दुनिया की सबसे 'दुर्लभ' नीलामी, रूसी पत्रकार ने नोबेल पुरस्कार बेचा, जानिए क्यों उठाया ऐसा कदम ?
न्यूयॉर्क (अमेरिका), 20 जून: रूसी पत्रकार दिमित्रि मुरातोव ने अपना नोबेल पुरस्कार नीलाम कर दिया है। उन्होंने पहले ही घोषणा कर रखी है कि नीलामी की रकम से मिलने वाली 5,00,000 डॉलर की राशि दान कर देंगे। यह रकम सीधे यूनिसेफ को मिलेगी, जो कि यूनाइटेड नेशन का बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय आपात फंड है। दिमित्रि मुरातोव को पिछले साल ही फ्री स्पीच पर उनकी पत्रकारिता के लिए शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह रूसी अखबार 'नोवाया गजट' के एडिटर इन चीफ थे, लेकिन पुतिन सरकार की कार्रवाई की वजह से इसी साल मार्च में उनके अखबार पर ताला लग चुका है।

क्या शांति की कोई कीमत हो सकती है?
क्या शांति की कोई कीमत हो सकती है? एक रूसी पत्रकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसमें इस सवाल का आंशिक रूप से जवाब खोजा जा सकता है। दरअसल, रूसी पत्रकार दिमित्रि मुरातोव ने अपने नोबेल शांति पुरस्कार को नीलामी पर चढ़ा दिया है। उन्हें 2021 के अक्टूबर में ही इसके तहत गोल्ड मेडल से पुरस्कृत किया गया था। उनकी मदद से रूस के स्वतंत्र अखबार 'नोवाया गजट' की स्थापना हुई थी और इस साल मार्च में उसपर ताला लगने तक वो इस अखबार के एडिटर-इन-चीफ हुआ करते थे। अखबार के खिलाफ यूक्रेन पर रूसी हमले के मद्देनजर सरकार की ओर से कार्रवाई हुई थी। तब पुतिन की सरकार की ओर से पत्रकारों और लोगों की नाराजगी को निशाना बनाया जा रहा था।

यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों के लिए नोबेल पुरस्कार की नीलामी
नोबेल पुरस्कार बेचने का फैसला मुरातोव का अपना है, जो पहले ही घोषणा कर चके हैं कि नीलामी में मिली रकम में से 5,00,000 डॉलर कैश दान में देंगे। लेकिन, रूसी पत्रकार ने जिनके लिए अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान नीलाम करने का फैसला किया है, वह कोई और नहीं, बल्कि यूक्रेन के वे बच्चे हैं, जो रूसी आक्रमण की वजह से अब शरणार्थी कहला रहे हैं। दिमित्रि मुरातोव ने कहा है, 'शरणार्थी बच्चों को भविष्य के लिए एक मौका देना है।'

'हम उनका भविष्य लौटाना चाहते हैं'
एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा है कि उन्हें विशेष रूप से उन बच्चों की चिंता है, जो यूक्रेन संकट की वजह से अनाथ हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'हम उनका भविष्य लौटाना चाहते हैं।' नीलामी की यह रकम सीधे यूनिसेफ को मिलेगी, जिससे यूक्रेन युद्ध में विस्थापित हुए बच्चों की सहायता की जाएगी। मुरातोव को फिलीपींस की पत्रकार मारिया रेसा के साथ पिछले साल अक्टूबर में साझा तौर पर नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। इसके तहत दोनों पत्रकारों को अलग-अलग मेडल दिए गए थे। इन दोनों को यह पुरस्कार अपने-अपने देशों में तमाम उत्पीड़नों, यहां तक की मौत की धमकियों के बावजूद बोलने की आजादी के लिए संघर्ष करने के चलते दिया गया है।

यूक्रेन के करीब 50 लाख नागरिक बन चुके हैं शरणार्थी
2014 में जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था, तब भी दिमित्रि मुरातोव ने अपनी सरकार के कदम के खिलाफ आवाज उठाई थी और फरवरी में यूक्रेन पर हमले के बाद भी उन्होंने इसकी नीतियों की आलोचना की थी। यूक्रेन पर रूसी हमले के चलते करीब 50 लाख यूक्रेनी नागरिक दूसरे देशों में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हुए हैं। इस संकट की वजह से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में सबसे बड़ा मानवीय संकट खड़ा हुआ है।

5,50,000 डॉलर से शुरू हुई बोली
पुतिन के सत्ता में आने के बाद से मुरातोव के साथ काम करने वाले कम से कम चार पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और अप्रैल में खुद इनपर भी एक रूसी ट्रेन में लाल पेंट फेंकी गई थी। गुरुवार को वह पश्चिमी यूरोप के लिए रूस से रवाना हुए थे, जहां से वह न्यूयॉर्क पहुंचे। यहीं पर उनके नोबेल पुरस्कार की बोली लग रही है। नीलामी की यह प्रक्रिया विश्व शरणार्थी दिवस पर आयोजित हुई है। सोमवार सुबह में इसकी सबसे ऊंची बोली 5,50,000 डॉलर लगी थी, जो कि संभत: कई मिलियन और आगे तक जा सकती है।

यह बहुत ही 'दुर्लभ' नीलामी है
हेरिटेज ऑक्शनंस के चीफ स्ट्रैटजी ऑफिसर जोशुआ बिनेश ने कहा कि 'यह बहुत पहले से तय किया गया सौदा है।' उनके मुताबिक, 'दुनिया में हर किसी के पास नीलामी के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं है.....' 1901 में इसकी शुरुआत होने के बाद से लगभग 1,000 लोगों को नोबेल पुरस्कार दिया गया है, जो भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, मेडिसीन, लिटरेचर और शांति के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के बदले दिए गए हैं।












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