क्या पुतिन का हश्र रोमन सम्राट जूलियस सीजर जैसा होगा ?

मास्को, 09 मार्च। क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हश्र रोमन सम्राट जूलियस सीजर जैसा होगा ? ईसा पूर्व 44 में रोमन सम्राट जूलियस सीजर को सीनेट की बैठक में उनके अपने ही लोगों मे मार डाला था। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर माइकल क्लार्क ने लिखा है, पुतिन, जूलियस सीजर जैसी परिस्थितियों में फंस गये हैं।

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हो सकता है कि कोई करीबी कुलीन (ओलिगार्क) जूलियस सीजर की तरह उन्हें खंजर घोंप दे। पुतिन की नीतियों से उनके नजदीकी कुलीन थक गये हैं। इसलिए उनका पुतिन के प्रति समर्थन लगातार कम हो रहा है।

पुतिन से दूर हो रहा कुलीनवर्ग

पुतिन से दूर हो रहा कुलीनवर्ग

पुतिन ने अपने करीबी कुलीन दोस्तों को भरोसा दिलाया था कि यूक्रेन पर हमले का मकसद 72 घंटों में पूरा हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस नाकामी के कारण वे पुतिन से दूर जा रहे हैं। पुतिन की आंतरकि मित्र मंडली (ओलिगार्क) में से कुछ को अपमान झेलना पड़ रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण जो अंतर्राष्ट्रीय परिस्थतियां पैदा हुई हैं उसकी वजह से इन कुलीनों की बेशुमार दौलत खतरे में पड़ गयी है। ओलिगार्क यानी कुलीनवर्ग अपनी दौलत की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। रूस के करीब 200 कुलीन, (ओलिगार्क) पुतिन और उनके पूर्ववर्ती शासकों के वफादार रहे हैं। वह इसलिए क्यों कि उन्होंने रूसी शासकों की मिलीभगत से ही ये पैसा भ्रष्ट तरीके से कमाया है। लेकिन अब इन कुलीनों की वफादरी संदिग्ध हो गयी है।

ये ओलिगार्क क्या है ?

ये ओलिगार्क क्या है ?

ओलिगार्की शब्द ग्रीक भाषा से निकला है। इसका अर्थ होता है कुछ लोगों का शासन। इन्ही कुछ लोगों को ओलिगार्क या कुलीनवर्ग कहा जाता है। यह कुलीनवर्ग नवधनाढ्य होता है और अपने हितों (धन का उपार्जन) के लिए शासन का संचालन करता है। इस शासन व्यवस्था को अल्पतंत्र (ओलिगार्की) कहा जाता है। इसमें शासन की शक्ति कुछ धनवान और अभिजात्य लोगों के हाथों में होती है। इस शासन में जनहित की कोई अहमियत नहीं होती। यह राजतंत्र और लोकतंत्र से बिल्कुल अलग है। लेकिन रूस के संदर्भ में ओलिगार्क शब्द का प्रयोग थोड़ा अलग है। 1991 में जब सोवियत संघ का पतन हुआ था तब रूस की शासन व्यवस्था दुविधा के दोराहे पर खड़ी थी। साम्यवादी शासन के खात्मे के बाद कौन सी शासन प्रणाली को अपनाया जाया ? सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाचेव ने 25 दिसम्बर 1991 को इस्तीफा देकर सत्ता बोरिस येल्तसिन को सौंप दी थी। साम्यवादी शासन में किसी के पास निजी सम्पत्ति नहीं थी और न इसकी गुंजाइश थी। लेकिन 1991 के बाद रूस पूंजीवाद की तरफ बढ़ा। कल-कारखानों, तेल उत्पादन संयंत्रों, खनन इकाइयों और अन्य वित्तीय संस्थानों का निजीकरण हुआ। नयी सरकार के सहयोग से कुछ लोगों ने इसका फायदा उठाया और देखते देखते अमीर हो गये। चूंकि इन नवधनाढ्य लोगों ने येल्तसिन की मदद से पैसा कमाया था। इसलिए ये योल्तसिन के साथ खड़े हो गये।

रूस के ओलिगार्क

रूस के ओलिगार्क

उन्होंने 1996 के चुनाव में येल्तसिन की पैसों से मदद की। फिर ये नवधनाढ्य लोग सत्ता के वास्तिवक संचालक बन गये और येल्तसिन इनकी कठपुतली। इन्हीं धनिकवर्ग को ओलिगार्क (कुलीन) कहा गया। जब पुतिन सत्ता में आये तो उन्होंने धीरे-धीरे कुलीनों की ताकत कम की और सत्ता पर नियंत्रण स्थापित किया। येल्तसिन के जमाने के कुछ ओलिगार्क रूस छोड़ कर लंदन चले गये। पुतिन ने पहले के कुलीनों को तो बेबस कर दिया लेकिन जल्द ही एक नये वर्ग का जन्म हो गया। पुतिन के कुछ करीबी दोस्तों ने सरकार में प्रभाव स्थापित कर लिया। वे राष्ट्रपति की दोस्ती के दम पर दौलत खड़ा करने लगे। कोई उनके बचपन का मित्र था तो कोई साथ में जुडो खेलने वाला सहयोगी। एक नया कुलीनतंत्र विकसित हो गया जो पुतिन के प्रति वफादार था। इनकी मदद से पुतिन निरंकुश शासक बनते चले गये।

पुतिन और जूलियस सीजर

पुतिन और जूलियस सीजर

लेकिन यूक्रेन युद्ध ने रूस के कुलीनवर्ग को विचलित कर दिया है। उनके लिए दौलत, पुतिन की वफादारी से अधिक महत्वपूर्ण है। चूंकि अब वे पुतिन के खिलाफ हो रहे हैं। इसलिए पुतिन की सत्ता को सुरक्षित नहीं माना जा रहा। इसी आधार पर प्रोफेसर क्लार्क ने पुतिन की स्थिति को जुलियस सीजर से मिलता जुलता बताया है। सीजर की तरह पुतिन ने भी खुद को आजीवन शासक (राष्ट्रपति) घोषित करा लिया है। रोमन सम्राट जूलियस सीजन ने ईसा पूर्व 44 में खुद को आजीवन शासक घोषित कर दिया था। वह महान सेनापति और विजेता था लेकिन बाद में उसकी प्रवृति तानाशाह जैसी हो गयी। उस समय रोम में गणतंत्र था जिसका नियंत्रण सीनेट के कुलीनवर्ग ( सेनेटोरियल ओलिगार्क) के पास था। जूलियस सीजर के आजीवन शासक बनने के मतलब था गणतंत्र और ओलिगार्क का खात्मा। जूलियस सीजर ने सीनेट की आपातकालीन बैठक बुलायी ताकि वह खुद को सत्ता का स्वामी बता सके। सीनेट की बैठक जैसे ही शुरू हुई अचानक उसके अपने ही लोगों ने उस पर हमला बोल दिया। खंजर भोंक कर उसकी हत्या कर दी गयी। हमला करने वालों ने कहा, हमने गणतंत्र को बचाने के लिए एक तानाशाह पर कार्रवाई की। तानाशाही ही सीजर की मौत कारण बनी थी।

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