SCO Summit: चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट को भारत ने किया खारिज, PM मोदी ने शी जिनपिंग के मुंह पर किया मना
India SCO Summit BRI Project: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) नेताओं के शिखर सम्मेलन के अंत में जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में, भारत ने बेल्ट एंड रोड्स इनिशिएटिव (बीआरआई) का समर्थन करने वाले पैराग्राफ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
साल 2022 में भी समरकंद घोषणापत्र में इसी तरह का सूत्रीकरण इस्तेमाल किया गया था, और उस वक्त भी भारत ने पैराग्राफ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। भारत का इनकार चीन के लिए बहुत बड़ा झटता है और एससीओ में बीआरआई प्रोजेक्ट लाने के शी जिनपिंग के सपने पर भारत ने पानी फेर दिया है।

बीआरआई प्रोजेक्ट को भारत ने दिया झटका
मंगलवार को भारत की अध्यक्षता में एससीओ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें एससीओ के तमाम सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में शी जिनपिंग, व्लालिमीर पुतिन, शहबाज शरीफ और ईरान के राष्ट्रपकि इब्राहिम रईसी भी शामिल हुए थे।
इस शिखर सम्मेलन के बाद एससीओ देशों की तरफ से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' जारी किया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की नई दिल्ली घोषणापत्र के बीआरआई पैराग्राफ में लिखा है, "चीन की "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव" (बीआरआई) पहल को कजाकिस्तान गणराज्य, किर्गिज़ गणराज्य, इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान, रूसी संघ, ताजिकिस्तान गणराज्य और उज़्बेकिस्तान गणराज्य की तरफ से समर्थन की पुष्टि की जाती है और इस परियोजना को संयुक्त रूप से लागू करने के लिए, चल रहे काम पर ध्यान दिया जाता है, जिसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और बीआरआई के निर्माण को जोड़ने के प्रयास भी शामिल हैं।"
लेकिन, भारत ने इस घोषणापत्र पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।
भारत ने हमेशा BRI का विरोध किया है, क्योंकि भारत का कहना है, कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करता है।
चीन का बीआरआई पैराग्राफ पिछले साल समरकंद में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद जारी घोषणा पत्र के ही समान है, जिसमें भी यह कहा गया था कि कजाकिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान, चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के लिए अपने समर्थन की पुष्टि करते हुए, इसे संयुक्त रूप से लागू करने के लिए चल रहे काम पर ध्यान दें।"
इस परियोजना में यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और बीआरआई की प्रगति को संरेखित करने के प्रयास शामिल हैं।
वहीं, आतंकवाद के मुद्दे पर, दिल्ली घोषणापत्र में समरकंद घोषणापत्र से एक शब्द बदलने के अलावा, समान भाषा का उपयोग किया गया है और इस बार "अतिराष्ट्रवाद" के बजाय "अंधराष्ट्रवाद" का उपयोग किया गया है।
नई दिल्ली घोषणा में कहा गया है, कि "सदस्य देश आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी समूहों की गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा संयुक्त समन्वित प्रयासों का निर्माण करना महत्वपूर्ण मानते हैं। धार्मिक असहिष्णुता, आक्रामक राष्ट्रवाद, जातीयता, नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफोबिया, फासीवाद और अंधराष्ट्रवाद के विचार के प्रसार को रोकने पर विशेष ध्यान देते हैं।"
मंगलवार को जारी घोषणा में कहा गया, कि "सदस्य देश आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला करने के बहाने राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की अस्वीकार्यता के साथ-साथ आतंकवादी, चरमपंथी और कट्टरपंथी समूहों का भाड़े के तौर पर उपयोग करने की अस्वीकार्यता पर ध्यान देते हैं।"
दिल्ली घोषणा में यूक्रेन का जिक्र नहीं
सबसे दिलचस्प ये रहा, कि नई दिल्ली घोषणा में यूक्रेन युद्ध का कोई जिक्र नहीं किया गया है, जिसको लेकर रूस, भारत से काफी खुश है।
2022 समरकंद सम्मेलन की तरह ही, नई दिल्ली घोषणा में कहा गया है, कि सदस्य-राज्य "लोगों के राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के रास्तों की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक पसंद के अधिकार के सम्मान की वकालत करते हैं और संप्रभुता, स्वतंत्रता, राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता, समानता, पारस्परिक लाभ पर जोर देते हैं।"
इसके अलावा, नई दिल्ली घोषणा में ये संकल्प भी लिया गया है, कि एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत पर काम किया जाएगा, जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के सतत विकास का आधार हैं। इसके अलावा, बातचीत और परामर्श के माध्यम से देशों के बीच असहमति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता की भी पुष्टि नई दिल्ली घोषणा में की गई है।












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