भारत से मदद मांगने अपना स्पेशल दूत भेज रहे हैं व्लादिमीर पुतिन, क्या पीएम मोदी करेंगे दोस्त रूस की मदद?
भारत और रूस ने 30 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य पूरा करने का टारगेट 2025 रखा था, जिसे इसी साल पूरा कर लिया गया है। लिहाजा, अब नये व्यापारिक लक्ष्य तय किए जाएंगे।

Russia-India Tie: अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों से गुजर रहा रूस, आर्थिक मोर्चे पर परेशानियों का सामना कर रहा है, लिहाजा रूस का फोकस अब मुख्य तौर पर एशियाई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर है।
रूस खास तौर पर चीन और भारत के साथ अपने संबंधों को और बढ़ा रहा है, ताकि निवेश प्राप्त कर सके।
इसी कड़ी में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अपने डिप्टी प्रधानमंत्री को भारत के दौरे पर भेज रहे हैं, ताकि भारत को रूस में निवेश करने के लिए मना सकें।
भारत आ रहे रूसी उप-प्रधानमंत्री
मिन्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के इस महीने भारत आने की उम्मीद है। मिन्ट ने ये खबर मामले से परिचित अधिकारियों के हवाले से दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के उप-प्रधानमंत्री मंटुरोव व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC) की बैठक के लिए नई दिल्ली में आ सकते हैं। मंटोरोव, रूस में उद्योग और व्यापार मंत्री का पद भी संभालते हैं।
वहीं, IRIGC की सह-अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री और रूसी उप प्रधान मंत्री करते हैं।

व्लादिवोस्तोक में भारत के महावाणिज्य दूतावास के मुताबिक, ""IRIGC आर्थिक और व्यापार सहयोग, प्राथमिक निवेश, आधुनिकीकरण और औद्योगिक सहयोग (नागरिक उड्डयन, उर्वरक, खनन और आधुनिकीकरण पर उप-समूह), बकाया मुद्दों, ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता, पर्यटन और संस्कृति, विज्ञान पर कार्य समूहों से इनपुट को एकीकृत करता है"।
वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि के बीच अपने देश में भारतीय निर्यात और निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से अगले हफ्ते के अंत में चार दिनों के भारत तौरे पर आने वाले हैं।
उनके दौरे का मुख्य मकसद, भारत सरकार को रूस में निवेश के लिए मनाना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 17 और 18 अप्रैल को मंटुरोव की मुलाकात, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से होगी, इस दौरान दोनों नेताओं के बीत आर्थिक और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बैठक होगी। इससे पहले दोनों आखिरी बार नवंबर 2022 में मॉस्को में मिले थे और पिछले महीने वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भी दोनों नेताओं की बैठक हुई थी।
मंटुरोव की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने
मंटुरोव की आगामी यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच उस वक्त व्यापारिक बातचीत होगी, जब यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूसी तेल की खरीददारी भारी मात्रा में बढ़ा दी है।
साल 2020-21 में भारत और रूस के बीच का द्विपक्षीय व्यापार सिर्फ 8.1 अरब डॉलर का था, जो अब 30 अरब डॉलर को पार कर गया है। हालांकि, दोनों देशों ने इस 30 अरब डॉलर के व्यापार सीमा तक पहुंचने का लक्ष्य 2025 तक रखा था, जिसे पहले ही पूरा कर लिया गया है।
हालांकि, इस व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के बाद भी भारत की चिंता ये है, कि भारत ने ज्यादा सामान रूस से खरीदा है, लेकिन रूस की खरीददारी काफी कम रही है, लिहाजा भारत अपनी इस चिंता को रूसी मंत्री के सामने उठा सकता है। भारत अपनी चिंता को पहले भी उठा चुका है।
मंटुरोव की भारत यात्रा उस वक्त हो रही है, जब यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री एमिन दझापरोवा भी भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने यूक्रेन में शांति के लिए भारत से साथ देने की अपील की है।
एमिन दझापरोवा ने दिल्ली में कहा, कि "यूक्रेन भारत को रूस के साथ संबंधों को लेकर किसी तरह का निर्देश देने की स्थिति में नहीं है।" हालांकि, उन्होंने भारत को सलाह देते हुए कहा, कि "भारत को अपनी सैन्य और ऊर्जा निर्भरता के लिए दूसरे विकल्पों की तरफ देखना चाहिए, क्योंकि रूस भारत को ब्लैकमेल कर सकता है।"
यूक्रेन ने की पीएम मोदी की तारीफ
युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है, जब कोई यूक्रेनी मंत्री ने भारत का दौरा किया है। एमिन दझापरोवा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा, कि "पीएम मोदी का एससीओ सम्मेलन में दिया गया 'यह युद्ध का युग नहीं है' बयान काफी महत्वपूर्ण था, जिसे अमल में लाना काफी जरूरी है।"

आपको बता दें, कि युद्ध शुरू होने के बाद से पीएम मोदी यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति पुतिन से कई बार टेलीफोन पर बात कर चुके हैं।
पीएम मोदी ने पिछले साल उज्बेकिस्तान के समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय बैठक की थी और उसी दौरान उन्होंने कहा था, कि 'आज का युग युद्ध का युग नहीं है', जिसकी पश्चिमी मीडिया ने काफी तारीफ की थी और जिसे बाली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन की नीति में शामिल किया गया था।












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