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Shaksgam Valley Dispute: क्या है CPEC? इस परियोजना के लिए शक्सगाम घाटी के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ा चीन?

What is CPEC in Hindi: भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के केंद्र में एक बार फिर 'शक्सगाम घाटी' और 'CPEC' (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) आ गए हैं। शक्सगाम घाटी वह रणनीतिक इलाका है जिसे पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से चीन को 'गिफ्ट' कर दिया था। वर्तमान में चीन इस विवादित भूमि का उपयोग CPEC के तहत पाकिस्तान तक एक पक्की सड़क बनाने के लिए कर रहा है।

भारत ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। आखिर क्या है CPEC प्रोजेक्ट की वो इनसाइड स्टोरी, जिसके लिए चीन भारत की जमीन पर अपना दावा ठोक रहा है और पाकिस्तान अपनी जमीन का सौदा कर चुका है?

What is CPEC shaksgam valley

क्या है CPEC? ड्रैगन का 'मास्टर प्लान'

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह लगभग 3000 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट है, जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है। चीन इस रास्ते का उपयोग अरब सागर तक सीधी पहुंच बनाने के लिए करना चाहता है, ताकि उसे व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भर न रहना पड़े। भारत इसे अवैध मानता है क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र (PoK) से गुजरता है।

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शक्सगाम घाटी CPEC के क्यों है महत्वपूर्ण?

शक्सगाम घाटी चीन के CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) के लिए सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से "प्रवेश द्वार" की तरह है। यह घाटी चीन के शिनजियांग प्रांत को सीधे पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) से जोड़ती है, जिससे चीन को एक वैकल्पिक और छोटा सुरक्षित रास्ता मिलता है।

कनेक्टिविटी: इसके जरिए चीन काराकोरम दर्रे के उत्तर में एक 'ऑल-वेदर' सड़क बना रहा है, जो व्यापार और सैन्य रसद को आसान बनाती है।

भारत की घेराबंदी: यह इलाका सियाचिन ग्लेशियर के बिल्कुल बगल में है, जिससे चीन को भारत की हर सैन्य हलचल पर नजर रखने की ऊंचाई मिलती है।

स्थायी कब्जा: CPEC के बुनियादी ढांचे का निर्माण करके चीन इस विवादित भूमि पर अपने 'अवैध दावे' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध दिखाने की कोशिश कर रहा है।

Shaksgam Valley dispute 2026: पाकिस्तान का वो 'अवैध' उपहार

शक्सगाम घाटी सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। 1948 में पाकिस्तान ने इस पर अवैध कब्जा किया था और 1963 के एक विवादित समझौते में इसे चीन को सौंप (Pakistan gifted Shaksgam to China) दिया। दिल्ली से करीब तीन गुना बड़े इस इलाके पर चीन अब अपना हक जता रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग का ताजा बयान कि, यह इलाका चीन का हिस्सा है, भारत की क्षेत्रीय अखंडता को सीधी चुनौती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि 1963 का वह समझौता कानूनी रूप से शून्य है।

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भारत का कड़ा स्टैंड

भारत ने हमेशा इस इलाके में किसी भी विदेशी निर्माण का विरोध किया है। 9 जनवरी 2026 को भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के कंट्रोल को 'अवैध कब्जा' करार दिया। भारत का तर्क है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए पाकिस्तान को इस जमीन का सौदा करने का कोई हक नहीं था। वैश्विक मंच पर भी भारत ने CPEC को संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे एक 'औपनिवेशिक परियोजना' करार दिया है, जो पाकिस्तान को चीन का कर्जदार बना रही है।

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