अपने बच्चों को बेबस पिता ने अंजान महिला को सौंपा, सीमा पार कर मां से मिले बच्चे फूट-फूटकर रोए
कीव, 27 फरवरी। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में कई भावुक कहानियां सामने आ रही हैं। जिस तरह से इस युद्ध में महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक घरों से बेघर हो गए और अपनो को उन्होंने खो दिया, उनकी कहानियां दिल को चीर देने वाली हैं। युद्धकाल में लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे है फिर वह चाहे उन्हें जानते हैं या नहीं। इसी तरह की एक और भावुक कहानी सामने आई है जहां पर एक अजनबी महिला ने एक बच्चे का खयाल अपने बच्चे की तरह रखा जिसे वह जानती भी नहीं थी।

दो अनजान बच्चों को लेकर पहुंची हंगरी
नतालिया एब्लियेवा जोकि यूक्रेन का बॉर्डर पार करके शनिवार को हंगरी पहुंची हैं। यहां पर 38 साल का एक व्यक्ति अपने दो बच्चों के साथ इस मुश्किल दौर का सामना कर रहा था। लेकिन यूक्रेन की सेना दोनों बच्चों के पिता को सीम पार नहीं करने दे रही थी। जिसके बाद यह महिला इन बच्चों को अपने साथ लेकर हंगरी पहुंची। दरअसल यूक्रेन की सेना ने नियम बनाया है कि 18-60 साल के लोग यूक्रेन से बाहर नहीं जा सकते हैं, उन्हें रूसी सेना के खिलाफ अपने देश के लिए लड़ने के लिए कहा गया है।

पिता ने मुझपर किया भरोसा
नतालिया बताती हैं कि इन बच्चों के पिता ने मुझे अपने दोनों बच्चों को सौंपा और मुझपर भरोसा किया, मुझे उनका पासपोर्ट दिया और उन्हें ले जाने को कहा। मैं उन बच्चों से पहले कभी नहीं मिली। बच्चों के पिता ने कहा कि इनकी मां इटली में हैं और वह आपसे वहां मिलेगी। इनके पिता ने बच्चों की मां का फोन नंबर मुझे दिया है। अपने दोनों बच्चों को अंजान महिला के हाथो सौंपकर उन्होंने उन्हें अलविदा कहा।

अंजान महिला बनीं सहारा
जिसके बाद नतालिया इन दोनों बच्चों को लेकर हंगरी पहुंची। नतालिया दोनों बच्चों का हाथ पकड़ उन्हें सीमा पार ले गईं। हंगरी पहुंचने के बाद ये लोग यहां शरणार्थियों के लिए बने कैंप के पास बेंच पर बैठ गए और सीमा पार से आ रहे लोगों को बेबस निगाहों से धीरे-धीरे आते देख रहे हैं। इस दौरान जब एक बच्चे का फोन बजा और उसकी मां ने उन्हें फोन किया तो उसकी आंख से आंसू छलक गए। बच्चों की मां हंगरी बॉर्डर के पास ही थीं। जब दोनों बच्चों की मां एना सेम्युक वहां पहुंची तो उन्होंने अपने बच्चों को गले लगा लिया।

मां ने महिला को गले लगाकर कहा शुक्रिया
बच्चों की मां एना ने नतालिया का शुक्रिया अदा किया। जिस तरह से इस कड़ाके की ठंड में वह उनका इंतजार करती रहीं उसके लिए उन्होंने उनका शुक्रिया अदा किया और दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया। दोनों इस भावुक क्षण में एक दूसरे को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। एना ने कहा कि मैं अपने बच्चों से सिर्फ यही कह सकती हूं कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। एक या दो हफ्तों में हम फिर से घर जाएंगे।












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