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Shaksgam valley Explainer: शक्सगाम घाटी कहां है, जिसपर भारत-चीन भिड़ गए? पाकिस्तान कैसे बन गया तीसरा खिलाड़ी

Shaksgam valley Explainer in Hindi: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का 13 जनवरी को दिया बयान शक्सगाम घाटी को लेकर भारत के गुस्से और चिंता दोनों को एक साथ सामने रख देता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत की नजर में अवैध है और उसके तहत शक्सगाम घाटी को चीन को सौंपना एक सीधा धोखा था। भारत न तो वहां चीन की किसी गतिविधि को मान्यता देता है और न ही चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को, जिसे भारतीय जमीन से होकर निकाला जा रहा है।

दरअसल, शक्सगाम घाटी की कहानी सिर्फ एक जमीन के टुकड़े की नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा से जुड़े उस जख्म की है, जो छह दशक पहले पाकिस्तान की एक साजिश और चीन की चालाकी से शुरू हुआ था। जो इलाका पाकिस्तान का था ही नहीं, उसे उसने चीन को सौंपकर भारत की पीठ में छुरा घोंप दिया। आज उसी धोखे की कीमत भारत एक खतरनाक रणनीतिक संकट के रूप में चुका रहा है, जिसकी अनदेखी अब मुमकिन नहीं रही।

Shaksgam valley Explainer in Hindi

🟡 अचानक क्यों गरमाया शक्सगाम घाटी इलाका?

यानी शक्सगाम घाटी एक ऐसा इलाका है जो भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाओं के बीच एक तरह का सैन्य और रणनीतिक जंक्शन बन जाता है। बीते कुछ दिनों से शक्सगाम घाटी को लेकर भारत और चीन आमने सामने आ गए हैं। भारत ने आरोप लगाया कि चीन इस इलाके में सड़कें और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं बना रहा है, जबकि यह भारतीय क्षेत्र है।

भारत का साफ कहना है कि वह इस इलाके में किसी भी तरह की चीनी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता और जरूरत पड़ी तो अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएगा। इसके जवाब में चीन ने पलटवार करते हुए कहा कि शक्सगाम घाटी उसकी जमीन है और वहां निर्माण करना उसका आंतरिक मामला है। यहीं से यह विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। ऐसे में आइए समझते हैं शक्सगाम घाटी कहां है और भारत के लिए क्यों ये जरूरी है।

🟡 शक्सगाम घाटी कहां है? (Where is Shaksgam valley)

शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, काराकोरम पर्वत श्रृंखला के उत्तर में स्थित एक दुर्गम और ऊंचाई वाला इलाका है। यह क्षेत्र आज भले ही चीन के प्रशासन में हो, लेकिन कानूनी रूप से यह भारत के लद्दाख क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है।

यह घाटी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हुनजा-गिलगित इलाके से लगी हुई है और इसके पूरब में सियाचिन ग्लेशियर है। उत्तर में यह सीधे चीन के शिनजियांग प्रांत से जुड़ती है। यही भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना देती है। यह एक विवादित इलाका है और भारत का कहना है कि यह सेंसिटिव इलाका भारतीय इलाका है।

🟡 पाकिस्तान ने कैसे दे दी भारत की जमीन (Shaksgam Valley India China dispute)

असल कहानी 1963 में शुरू होती है। उस समय पाकिस्तान और चीन ने एक तथाकथित सीमा समझौता किया, जिसे चीन पाकिस्तान सीमा समझौता 1963 कहा जाता है। इसी समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का बड़ा हिस्सा चीन को सौंप दिया।

1963 में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बॉर्डर विवादों को सुलझाने के मकसद से एक 'बाउंड्री एग्रीमेंट' के तहत शक्सगाम घाटी चीन को दे दी थी। उत्तरी इलाके में बसी शक्सगाम घाटी की सीमाएं उत्तर में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के शिनजियांग प्रांत, दक्षिण और पश्चिम में POK के उत्तरी इलाकों और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर इलाके से लगती हैं।

शक्सगाम घाटी पर अभी शिनजियांग के हिस्से के तौर पर चीन का कंट्रोल है। हालांकि भारत ने हमेशा कहा है कि शक्सगाम घाटी जम्मू और कश्मीर (अब लद्दाख) की पुरानी रियासत का हिस्सा है। पाकिस्तान ने 1947-1948 के युद्ध के दौरान इस इलाके पर कब्ज़ कर लिया था और बाद में 1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते के तहत इसे चीन को सौंप दिया था।

लेकिन भारत का कहना है कि पाकिस्तान के पास ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं था, क्योंकि यह इलाका जम्मू कश्मीर का हिस्सा था और आज भी भारत के लद्दाख क्षेत्र में आता है। पाकिस्तान खुद 1948 के युद्ध के दौरान इस पर अवैध कब्जा कर चुका था इसलिए वह किसी तीसरे देश को यह इलाका सौंप ही नहीं सकता था।

🟡 क्यों अवैध है पाक-चीन का 1963 का समझौता (China Pakistan deal 1963)

भारत की आपत्ति सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि कानूनी भी है। दिलचस्प बात यह है कि 1963 के समझौते के एक प्रावधान में खुद पाकिस्तान और चीन ने माना था कि कश्मीर विवाद के समाधान के बाद यह सीमा दोबारा तय की जाएगी। इसका मतलब यह था कि दोनों देश जानते थे कि यह इलाका अंतिम रूप से उनका नहीं है।

यानी पाकिस्तान ने जो जमीन चीन को दी, वह खुद उसकी नहीं थी। इसी वजह से भारत इस समझौते को शुरू से ही अवैध और अमान्य मानता रहा है।

🟡 सियाचिन और काराकोरम के बीच क्यों अहम है शक्सगाम

शक्सगाम घाटी की सबसे बड़ी ताकत उसका स्थान यानी भौगोलिक स्थिति है। यह सियाचिन ग्लेशियर के पास है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र माना जाता है। यह इलाका काराकोरम पासेज और चीन के शिनजियांग प्रांत को जोड़ने वाले रास्तों के बेहद करीब है।

अगर चीन यहां मजबूत सड़कें और सैन्य ढांचा बना लेता है तो वह न सिर्फ पाकिस्तान के साथ अपना संपर्क मजबूत करेगा बल्कि भारत के लद्दाख और सियाचिन क्षेत्र पर भी रणनीतिक दबाव बढ़ा सकेगा।

खबरों के मुताबिक चीन शक्सगाम घाटी में करीब 75 किलोमीटर लंबी एक चौड़ी और हर मौसम में चलने वाली सड़क बना चुका है। यह सड़क भारत के इलाके से सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी पर है।

भारत को डर है कि यह सड़क आगे चलकर चीन को तेजी से सेना और हथियार तैनात करने की क्षमता दे देगी। साथ ही यह चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को और मजबूत कर सकती है, जो पहले से ही भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरने को लेकर विवादित है।

🟡 पाकिस्तान क्यों बन गया तीसरा खिलाड़ी?

पाकिस्तान इस पूरे खेल में चीन का सहयोगी बना हुआ है। शक्सगाम घाटी को चीन को सौंपने से लेकर आज के सीपीईसी प्रोजेक्ट तक, इस्लामाबाद लगातार बीजिंग के साथ खड़ा दिखता है।

भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपनी जमीन न होने के बावजूद उसे चीन के हवाले करके पूरे क्षेत्र की स्थिरता से खिलवाड़ कर रहा है। यही वजह है कि भारत चीन और पाकिस्तान दोनों के इस गठजोड़ को अपने लिए सीधी चुनौती मानता है।

🟡 भारत की साफ चेतावनी

भारत ने साफ कर दिया है कि शक्सगाम घाटी समेत जम्मू कश्मीर और लद्दाख का हर इंच उसका अभिन्न हिस्सा है। चीन या पाकिस्तान की कोई भी गतिविधि इस सच्चाई को नहीं बदल सकती। भारत ने यह भी कहा है कि वह शक्सगाम घाटी में जमीनी हालात बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करता रहेगा और जरूरत पड़ी तो अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

🟡 क्यों यह टकराव आगे भी बढ़ सकता है

चीन जिस तरह इस इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है, उससे भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। शक्सगाम घाटी सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि पूरे लद्दाख और सियाचिन की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

पाकिस्तान के सहयोग से चीन इस इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जबकि भारत इसे अपने क्षेत्र में अवैध घुसपैठ मानता है। यही वजह है कि आने वाले समय में शक्सगाम घाटी भारत चीन तनाव का एक बड़ा केंद्र बन सकती है।

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