BRICS: दुनिया में युद्ध की आहट के बीच भारत आ रहे पुतिन के विदेश मंत्री, दिल्ली से दुनिया को देंगे बड़ा संदेश

BRICS Foreign Ministers Meeting Delhi: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 और 15 मई, 2026 को भारत के दो-दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आएंगे। रूसी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि लावरोव नई दिल्ली में आयोजित होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में शिरकत करेंगे।

भारत इस साल (2026) BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका विषय 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखा गया है। यह यात्रा भारत और रूस के बीच 'रणनीतिक साझेदारी' को नई दिशा देने के साथ-साथ आने वाले शिखर सम्मेलन (Summit) की तैयारी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

BRICS Foreign Ministers Meeting Delhi

शिखर सम्मेलन का मसौदा होगा तैयार

नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य साल के अंत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करना है। लावरोव और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नए सदस्यों (जैसे ईरान, यूएई, मिस्र और इंडोनेशिया) को समूह में पूरी तरह शामिल करने पर चर्चा करेंगे। इस दौरान कुछ अहम दस्तावेजों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

Sergey Lavrov India Visit 2026: रुपया-रूबल व्यापार पर खास नजर

BRICS बैठक के इतर, लावरोव और जयशंकर के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक आपसी व्यापार को $100 बिलियन तक ले जाना है। फिलहाल भारत और रूस के बीच लगभग 96% व्यापार अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया और रूबल) में हो रहा है। इस दौरे में इस व्यवस्था को और सुव्यवस्थित करने और लॉजिस्टिक्स (जैसे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर) को मजबूत करने पर बात होगी।

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ऊर्जा और सुरक्षा की नई रणनीति

इस यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है। भारत रूस से कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की निर्बाध आपूर्ति चाहता है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। साथ ही, रक्षा क्षेत्र के पुराने प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और 'मेक इन इंडिया' के तहत सैन्य उपकरणों के भारत में उत्पादन को लेकर भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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बदलते वैश्विक समीकरण और भारत

रूस ने स्पष्ट किया है कि लावरोव की यह यात्रा भारत के साथ उसके पुराने और अटूट संबंधों को दर्शाती है। ऐसे समय में जब दुनिया पश्चिम और पूर्व के बीच बंटी नजर आ रही है, भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक रूस के लिए अपनी वैश्विक उपस्थिति दर्ज कराने का मंच है। भारत भी इस बैठक के जरिए खुद को एक 'विश्व बंधु' के रूप में स्थापित कर रहा है जो सभी पक्षों के बीच संतुलन बना सकता है।

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