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भीषण दवा संकट में फंसा पाकिस्तान, जरूरी दवाएं खत्म, बंदरगाहों पर फंसा है करोड़ों डॉलर का सामान

पाकिस्तान पिछले एक महीने से कह रहा है, कि उसके पास 3 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। लिहाजा, पाकिस्तान डॉलर बचाने के लिए विदेशों से सामान नहीं खरीद रहा है। ऐसे में देश की स्थिति गंभीर होती जा रही है।

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Pakistan News: पाकिस्तान में अब आर्थिक संकट लोगों की जान पर आफत बनता जा रहा है और देश के पास आवश्यक दवाओं को खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की कर्ज की किश्त हासिल करने के लिए शहबाज सरकार ने तमाम कड़े शर्तों को मानने शुरू कर दिए हैं, जो लोगों पर कहर बरपा रहा है। देश की आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है, लिहाजा माना जा रहा है, कि आम आदमी पर गंभीर संकट पड़ने वाला है।

पाकिस्तान में दवा संकट

पाकिस्तान में दवा संकट

आर्थिक बदहाली में फंसा पाकिस्तान कई तरह की संकटों का सामना कर रहा है, जिसमें आसमान छूती खाद्य सामग्रियों की कीमत, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, लगातार और लंबे लंबे समय के लिए बिजली कटौती, पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें अब दिखना पाकिस्तान में आम बाद हो चुकी है, लेकिन दवा संकट सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़ा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के नागरिक, अब उचित स्वास्थ्य सेवा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और आपूर्ति की कमी हो चुकी है।

'सबसे खराब दवा संकट'

'सबसे खराब दवा संकट'

देश में विदेशी मुद्रा भंडार की कमी ने आवश्यक दवाओं या घरेलू दवाओं के उत्पादन में उपयोग की जाने वाली सक्रिय दवा सामग्री को खरीदने की पाकिस्तान की क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। जिसका नतीजा ये हो रहा है, कि स्थानीय दवा निर्माताओं को अपने उत्पादन को कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसकी वजह से अस्पतालों में मरीजों को परेशानी हो रही है और उन्हें वक्त पर दवा नहीं मिल रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संवेदनशील सर्जरी के लिए आवश्यक एनेस्थेटिक्स दवा, कई ऑपरेशन थिएटरों के पास दो सप्ताह से भी कम समय का बचा है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण डॉक्टरों को सर्जरी रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

दवा संकट में क्यों फंसा पाकिस्तान?

दवा संकट में क्यों फंसा पाकिस्तान?

पाकिस्तान अपनी जरूरत की ज्यादातर दवाओं की खरीददारी विदेशों से करता है और पाकिस्तान में घरेलू स्तर पर दवाओं का निर्माण किया जाता है, हालांकि उसकी मात्रा कम होती है, लेकिन घरेलू दवाओं की सप्लाई स्थानीय अस्पतालों में होती है, लिहाजा उसकी महत्ता काफी ज्यादा है। इसके अलावा पाकिस्तान में जिन दवाओं का निर्माण होता है, उसके लिए रॉ-मैटेरियल्स का 95 फीसदी से ज्यादा का आयात वो भारत और चीन से करता है। लेकिन, पाकिस्तान सरकार ने डॉलर बचाने के लिए देश के आयात को रोक दिया है, लिहाजा पाकिस्तान की कंपनियों को डॉलर में बिल चुकाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान से मंजूरी लेनी पड़ती है, जो नहीं मिल रही है। इसका असर ये हो रहा है, कि पाकिस्तान के बंदरगाह पर करोड़ों डॉलर के सामान अब खराब हो रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान उसे खरीद नहीं पा रहा है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर के करीब है, लिहाजा पाकिस्तान के वाणिज्यिक बैंक आयात के लिए नए साख पत्र जारी नहीं कर रहे हैं।

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    क्या कह रहा है दवा बाजार?

    क्या कह रहा है दवा बाजार?

    पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष सैयद फारूक बुखारी के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि "अगर मौजूदा नीतियां (आयात पर प्रतिबंध) अगले चार से पांच सप्ताह तक बनी रहती हैं, तो देश में सबसे खराब दवा संकट पैदा हो सकता है।" वहीं, पाकिस्तान के पंजाब में ड्रग रिटेलर्स ने कहा है, कि महत्वपूर्ण दवाओं की कमी का पता लगाने के लिए सरकारी सर्वेक्षण टीमों ने क्षेत्र का दौरा किया है। खुदरा विक्रेताओं ने खुलासा किया है, कि कुछ सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण दवाओं की कमी से ज्यादातर ग्राहक प्रभावित हो रहे हैं। इन दवाओं में पैनाडोल, इंसुलिन, ब्रुफेन, डिस्प्रिन, कैलपोल, टेग्रल, निमेसुलाइड, हेपामेर्ज़, बुस्कोपैन और रिवोट्रिल आदि शामिल हैं।

    साप्ताहिक महंगाई दर 40 फीसदी पार

    साप्ताहिक महंगाई दर 40 फीसदी पार

    इस बीच पाकिस्तान में साप्ताहिक महंगाई दर रिकॉर्ड 40 प्रतिशत को पार कर गया है। देश में प्याज, चिकन, अंडे, चावल, सिगरेट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है, कि साप्ताहिक मुद्रास्फीति पांच महीनों में पहली बार 40% से ज्यादा हो गई है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, केला, चिकन, चीनी, खाना पकाने के तेल, गैस और सिगरेट की कीमत उच्च स्तर पर बनी हुई है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई हेडलाइन मुद्रास्फीति जनवरी में 27.6% दर्ज की गई थी। हालांकि, सरकार आईएमएफ की शर्तों के तहत सख्त कदम उठा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने और महंगाई बढ़ने की संभावना है।

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