Success Story: कौन हैं सना रामचंद, जो बनी पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला अधिकारी, सिविल परीक्षा की पास

पाकिस्तान में पहली बार हिंदू लड़की बनी सिविल सेवा अधिकारी। एमबीबीएस भी हैं सना रामचंद।

इस्लामाबाद, सितंबर 22: पड़ोसी देश पाकिस्तान से अकसर अल्पसंख्यकों से अत्याचार के मामले सामने आते रहते हैं लेकिन कम ही बार ऐसा होता है जब अल्पसंख्यकों को लेकर कुछ अच्छी खबर मिले। पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हुआ है कि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाली कोई हिंदू लड़की ने प्रतिष्ठित पब्लिक सर्विस परीक्षा सेन्ट्रल सुपिरियर सर्विस यानि सीएसएस पास की हो और अपने नाम का लोहा मनवाया हो। पाकिस्तान की रहने वाली डॉ. सना रामचंद पाकिस्तान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के लिए चुनी गई हैं। भारत के यूपीएससी की तरह ही ये परीक्षा पाकिस्तान की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक है।

महिला अधिकारी बनी सना

महिला अधिकारी बनी सना

डॉ. सना रामचंद पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला हैं, जिन्होंने प्रितिष्ठित परीक्षा सेन्ट्रल सुपिरियर सर्विस यानि सीएसएस पास की हो। डॉ. सना रामचंद सीएसएस पास कर पाकिस्तान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के लिए चुनी गई हैं। डॉ. सना रामचंद एमबीबीएस कर चुकी हैं और अभी सिंध प्रांत के शिकारपुर जिले में प्रैक्टिस भी करती हैं। इसके साथ ही डॉ. सना रामचंद मास्टर्स इन सर्जरी भी कर रही हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही सबसे ज्यादा हिन्दू रहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. सना रामचंद उन 221 सफल अभ्यर्थियों में शामिल होने में कामयाब हुई हैं, जिन्हें पाकिस्तान प्रशासनिक विभाग में ऊंचा ओहदा मिलेगा। इस परीक्षा में लिखित परीक्षा में कुल 18 हजार 553 उम्मीदवार शामिल हुए थे।

'वाहे गुरु जी की खालसा, वाहे गुरु जी की फतह'

'वाहे गुरु जी की खालसा, वाहे गुरु जी की फतह'

मई में इस परीक्षा का परिणाम आने के बाद डॉ. सना रामचंद ने ट्वीट करते हुए लिखा 'वाहे गुरु जी की खालसा, वाहे गुरु जी की फतह! मुझे ये बताने में बेहद खुशी हो रही है कि अल्लाह की कृपा से मैंने सीएसएस-2020 परीक्षा पास कर लिया है। इसका सारा क्रेडिट मेरे पैरेंट्स को जाता है।' आपको बता दें कि पाकिस्तान में सीएसएस परीक्षा पास करने के बाद उच्चतम रैंक हासिल करने वाले पहले प्रशासनिक विभाग, फिर केन्द्रीय पुलिस बल में शामिल होने का मौका मिलता है। इसके बाद विदेश विभाग आता है। इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थियों को प्रशासनिक विभाग में जाने का मौका मिलता है या अपनी मर्जी से छात्र पुलिस विभाग में जा सकते हैं, जहां उन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का पद मिलता है, जो पुलिस महकमें में काफी शक्तिशाली पद माना जाता है। बीबीसी ऊर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. सना रामचंद पाकिस्तान की वो पहली महिला हैं, जो सीएसएस पास करने के बाद पीएएस के लिए चुनी गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस परीक्षा में कुल 79 लड़कियां पास हुई हैं, जिन्हें अलग अलग विभागों में नियुक्तियां मिलेंगी।

एमबीबीएस हैं डॉ. सना रामचंद

एमबीबीएस हैं डॉ. सना रामचंद

डॉ. सना रामचंद ने चंदका मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की है और कराची सिविल हॉस्पिटल में उन्होंने ट्रेनिंग ली है। इस वक्त वो सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी एंड ट्रांसपेरेंट से एफसीपीसी यानि सर्जरी की पढ़ाई भी कर रही हैं और बहुत जल्द वो सर्जन बनने वाली हैं।

कामयाबी के लिए बधाई संदेश

कामयाबी के लिए बधाई संदेश

डॉ. सना रामचंद को मिली कामयाबी के बाद उन्हें कई लोगों से बधाईयां मिल रही हैं, जिनमें पाकिस्तान की राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनियर लीडर फरहतुल्लाह बाबर ने भी डॉ. सना रामचंद्र को उनकी कामयाबी के लिए बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि 'डॉ. सना रामचंद्र ने पाकिस्तानी हिंदू समुदाय को गर्वान्वित किया है और पूरे देश को उनपर गर्व है।' इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी काफी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अस्पतालों की खराब है स्थिति

अस्पतालों की खराब है स्थिति

द टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए डॉ. सना रामचंद ने कहा कि मेरी शुरूआती पोस्टिंग शिकारपुर के लखी तालुका अस्पताल में महिला चिकित्सा अधिकारी के तौर पर की गई थी। जहां मैंने देखा कि सिंध प्रांत में चिकित्सा व्यवस्था काफी खराब है और लोगों को मामूली बीमारियों के इलाज के लिए भी काफी भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिंध प्रांत के ग्रामीण इलाकों में लोगों को ना दवाइयां मिल पाती हैं और ना ही वहां पर इलाज के लिए डॉक्टर मौजूद होते हैं। अस्पताल में मरीजों की भर्ती के लिए बेड काफी कम होते हैं और बुनियादी सुविधाओं की भी काफी कमी होती है।

हिंदू आबादी के लिए बड़ी बात

हिंदू आबादी के लिए बड़ी बात

पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के साथ काफी भेदभाव किया जाता है और उच्च सरकारी पदों पर उनकी नियुक्ति नहीं दी जाती है। वहीं प्रशासनिक सेवाओं में भी हिंदुओं का चयन नहीं किया जाता है। इसीलिए 1947 में पाकिस्तान के भारत से अलग होने के बाद ये पहला मौका है, जब कोई हिंदू लड़की प्रशासनिक विभाग के लिए चुनी गई हैं।

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