रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए किसने रखी 7 शर्तें, पुतिन-ट्रंप की मुलाकात अलास्का में ही क्यों?

रूस-यूक्रेन युद्ध फिर चर्चा में है। क्या बीते लगभग साढ़े 3 साल से जारी युद्ध अब खत्म होने वाला है? क्या संकेत मिल रहे हैं कि यूक्रेन पीछे हट गया? राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हार मान ली या फिर रूस अमेरिका के साथ मिलकर रणनीतिक जीत के लिए कोई नई चाल चल रहा है? इन सब सवालों के जवाब 15 अगस्त 2025 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के बाद मिल सकते हैं।

Russia-Ukraine war

अब पूरी दुनिया की नजरें 15 अगस्त 2025 को अलास्का में होने वाली ट्रंप-पुतिन की बैठक पर टिकी है, क्योंकि इस बैठक से रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीद है। इस शांति वार्ता से पहले युद्ध रोकने के बदले रूस की कई शर्तें सामने आई हैं। साथ ही वार्ता में यूक्रेन को शामिल नहीं करने से इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति स्थापित होने का रास्ता आसान नहीं लग रहा।

रूस की सात शर्तें

1. रूस यह भी चाहता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त होने के बाद इंटरनेशनल न्यायालय में उसे अभियोजन में छूट मिलनी चाहिए। उसके खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन या मुआवजे का दावा और युद्ध अपराध का दावा नहीं हो।

2. रूस ने यह शर्त भी रखी है कि युद्ध समाप्ति के बाद यूक्रेन की सैन्य ताकत नहीं बढ़े। इस शर्त से रूस चाहता है कि यूक्रेन भारी हथियार, लंबी दूरी तक मार करने वालीं मिसाइल व एयर डिफेंस सिस्टम नहीं खरीदे और अपनी सैन्य क्षमता भी सीमित करें। यूक्रेन पर इंटरनेशनल निगरानी भी हो।

3. रूस अपने दुश्मन देश यूक्रेन से हर संभावित खतरे को शर्तों में बांध रहा है। रूस चाहता है कि जंग खत्म होने के बाद यूक्रेन की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और कानून व्यवस्था रूस के अनुरूप हो ताकि यूक्रेन भविष्य में उसके लिए किसी भी तरह का खतरा पैदा नहीं कर सके।

4. रूस का कहना है कि जिस NATO के विस्तार की वजह से रूस-यूक्रेन की बीच युद्ध शुरू हुआ। उसको लेकर भी रूस ने शर्त रखी है। कहा है कि यूक्रेन नाटो व किसी भी पश्चिमी देशों के साथ सैन्य गठबंधन से हमेशा दूर रहे। यूक्रेन की जमीन का इस्तेमाल भविष्य में कभी भी नाटो के बेस व मिसाइल सिस्टम के लिए ना हो।

5. यूक्रेन में बड़ी संख्या में रूसी भाषा बोलने वालों की भी है। उनके लिए रूस ने जंग रोकने के बदले शर्त रखी है कि यूक्रेन में रूसी बोलने वालों के अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

6. रूस ने यूक्रेन के पांच बड़े इलाकों लुहान्सक, जापोरिज्जिया, खेरसॉन, क्रीमिया और डोनटस्क पर कब्जा जमा रखा है। क्षेत्रफल के लिहाज से ये पांचों जगह यूक्रेन के कुल क्षेत्रफल का 22 फीसदी है। अब रूस चाहता है कि उनके कब्जे वाले क्षेत्रों को इंटरनेशनल मान्यता मिलनी चाहिए।

7. रूस की सातवीं और आखिरी शर्त यह है कि पश्चिमी देश उस पर लगाए सभी आर्थिक, राजनीतिक प्रतिबंध हटाए। फ्रीज किए गए 25 लाख करोड़ के रूसी सॉवरेन फंड व संपत्तियां लौटाई जाए।

ट्रंप-पुतिन 7 साल बाद आमने-सामने

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच आखिरी बैठक जुलाई 2018 में फिनलैंड के हेलसिंकी में हुई थी। अब दोनों राष्ट्राध्यक्ष सात साल बाद फिर एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे। 15 अगस्त 2025 को ट्रंप-पुतिन की बैठक के लिए आर्कटिक और प्रशांत महासागर के बीच अलास्का को चुना गया है।

ट्रंप-पुतिन की बैठक अलास्का में ही क्यों?

  • अलास्का कभी रूस का ही हिस्सा हुआ करता था। साल 1867 में रूस ने 7.2 मिलियन डॉलर (करीब 60 करोड़ रुपए) में अमेरिका को बेच दिया था। अलास्का का अब अमेरिका की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है जबकि अलास्का रूस के सैन्य ठिकानों से महज 88 किलोमीटर दूर है। इसलिए पुतिन के लिए अलास्का पहुंचना ज्यादा सुविधाजनक है।
  • खास बात यह है कि यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) का अरेस्ट वारंट है, लेकिन अमेरिका आईसीसी का सदस्य नहीं होने के कारण अमेरिका में पुतिन की गिरफ्तारी का कोई कानूनी दायित्व नहीं होगा।
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