अमेरिका को न्यूक्लियर हथियारों की जानकारी नहीं देगा रूस, पुतिन ने दशकों पुरानी डील तोड़ी, क्या हैं मायने?

अमेरिका और रूस के बीच स्टार्ट समझौता शीत युद्ध खत्म होने के बाद किया गया था, जिसे साल 2010 में अपडेट किया गया था। इस समझौते का मकसद परमाणु हथियारों की संख्या में कमी लाना था।

Russia-US Nuclear Information

Russia-US Nuclear Information: रूस ने दशकों पुराने समझौते को तोड़ते हुए अब अपने मिसाइल परीक्षणों की जानकारी अमेरिका को नहीं देने का फैसला किया है। रूस के एक वरिष्ठ डिप्लोमेट ने कहा है, कि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की सेना ने परमाणु हथियारों के साथ युद्ध की तैयारी का अभ्यास शुरू कर दिया है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने रूसी समाचार एजेंसियों को दिए गये एक बयान में कहा है, कि मॉस्को ने अमेरिका के साथ पिछले परमाणु हथियार समझौते में अपनी भागीदारी को निलंबित करने का फैसला किया है और अब मॉस्को ने वाशिंगटन के साथ न्यूक्लियर हथियारों को लेकर सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोक दिया है। आपको बता दें, कि पिछले कई दशकों से अमेरिका और रूस, एक दूसरे के साथ हर न्यूक्लियर और मिसाइल परीक्षणों की एडवांस जानकारी साझा करते थे। इसके साथ ही, दोनों देश एक दूसरे को हर साल जानकारी देते थे, कि उनके पास कितने न्यूक्लियर हथियार हैं।

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न्यूक्लियर समझौता टूटने के मायने

अमेरिका और रूस के बीच का न्यूक्लियर समझौता, दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक स्थिरता दे रहा था, क्योंकि इससे एक दूसरे के प्रति अविश्वास का माहौल नहीं बनता था। इसके साथ ही, दोनों देशों को एक दूसरे के परमाणु हथियार भंडार को लेकर सही व्याख्या करने में मदद मिलकी थी। इस डील के एक्टिव होने से किसी भी देश को मिसाइल परीक्षण को लेकर गलत जानकारियों से बचने में मदद मिलती थी। लेकिन, अब रूस अपने मिसाइल परीक्षण की जानकारी अमेरिका से साझा नहीं करेगा। इसका मतलब ये होता है, कि यूक्रेन को लेकर अमेरका और रूस के बीच निजी दुश्मनी बढ़ती जा रही है और इसका गंभीर असर देखने को मिलेगा। रूस ने अमेरिका को अपने परमाणु हथियारों की जानकारी रोकने का उस वक्त फैसला किया है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सामरिक सहयोगी देश, बेलारूस में अपने न्यूक्लियर हथियारों की तैनाती के आदेश दिए थे। इसके साथ ही रूस ने अपने यार्स इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) प्रणाली की बेलारूस में तैनाती का फैसला किया है।

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पुतिन ने START संधि को किया सस्पेंड

पिछले महीने, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई START संधि को निलंबित कर दिया है और उन्होंने अपने इस फैसके के पीछे यह आरोप लगाया है, कि रूस समझौते के तहत अपने परमाणु स्थलों के अमेरिकी निरीक्षण को ऐसे समय में स्वीकार नहीं कर सकता है, जब वाशिंगटन और उसके नाटो सहयोगियों ने खुले तौर पर यूक्रेन में रूस की हार को अपना लक्ष्य घोषित किया है। मॉस्को ने इस बात पर जोर दिया है, कि वह पूरी तरह से समझौते से पीछे नहीं हट रहा है, और संधि द्वारा निर्धारित परमाणु हथियारों की सीमा का सम्मान करना अभी भी जारी रखेगा। यानि, रूस ने परमाणु हथियारों के निर्माण की सीमा रेखा को नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। आपको बता दें, कि रूस और अमेरिका के बीच एक संधि है, जिसके तहत दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या में भारी कमी की है और दोनों ने तय किया हुआ है, कि एक सीमा रेखा से ज्यादा परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं किया जाएगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुरू में कहा था, कि मास्को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के नियोजित परीक्षण लॉन्च के बारे में यू.एस. को सूचित करेगा, लेकिन अब रूस ने ऐसा नहीं करने का फैसला किया है।

'अमेरिका को नहीं दी जाएगी कोई भी जानकारी'

रूसी डिप्लोमेट रयाबकोव ने रूसी समाचार एजेंसियों को कहा है, कि 'बिल्कुल भी कोई सूचना नहीं दी जाएगी।' उनसे पूछा गया था, कि क्या मास्को योजनाबद्ध मिसाइल परीक्षणों के बारे में नोटिस जारी करना बंद कर देगा? उन्होंने कहा, कि 'सभी अधिसूचनाएं, सभी प्रकार की अधिसूचनाएं, संधि के तहत सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया जाएगा और ये इस बात पर निर्भर करेगा, कि अमेरिका की आगे क्या स्थिति होती है"। वहीं, व्हाइट हाउस के अधिकारियों, पेंटागन और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने कहा है, कि "रूस द्वारा START समझौतो को सस्पेंड किए जाने के बाद भी अमेरिका ने अपने परमाणु हथियारों से संबंधित जानकारियां रूस के साथ साझा करने की पेशकश की थी, लेकिन मॉस्को ने वाशिंगटन को सूचित किया है, कि वह अपना डेटा साझा नहीं करेगा।

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    क्या है US-रूस का START समझौता?

    आपको बता दें, कि न्यू START समझौता साल 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच किया गया था। इस समझौते के तहत दोनों देश 1550 न्यूक्लियर हथियार और 700 मिसाइलों और बमवर्षक रखने के लिए तैयार हुए थे। इस समझौते के तहत, इस संख्या से ज्यादा हथियार ये दोनों देश नहीं रख सकते थे। इस समझौते में तय किया गया था, हर मिसाइल परीक्षण से पहले इसकी एडवांस जानकारी, दोनों देश एक दूसरे के साथ साझा करेंगें। हालांकि, COVID-19 महामारी के कारण 2020 से निरीक्षणों को रोक दिया गया है। उन्हें फिर से शुरू करने पर चर्चा नवंबर 2022 में होने वाली थी, लेकिन यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन का हवाला देते हुए रूस ने इस समझौतो को रोकने का फैसला किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है, कि बुधवार से शुरू हुए रूसी अभ्यास के तहत यार्स मोबाइल मिसाइल लांचर साइबेरिया के तीन क्षेत्रों में युद्धाभ्यास करेंगे। आपको बता दें, कि यार्स एक परमाणु-चालित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 7,500 मील है। यह रूस की रणनीतिक मिसाइल बलों की रीढ़ है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्धाभ्यास में पूर्वी साइबेरिया में लगभग 300 वाहन और 3,000 सैनिक शामिल हैं।

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