शोएब अख्तर की जाहिल मानसिकता देखिए, पठानों और बंगालियों को बताया चरमपंथी, लोगों का फूटा गुस्सा
अफगानिस्तान के गृहयुद्ध में फंसने के बाद लाखों की संख्या में पश्तून पाकिस्तान में शरणार्थी बनकर आए, जिसका जिम्मेदार भी पाकिस्तान ही था। वहीं, 1971 में बांग्लादेश का विभाजन हुआ था।

शोएब अख्तर ने क्या कहा?
आपको बता दें, कि इन दिनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच टी20 क्रिकेट खेली जा रही है और 3 मैचों की इस सीरिज के पहले दो मैचों में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को हरा दिया है और सीरिज पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह पहली बार है, जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई सीरिज जीती हो, लिहाजा शोएब अख्तर भी इसी मैच का विश्लेषण कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने पठान और बंगालियों को लेकर विवादित बातें कही हैं। शोएब अख्तर ने कहा है, कि "अफगानिस्तान के सारे स्पिनर्स रहस्यमयी हैं और इंडिया में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप में ये सबसे बेहतरीन रहस्यमयी स्पिनरों में से एक होंगे"। शोएब ने आगे कहा, कि "मुझे बहुत खुशी है। मैं हमेशा कहता रहता हूं, कि पठान अगर अपनी ऊर्जा को चैनलाइज कर लें, पठान और बंगाली, ये दोनों वो कौमें हैं, जो अपनी एनर्जी को चैनलाइज कर लें, तो दुनिया की सबसे बड़ी कौमें बन सकती हैं, क्योंकि इनके अंदर 'चरमपंथ है' और अगर इनके अंदर का 'चरमपंथ' अगर चैनलाइज हो जाए, पॉजिटिव मायनों में हो जाए, तो ये दुनिया की सबसे बेहतरीन कौमें बन सकती हैं। तो मुझे बहुत खुशी है, कि हमारे पठान भाई जीते हैं, उन्होंने बहुत तगड़ी क्रिकेट खेली है।"
शोएब के विवादित बयान पर बवाल
शोएब अख्तर के बयान के बाद बवाल शुरू हो गया है और लोगों ने उनके इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई है। पाकिस्तान की पत्रकार नायला इनायत ने शोएब अख्तर के बयान को "जाहिल मानसिकता की पराकाष्ठा" करार दिया है। उन्होंने शोएब अख्तर के बयान पर लिखा है, कि "शोएब अख्तर पहले पश्तूनों और बंगालियों को चरमपंथी बताते हैं। फिर सुझाव देते हैं, कि यदि "अतिवाद को सकारात्मक रूप से चैनलाइज किया जाता है," तो पश्तून और बंगाली सबसे अच्छे बन सकते हैं"। आपको बता दें, कि शोएब अख्तर का ये बयान, असल में उनकी सोच को दर्शाता है, कि वो अफगानों और बंगालियों को लेकर क्या सोचते हैं। बंगालियों से शोएब अख्तर का मतलब बांग्लादेश को लेकर है, जिसने तरक्की के मामले में पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ दिया है और शोएब अख्तर ने बंगालियों को चरमपंथ से जोड़कर साफ कर दिया है, कि उनके मन में बांग्लादेश को लेकर कितनी नफरत भरी है। वहीं, अफगानों को लेकर शोएब अख्तर के बयान से साफ हो जाता है, कि एक आम पाकिस्तानी, अफगानों को लेकर क्या सोच रखता है।
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शोएब के बयान के मायने?
शोएब अख्तर काफी आसानी से अपनी बातें कहते नजर आ रहे हैं। वो अपने हिसाब से अफगानों की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन वो जितनी आसानी से पश्तूनों (पठान) को चरपमंथी की तरह ब्रांड कर रहे हैं, उससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं, कि जिस पाकिस्तानियों ने पश्तूनों के हाथों में हथियार दिए, उनकी जिंदगी में जहर बोया और अफगानिस्तान को तबाह करके रख दिया, वो पाकिस्तानी उनको लेकर क्या रखते हैं। अफगानिस्तान के आम नागरिक पाकिस्तान को बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं और पाकिस्तानियों को अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानते हैं। वहीं, अफगानिस्तान संकट के बाद लाखों की संख्या में पठानों को मजबूरन पाकिस्तान में शरण लेनी पड़ी है। लिगाजा, अफगानिस्तान को अपना बैकयार्ड बनाने का सपना देखने वाले पाकिस्तानी पठानों से नफरत करते हैं और शोएब अख्तर का बयान, एक आम पाकिस्तानी की मानसिकता की तरफ देखा जाना चाहिए।












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