ईरान की मदद के लिए रूस ने लिया बड़ा फैसला, टेंशन में इजरायल-अमेरिका
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को एडवांस सैटेलाइट देने के लिए रूस तैयार हो गया है और इस सैटेलाइट की मदद से मध्य-पूर्व के देशों में संभावित सैन्य ठिकानों को ट्रैक किया जा सकेगा।
तेहरान/मॉस्को, जून 11: रूस ने ईरान की बड़ी मदद का ऐलान कर इजरायल और अमेरिका को बहुत बड़ी चिंता में डाल दिया है। रूस ने ईरान को एडवांस सैटेलाइट देने की तैयारी शुरू कर दी है, जो इजरायल के लिए बहुत बड़ी टेंशन की बात है। इजरायल और ईरान, कभी भी एक दूसरे पर हमला करने से बाज नहीं आते हैं और अकसर इजरायल, ईरान के मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाता रहता है। पिछले दिनों भी इजरायल ने ईरान के उस गुप्त ठिकाने को मिसाइल अटैक से उड़ा दिया था, जिसके बारे में कहा गया था कि ईरान वहां न्यूक्लियर हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है। इजरायल ने साफ तौर पर कह रखा है कि वो किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने देगा, लेकिन अब जबकि रूस ने ईरान को एडवांस सैटेलाइट देने की तैयारी शुरू कर दी है तो फिर इजरायल के आक्रामक रवैये पर लगाम लगना तय माना जा रहा है।

एडवांस सैटेलाइट का करार
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को एडवांस सैटेलाइट देने के लिए रूस तैयार हो गया है और इस सैटेलाइट की मदद से मध्य-पूर्व के देशों में संभावित सैन्य ठिकानों को ट्रैक किया जा सकेगा। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक रूस जो सैटेलाइट ईरान को सोंपेगा, उसमें हाई रिजोल्यूशन कैमरे से लैस रूस निर्मित कनोपस-वी लगे हैं। रूस अगले कुछ महीनों में इस सैटेलाइट को लॉन्च कर उसे ईरान के हवाले कर देगा। रूस का ये फैसला निश्चित तौर पर इजरायल के लिए बहुत बड़ा झटका है और हमास, जिसे इजरायल एक आतंकी संगठन कहता है, उसे बहुत बड़ा फायदा पहुंचेगा।

अमेरिका-रूस में बातचीत
एक तरफ ईरान और रूस के बीच सैटेलाइट करार होने जा रहा है वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात जिनेवा में होने वाली है। लेकिन उससे पहले रूस का ईरान को सैटेलाइट देने का ऐलान, माना जा रहा है कि अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच भी 2015 परमाणु समझौते पर बातचीत होने वाली है, जिसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया था और ईरान के ऊपर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। जिससे ईरान की अर्थव्यव्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है। लेकिन अगर फिर से जो ईरान और अमेरिका के बीत 2015 न्यूक्लियर एग्रीमेंट पर समझौता हो जाता है तो फिर अमेरिका, ईरान के ऊपर से प्रतिबंध हटा लेगा।

सैटेलाइट से ईरान को फायदा
ईरान को रूसी सैटेलाइट मिलने से काफी ज्यादा फायदा होगा। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस सैटेलाइट के जरिए ईरान, फारस की खाड़ी की तेल कंपनियों, इजरायली सैन्य ठिकानों और इराक के बैरकों पर लगातार नजर रख सकता है, जहां अमेरिका के सैनिक रहते हैं। तीन गुप्त सूत्रों के हवाले से वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि ईरान बहुत जल्द रूस से सैटेलाइट खरीद लेगा। वॉशिंगटन पोस्ट के ये तीन गुप्त सूत्रों में से एक अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी, एक वर्तमान सैन्य अधिकारी और एक वरिष्ठ अधिकारी ईरान सरकार के हैं। हालांकि, रूसी सैटेलाइट, जिसका नाम कनोपस-वी है, वो एक नागरिक सैटेलाइट है लेकिन इसका इस्तेमाल कई खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के नेता और ईरान की सेना, जिसका नाम इस्लामिक रिवोल्यूशरी गार्ड कॉर्प्स है, उसके अधिकारी लगातार 2018 से रूस के दौरे कर रहे हैं, ताकि सैटेलाइट को लेकर करार किया जाए।

ईरानी सेना को ट्रेनिंग
वहीं, रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रूस के कई विशेषज्ञों ने पिछले दिनों ईरान की यात्रा की थी और इस दौरान तेहरान के पश्चिम में कारज के पास एक नवनिर्मित सेंटर से सैटेलाइट का संचालन को लेकर ईरानी अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने अपने सैटेलाइट में काफी हाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया हुआ है और इसमें एडवांस हार्डवेयर का भी इस्तेमाल किया गया है। सैटेलाइट में 1.2 मीटर का हाई रिजोल्यूशन कैमरा लगा हुआ है, जिससे किसी भी सैन्य ठिकाने पर सटीक नजर रखी जा सके। इस सैटेलाइट को हासिल करने से ईरान को काफी मदद मिलेगा। हालांकि, इस सैटेलाइट मे इतनी क्षमता नहीं है कि वो अमेरिका या रूस के सैन्य ठिकानों का पता लगा ले या जासूसी कर सके। मगर, इजरायल के हर ठिकाने पर बेहतरीन नजर रखी जा सकेगी।

टेंशन में इजरायल
रूस और ईरान के बीच हुए इस करार ने इजरायल की टेंशन को जरूर बढ़ा दिया है। इजरायल मानता है कि उसके खिलाफ जो भी क्षेत्रीय चरमपंथी गुट सक्रिय हैं, उन्हें ईरान की तरफ से मदद दी जाती है। वहीं, हमास को ईरान मदद देता है, इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। ईरान की मदद से ही हमास रॉकेट बनाता है, जिससे वो इजरायल पर हमला करता है। हमास की मदद के लिए ईरान उसे उपकरण के साथ साथ मिलिट्री और आर्थिक मदद भी देता है। ऐसे में ईरान ने अगर अपने नये सैटेलाइट की मदद से हमास को इजरायली गुप्त सैन्य ठिकानों की जानकारी देनी शुरू कर दी, तो फिर हमास, इजरायल के लिए काफी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।












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