Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

रूसी यूरेनियम की पहली खेप पहुंची बांग्लादेश, बाइडेन और शेख हसीना की तनातनी का पुतिन ने कैसे उठाया फायदा?

अमेरिका संग तनातनी की खबरों के बीच बांग्लादेश में रूस की सहायता से निर्मित एकमात्र परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की पहली खेप बृहस्पतिवार को पहुंची। इसके साथ ही बांग्लादेश अब परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए यूरेनियम हासिल करने वाला दुनिया का 33वां देश बन गया है।

यूरेनियम की ये खेप सितंबर आखिर में बांग्लादेश पहुंची। इस दौरान धूमधाम से एक समारोह भी मनाया गया। इस कार्यक्रम में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक वीडियो लिंक से शामिल हुए।

Bangladesh first uranium shipment from Russia

यूरेनियम की खेप पहुंचने पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि देश परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए करेगा। वही, पुतिन ने बांग्लादेश को यूरेनियम सप्लाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि बांग्लादेश लंबे समय से हमारा मित्र और सहयोगी है।

आपको बता दें कि बांग्लादेश के रूपपुर में 2,400 मेगावॉट क्षमता वाला परमाणु बिजलीघर बनाया जा रहा है। 12.65 अरब डॉलर की इस परियोजना की 90 फीसदी फंडिंग रूस कर रहा है। शर्तों के मुताबिक, बांग्लादेश इस कर्ज को 10 साल की छूट अवधि के साथ 28 वर्षों में रूस को चुकाएगा।

बांग्लादेश को परमाणु ईंधन की आपूर्ति ऐसे समय हुई है, जब यूक्रेन युद्ध जारी है और रूसी कंपनियों पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है। रूस पर लगे प्रतिबंधों की वजह से परियोजना में देरी हुई लेकिन अब उम्मीद है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी।

आपको बता दें कि बांग्लादेश को अमेरिकी खेमे का माना जाता रहा है। अमेरिका बांग्लादेश को एक अहम रणनीतिक सैन्य सहयोगी मानता रहा है और 1972 से ही रक्षा सहयोग में उसे भारत के साथ साझीदार के रूप में देखता रहा है।

यूक्रेन युद्ध के दौरान भी बांग्लादेश ने यूक्रेन का समर्थन किया है। हालांकि बांग्लादेश की दोस्ती चीन और रूस से भी रही है। लेकिन इस बीच अमेरिका के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के कई बिंदु उभरे हैं।

मानवाधिकार और लोकतांत्र जैसे मुद्दों को लेकर अमेरिका ने बांग्लादेश सरकार की आलोचना की है। पिछले साल अमेरिका ने मानवाधिकार और लोकतंत्र के मुद्दे पर बांग्लादेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा। अब इसका फायदा अब चीन और रूस उठाना रहे हैं।

2008 से सत्ता में मौजूद हसीना और उनकी सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। हालांकि विपक्ष उन पर दमनात्मक रणनीति का आरोप लगा रहा है। विपक्ष ने आशंका जताई है कि चुनाव निष्पक्ष या पारदर्शी नहीं होंगे। हालांकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

इस मुद्दे में अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां शामिल हो गई हैं, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने हसीना की सरकार पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ देश में बढ़ती मानवाधिकार चिंताओं को संबोधित करने के लिए दबाव डाला है। दूसरी ओर, रूस, बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में पश्चिम के "हस्तक्षेप" की आलोचना करते हुए मौजूदा सरकार का समर्थन कर रही है।

आपको बता दें कि बांग्लादेश ने हाल ही में रूस को कपड़ों का निर्यात शुरू किया था, हालांकि मॉस्को पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह बाधित हो गया था। रूस लंबे समय से बांग्लादेश पर नजरें टिकाए हुए है। जैसे ही अमेरिका से ढाका के रिश्तों में थोड़ी तल्खी आई रूस ने आग बढ़कर बांग्लादेश की मदद करने का फैसला कर लिया।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+