Amjad Khan: डॉक्टर पर क्यों टूट पड़ा 'गब्बर सिंह' का बेटा! सालों बाद शादाब खान का छलका दर्द
Why Amjad Khan son Shadaab hits Doctor: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी 'गब्बर सिंह' का नाम लिया जाता है, तो आंखों के सामने खौफ और दमदार अदाकारी का वो चेहरा घूम जाता है जिसे दिग्गज अभिनेता अमजद खान ने अमर कर दिया। लेकिन 1992 की वो काली रात कोई नहीं भूल सकता, जब महज 51 साल की उम्र में इस महान कलाकार ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। अमजद खान के अचानक हुए निधन ने न केवल बॉलीवुड को हिला दिया था, बल्कि उनके परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि उनके बड़े बेटे शादाब खान अपना मानसिक संतुलन तक खो बैठे थे।
आइए जानतें हैं शादाब खान ने अपने पिता के निधन के उस भयावह मंजर को याद करते हुए क्या खुलासे किए और कैसे उस रात उन्होंने गुस्से में डॉक्टर पर ही हाथ उठा दिया था।

जब गुस्से में डॉक्टर को मार बैठा बेटा
विक्की लालवानी के साथ एक बातचीत में, अमजद खान के बेटे शादाब ने उस दर्दनाक पल को याद किया जब उन्हें अपने पिता की मृत्यु की सूचना मिली थी। उन्होंने खुलासा किया कि सदमे और दुख ने उन्हें इतनी गहराई से झकझोर दिया था कि उन्होंने गुस्से में आकर डॉक्टर को ही मार दिया था। उस समय शादाब की उम्र महज 18 साल थी।
'पिता का शरीर ठंडा पड़ चुका था'
अपने पिता की मृत्यु के दिन को याद करते हुए शादाब ने कहा, 'मैं घर पर नहीं था। मैं रात करीब 8 बजे वापस आया और मुझसे कहा गया, 'पापा जाग नहीं रहे हैं, जाओ उन्हें जगाओ।' उनका पिछले दिन एक मीटिंग थी, इसलिए वह थके हुए थे और आराम कर रहे थे। वह एक बार जागे और फिर दोपहर में फिर सो गए। मेरी माँ ने मुझे उन्हें देखने के लिए कहा क्योंकि वह उठ नहीं रहे थे। जब मैं उनके पास गया, तो उनका शरीर ठंडा था।"
कुछ सेकंड्स की देरी और
तुरंत एक डॉक्टर को बुलाया गया, जिसने परिवार को बताया कि अमजद खान को जबरदस्त दिल का दौरा पड़ा है। शादाब ने बताया, 'डॉक्टर ने कहा कि एक विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता है। मैं वह ले आया, लेकिन मुझे बताया गया कि मैं कुछ सेकंड लेट हो गया हूं। जब डॉक्टर ने मुझसे कहा कि मैं इंजेक्शन लाने में लेट हो गया, तो मैंने डॉक्टर को मार दिया। मैंने घर की क्रॉकरी का हर टुकड़ा तोड़ दिया, दीवार में मुक्का मारा और यहां तक कि अपने पिता के सबसे करीबी दोस्तों में से एक के साथ भी बदतमीजी कर दी थी।'
मुश्किल वक्त में फरिश्ता बने सलीम खान
उसी बातचीत में, शादाब ने यह भी याद किया कि कैसे अमजद खान की मृत्यु के बाद सलीम खान ने चुपचाप परिवार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, 'उनकी मृत्यु के बाद, मुझे याद है कि घर पर पूरी तरह से अफरा-तफरी मची थी। लोग लगातार आ-जा रहे थे, रस्में निभाई जा रही थीं और मेरी माँ कुछ भी संभालने की स्थिति में नहीं थीं। मैं केवल 18 साल का था और मेरे भाई-बहन बहुत छोटे थे।'
अपनी जेब से भरा सारा खर्च
शादाब ने आगे बताया कि जब परिवार रस्मों और व्यवस्थाओं में लगा था, तब सलीम खान ने विवेकपूर्ण तरीके से सारे खर्चों का ध्यान रखा। शादाब ने कहा, 'उस समय, हमें रस्मों और रिवाजों के लिए कई चीजों की आवश्यकता थी। एक बात जो मुझे स्पष्ट रूप से याद है वह यह है कि वह एक व्यक्ति जो चुपचाप अपनी जेब से हर चीज के लिए भुगतान कर रहा था, वह सलीम साहब थे। रस्मों के लिए जो कुछ भी आवश्यक था, उन्होंने किसी को बताए बिना या अपनी ओर ध्यान आकर्षित किए बिना चुपचाप उसका भुगतान किया। मैंने वह अपनी आँखों से देखा था।'
अमजद खान ने दो दशक लंबे करियर में 130 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी कई पूरी हो चुकी फिल्में उनके निधन के बाद रिलीज हुईं, जिनमें उनकी आखिरी फिल्म 'कलिंगा' 1996 में रिलीज हुई थी।














Click it and Unblock the Notifications