326 दिन समंदर में, ईरान मिशन से लौटा दुनिया का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट! USS Gerald Ford ने क्या-क्या झेला?

USS Gerald Ford Aircraft Carrier: दुनिया के सबसे विशाल और खतरनाक युद्धपोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड (USS Gerald R. Ford) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के साथ युद्ध की आहट के बीच मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तैनात किया गया यह अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर आखिरकार अपने देश वापस लौट आया है। पेंटागन के मुताबिक, इस महाविशाल जंगी जहाज ने समुद्र में पूरे 326 दिन बिताए हैं। वर्जीनिया के नोरफ़ोक (Norfolk) नेवल बेस पर खुद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने इस युद्धपोत और इसके जांबाज सैनिकों का स्वागत किया।

यह कोई आम मिशन नहीं था। वियतनाम युद्ध के बाद से यह किसी भी अमेरिकी करियर स्ट्राइक ग्रुप की अब तक की सबसे लंबी और ऐतिहासिक तैनाती मानी जा रही है। लेकिन इस मिशन की कहानी सिर्फ कूटनीति और युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समुद्र के बीचों-बीच लगी आग और टॉयलेट चोक होने जैसी अजीबोगरीब मुश्किलें भी शामिल थीं। आइए इस पूरे मिशन का पूरा लेखा-जोखा आसान भाषा में समझते हैं।

USS Gerald Ford Aircraft Carrier

🔷वियतनाम युद्ध के बाद सबसे लंबा मिशन: क्या-क्या किया?

USS जेराल्ड आर. फोर्ड का यह दौरा अमेरिकी नौसेना के इतिहास में दर्ज हो गया है। जब इस जहाज को रवाना किया गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह मिशन इतना लंबा खिंच जाएगा।

🔹मिडिल ईस्ट में ईरान को घेरा: इस महाविशाल परमाणु संचालित पोत को असल में ईरान के साथ जंग छिड़ने की आशंका के बीच मिडिल ईस्ट भेजा गया था। वहां इसने ईरान के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कॉम्बैट ऑपरेशंस (सैन्य अभियानों) में हिस्सा लिया और अमेरिकी हितों की रक्षा की।

🔹कैरेबियन सागर में ड्रग तस्करों पर काल: मिडिल ईस्ट पहुंचने से पहले इस युद्धपोत ने कैरेबियन सागर में भी अपनी ताकत दिखाई। वहां अमेरिकी सेना ने इसके जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली संदिग्ध नावों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की।

🔹प्रतिबंधों पर एक्शन और मादुरो की घेराबंदी: केवल तस्कर ही नहीं, बल्कि जिन तेल टैंकरों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे थे, उन्हें भी इस जहाज की मदद से रोका गया। इसके अलावा, वेनेजुएला के विवादित नेता निकोलस मादुरो को घेरने और उन पर नकेल कसने में भी इस करियर ने बड़ी भूमिका निभाई।

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🔷मिशन के दौरान लगी आग: 100 बेड खाक

इतने बड़े और लंबे मिशन पर जब कोई जहाज निकलता है, तो चुनौतियां सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से भी आती हैं। 12 मार्च को समुद्र के बीचों-बीच इस आलीशान और अत्याधुनिक तैरते हुए शहर में एक बड़ा हादसा हो गया।

जहाज के लॉन्ड्री रूम (कपड़े धोने की जगह) में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग इतनी फैल गई कि इसने नौसैनिकों के रहने वाले इलाके को चपेट में ले लिया। अमेरिकी सेना द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में दो नौसैनिक बुरी तरह जख्मी हो गए। यही नहीं, आग के कारण जहाज के अंदर बने करीब 100 बेड पूरी तरह जलकर खाक हो गए और अंदरूनी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, क्रू मेंबर्स की मुस्तैदी से आग पर काबू पा लिया गया और मिशन को रुकने नहीं दिया गया।

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🔷हथियारों से लैस जहाज में 'टॉयलेट संकट'

सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन दुनिया के सबसे आधुनिक और अरबों डॉलर की लागत से बने इस सुपर-करियर को समुद्र में एक बेहद असहज करने वाली समस्या से दो-चार होना पड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 326 दिनों के इस लंबे सफर के दौरान जहाज के टॉयलेट सिस्टम (Toilet System) में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। हजारों नौसैनिकों के रहने वाले इस जहाज में वैक्यूम टॉयलेट चोक होने और ड्रेनेज सिस्टम के ठप होने से हड़कंप मच गया था।

समुद्र के बीचों-बीच इस गंदगी और तकनीकी खराबी को ठीक करना इंजीनियरों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया था। आलोचकों ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि इतने महंगे युद्धपोत में इस तरह की बुनियादी और गंभीर दिक्कतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं।

🔷क्या होगा इस वापसी का असर? (What is the Strategic Analysis)

USS जेराल्ड आर. फोर्ड की वतन वापसी इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट में अपनी रणनीतियों में कुछ बदलाव कर रहा है या फिर अपने सैनिकों को एक लंबे तनाव के बाद आराम देना चाहता है। 326 दिनों तक लगातार युद्ध जैसी स्थिति में मुस्तैद रहना किसी भी सेना के मानसिक और शारीरिक हौसले की परीक्षा जैसा है।

अब जब यह जहाज वापस आ चुका है, तो वर्जीनिया के नेवल डॉकयार्ड पर इसके डैमेज हो चुके लॉन्ड्री रूम, टॉयलेट सिस्टम और अन्य तकनीकी कमियों को सुधारा जाएगा। लेकिन इस पूरे मिशन ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में अमेरिका अपनी धमक बनाए रखने के लिए अपने इस सबसे बड़े हथियार पर कितना ज्यादा भरोसा करता है।

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