लैसेंट में रिपोर्ट छाप कर कोरोना वायरस लैब लीक थ्योरी को किया था खारिज, 27 वैज्ञानिक निकले चीनी एजेंट!

प्रतिष्ठित लैसेंट पत्रिका में हस्ताक्षर के जरिए कोरोना वायरस के प्रयोगशाला से बाहर आने की थ्योरी को खारिज करने वाले वैज्ञानिकों का चीन से रिश्ता पाया गया है।

नई दिल्ली, सितंबर 15: कोरोना वायरस के चीन के प्रयोगशाला से निकलने की रिपोर्ट को खारिज करने वाला वैज्ञानिक खुद चीन का एजेंट निकला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत को खारिज कर दिया कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से कोविड लीक हुआ था, उनका संबंध कुख्यात लैब से था। द टेलीग्राफ ने बताया कि जिन वैज्ञानिकों ने पिछले साल 7 मार्च को लैब-लीक सिद्धांत को खारिज करते हुए द लैंसेट में रिपोर्ट प्रकाशित किया था। जिसपर बकायदा उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, अब पता चला है कि उनका सीधा संबंध वुहान लैक के रिसर्चर्स है।

27 वैज्ञानिकों ने छापी थी रिपोर्ट

27 वैज्ञानिकों ने छापी थी रिपोर्ट

आपको बता दें कि चीन के वुहान लैब से कोरोना वायरस के निकलने का दावा दुनियाभर के कई मशहूर वैज्ञानिकों ने किया हुआ है और उन दावों को खारिज करने के लिए विश्व की मशहूर और प्रतिष्ठित साइंस जर्नल लैसेंट में 27 वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था। इस रिपोर्ट को ब्रिटिश जीव विज्ञानी पीटर दासजक के नेतृत्व में प्रकाशित किया गया था। लैसेंट पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट के बाद इस बात पर बहस बंद हो गई, कि क्या कोरोना वायरस लैब से निकला है और क्या चीन ने कोरोना वायरस में कोई हेरफेर किया है। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि ब्रिटिश वैज्ञानिक दासजक, जिनके नेतृत्व में लैसेंट में रिपोर्ट छापी गई थी, वो अमेरिका स्थिति एक एनजीओ इकोहेल्थ एलायंस के अध्यक्ष हैं, जिसका सीधा संबंध चीन के वुहान लैब से है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस एनजीओ ने वुहान लैब को आर्थिक मदद भी की थी। आपको बता दें कि 27 वैज्ञानिकों ने लैसेंट में जो रिपोर्ट छापी थी, उसमें उन्होंने वुहान लैब पर साजिश करने के आरोपों को खारिज करते हुए कड़ी निंदा की थी।

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    चीनी 'एजेंट' निकले 27 वैज्ञानिक

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    फ्रीडम ऑफ इनफॉर्मेंस रिक्वेस्ट के आधार पर अमेरिका में इन तमाम सनसनीखेज जानकारियों को निकाला गया है, जिससे पता चलता है कि चीन के एजेंट 27 विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने दुनिया को किस तरह से धोखा देने की कोशिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक 8 फरवरी को ब्रिटिश वैज्ञानिक दासजक द्वारा भेजे गए एक ईमेल से पता चला है कि उन्हें चीन में "हमारे सहयोगियों" द्वारा "समर्थन दिखाने" के लिए पत्र लिखने का आग्रह किया गया था। वैज्ञानिक दासजक ने लैसेंट पत्रिका में जो रिपोर्ट छापी थी, उसमें उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया था कि उनका इकोहेल्थ एलायंस के साथ कोई संबंध है। इसके साथ ही लैब लीक थ्योरी को खारिज करने वाले 5 और वैज्ञानिकों का भी इसी एनजीओ इकोहेल्थ एलायंस के साथ संबंध है और वो यहां पहले काम कर चुके हैं। इसके अलावा, लैंसेट पत्रिका में हस्ताक्षर करने वालों में से तीन ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट से थे, जिन्होंने वुहान लैब में रिसर्च के लिए पैसे दिए थे।

    अमेरिका भी है साजिश में शामिल?

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    चीनी शहर वुहान में पहली बार कोविड -19 का पता चलने के लगभग दो साल बाद भी वायरस की उत्पत्ति को लेकर सवाल बने हुए हैं और वैश्विक स्तर पर कई वैज्ञानिकों और सरकारों द्वारा कई दावे किए गए हैं। हाल ही की अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट भी इस बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाल सकी है कि क्या नया कोरोनावायरस स्वाभाविक रूप से मनुष्यों में आया है, या यह प्रयोगशाला से निकला है। इस बीच अमेरिका की संलिप्तता के दावे भी मजबूत रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई खोजी पत्रकार शैरी मार्कसन की एक नई किताब में दावा किया गया है कि कुख्यात वुहान वायरोलॉजी लैब को यूएस कैश ने फंड किया था। किताब में यह भी दावा किया गया है कि बीमारियों को और अधिक शक्तिशाली बनाने के विवादास्पद शोध को अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथनी फौसी द्वारा समर्थित किया गया था।

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