हैं।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, 'शुभांशु शुक्ला की सैलरी भले ही कम हो, लेकिन उन्होंने जो गौरव कमाया, उसकी कीमत अरबों में है।' यह मिशन साबित करता है कि भारत के अंतरिक्ष यात्री न केवल तकनीकी कौशल, बल्कि देशभक्ति और समर्पण की भावना से प्रेरित हैं।

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