Shaksgam Valley: भारत-चीन के बीच कितना पुराना है शक्सगाम घाटी विवाद? समझें पूरा टाइमलाइन और इतिहास
Shaksgam Valley Dispute: शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद एक बार फिर गहराता जा रहा है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान की एंट्री ने इस मुद्दे को और भी संवेदनशील बना दिया है। शक्सगाम घाटी में चीन और पाकिस्तान की मौजूदगी भारत के लिए ही नहीं दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
13 जनवरी 2026 तक सामने आई ताजा घटनाओं ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद अहम इस क्षेत्र को लेकर भारत ने चीन के हालिया निर्माण कार्यों पर कड़ा विरोध जताया है। चीन अपने दावों पर अड़ा हुआ है।

Shaksgam Valley: चीन की विस्तारवादी नीति का प्रभाव
शक्सगाम घाटी को लेकर विवाद की शुरुआत 60 के दशक में ही हो गई थी। अब फिर से चीन ने यहां सैन्य गतिविधियां तेज कर दी है और इसमें पाकिस्तान भी शामिल हो गया है। जानें इस पूरे विवाद की जड़ क्या है और इसकी शुरुआत कहां से हुई थी।
Shaksgam Valley: विवाद की शुरुआत 1963 में अवैध समझौते के साथ
शक्सगाम घाटी विवाद की जड़ें 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौर से ही जारी है। 2 मार्च 1963 को पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने भारत की लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को सौंपी थी। यह क्षेत्र शक्सगाम घाटी के नाम से जाना जाता है। भारत ने इस समझौते को शुरू से ही अवैध और अमान्य बताया है। पाकिस्तान का इस क्षेत्र पर किसी भी तरह का अधिकार नहीं था और भारत ने हर मंच पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका उसका अभिन्न हिस्सा है।
Shaksgam Valley Reason: डोकलाम के बाद बढ़ी गतिविधियां
- 2017 में डोकलाम विवाद के बाद चीन ने शक्सगाम घाटी में अपनी सैन्य और आधारभूत गतिविधियों को तेज कर दिया है। भारत ने कई मौकों पर चीन के निर्माण कार्यों पर आपत्ति जताई, लेकिन बीजिंग ने इन्हें नजरअंदाज किया।
- 2021-2024: सड़क निर्माण की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई थीं और उसके बाद से विवाद और बढ़ गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से 2021 से 2024 के बीच खुलासा हुआ कि चीन शक्सगाम घाटी में एक सड़क का निर्माण कर रहा है।
- उसके नेशनल हाईवे G219 से जुड़ती है। मई 2024 में भारत ने इस सड़क निर्माण को अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
Shaksgam Valley Facts: अब क्या है स्थिति
जनवरी 2026 में यह विवाद एक बार फिर तेज हो गया। 9 जनवरी 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा बनाई जा रही 75 किलोमीटर लंबी ऑल-वेदर रोड पर आपत्ति जताई है। इसके जवाब में 12-13 जनवरी को चीन ने भारत के दावों को खारिज करते हुए कहा कि शक्सगाम घाटी उसका आंतरिक क्षेत्र है और वहां निर्माण पूरी तरह वैध है। 13 जनवरी 2026 को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत 1963 के समझौते को नहीं मानता और शक्सगाम घाटी में चीन की हर गतिविधि अवैध है।
क्यों अहम है शक्सगाम घाटी?
शक्सगाम घाटी रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह सियाचिन ग्लेशियर के बेहद करीब स्थित है। अगर चीन यहां अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो इससे भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। यह इलाका चीन और पाकिस्तान को एक रणनीतिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ता है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।












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