यूक्रेन युद्ध के अंत की हुई शुरूआत, जेलेंस्की के हाथ में बाइडेन देंगे ‘ब्रह्मास्त्र’, अब क्या करेंगे पुतिन?
रूस ने अपने 190 बटालियल टेक्टिकल ग्रुप्स यानि बीटीजी में से 110 को यूक्रेन युद्ध में उतार दिया था और इन सैनिकों का लक्ष्य उस क्षेत्र को यूक्रेन से पूरी तरह से अलग करना, जिसे यूक्रेनियन सेना ‘संयुक्त सेना ऑपरेशन’ कहते हैं
कीव/मॉस्को, जून 01: रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जब सैन्य अभियान शुरू किया था, तो उनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा दो हफ्तों के अंदर यूक्रेन को जीतकर वापस आने का था। लेकिन, रूस यूक्रेन की जमीन पर लड़ाई में ऐसा उलझा, कि चौथे महीने की शुरूआत होने के बाद भी पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है, कि यूक्रेन संकट आखिरकार कब खत्म होगा। हालांकि, अब कुछ कुछ संकेत मिलने लगे हैं, कि अगर रूस का डोनबास ऑपरेशन कामयाब हो जाए, तो यूक्रेन युद्ध के अंत की शुरूआत यहां से हो सकती है।

डोनबास से युद्ध के अंत की शुरूआत
सैनिकों की शक्ति के हिसाब से देखें, तो रूस ने अपने 190 बटालियल टेक्टिकल ग्रुप्स यानि बीटीजी में से 110 को यूक्रेन युद्ध में उतार दिया था और इन सैनिकों का लक्ष्य उस क्षेत्र को यूक्रेन से पूरी तरह से अलग करना, जिसे यूक्रेनियन सेना 'संयुक्त सेना ऑपरेशन' कहते हैं, और जिस क्षेत्र को पूरी दुनिया डोनबास के नाम से जानती है। रूसी सैनिकों का इरादा डोनबास में यूक्रेनी सेना को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर देने की है, हालांकि, रूसी सेना का ऑपरेशन का धीमा चला है और इस ऑपरेशन में रूस को भारी नुकसान भी हुआ है। हालांकि, अब तक रूस की सफलता को देखें, तो 27 मई को लंबे समय के संघर्ष के बाद लाइमैन शहर रूस के कंट्रोल में चला गया और लिसीचांस्क के सेवेरोडोनेट्स्क और उसके जुड़वां शहर (एक नदी के पार) पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लड़ाई चल रही है। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों से रूस को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है, लेकिन कुछ कुछ जगहों पर नियंत्रण स्थापित हुआ है।

कैसी चल रही है रूस की लड़ाई?
रूस सैनिकों की लड़ाई कोई चालाकी भरी नहीं है और ना ही अब उम्मीद भरी है, बल्कि रूसी सैनिक तोपखानों से गोलों की बरसात करते हैं, ट्रेंच सिस्मट के जरिए इमारतों पर बमबारी करते हैं और फिर सड़कों पर लड़ाई लड़ते हैं। लेकिन, रूसी सैनिकों को अत्यधिक विनाशकारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और उसके काफी सैनिक मारे गये हैं। कई रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावे किए गये हैं, कि अफगानिस्तान में 10 सालों की लड़ाई में जितने रूसी सैनिक मारे गये थे, उससे ज्यादा रूसी सैनिक 24 फरवरी के बाद यूक्रेन में मारे गये हैं। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावे किए गये हैं, कि अब तक यूक्रेन में 40 हजार रूसी सैनिक घायल होकर या अपनी जान देकर युद्ध से अलग हो चुके हैं।

रूसी सैन्य उपकरण को भी भारी नुकसान
यूक्रेन युद्ध को लेकर कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि रूसी सेना को इतना नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई करने में उसे कई दशक लग जाएंगे एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध में रूस के कम से कम 736 टैंक, 1,200 से अधिक बख्तरबंद लड़ाकू वाहन और पैदल सेना से लड़ने वाले वाहन बर्बाद हो चुके हैं। इसके साथ ही 27 लड़ाकू विमान और कम से कम 42 हेलीकॉप्टर भी ध्वस्त हो चुके हैं। खासकर टैंक और बख्तरबंद वाहनों की सबसे ज्यादा बर्बादी होने की संभावना है। वहीं, काला सागर में रूस के कम से कम दो युद्घपोत भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या रूसी सेना 'बिखड़' रही है। हालांकि, युद्ध खत्म होने के बाद ही आखिरी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है, लेकिन ये तय है, कि रूस को भारी नुकसान हो चुका है, लिहाजा अब रूस रक्षात्मक लड़ाई लड़ने लगा है।

यूक्रेन को भी भयावह नुकसान
युद्ध में यूक्रेनियन भी भयावह नुकसान उठा रहे हैं। 22 मई को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा था कि, हर दिन 50 से 100 सैनिक मारे जा रहे हैं। वहीं, कई स्वतंत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि, यूक्रेन के भी हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं। हालांकि, यूक्रेन के कितने सैनिक मरे हैं, इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है। हालांकि, जेलेंस्की ने 27 मई को अपने शाम के संबोधन में कहा था कि, 'अगर कब्जा करने वालों को लगता है कि लाइमैन और सेवेरोडोनेस्टस्क उनके होंगे, तो वे गलत हैं। डोनबास यूक्रेन का ही हिस्सा रहेगा'। दूसरी ओर, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि डोनबास "बिना शर्त प्राथमिकता" में शामिल है। यह एक गतिरोध है, और इससे बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता है: निरंतर लड़ाई। युद्ध लंबे समय तक चलने की संभावना है'।

लंबी लड़ाई की चल रही तैयारी?
यूक्रेन अपनी खोई हुई जमीन को वापस लेने की योजना बना रहा है। स्पष्ट रूप से, उनकी सेना को अपने रैंकों में मानव हताहतों की जगह रंगरूटों के साथ बदलने और पुराने, तबाह इकाइयों को नए उपकरणों के साथ बदलने की आवश्यकता होगी। इसके लिए नई ब्रिगेड और बटालियन बनाने की जरूरत होगी। अमेरिका और बाकी नाटो द्वारा पहले से आपूर्ति किए गए हथियारों के अलावा, उन्हें रूसी आपूर्ति लाइनों पर हमला करने के लिए लंबी दूरी की सटीक रॉकेट प्रणालियों की आवश्यकता होगी, साथ ही रूसी प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए कहीं अधिक सटीक तोपखाने की आवश्यकता होगी। इसी तरह, हवा में, इस समय यूक्रेनियन के पास जो मिसाइलें हैं, वे कुछ हद तक यूक्रेनी लाइनों से ऊपर रूसी स्वतंत्रता को सीमित कर सकती हैं, लेकिन उन्हें लंबी दूरी तक चुनौती नहीं दे सकती हैं। यही कारण है कि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइलों की आपूर्ति करने पर विचार कर रहा है, जो अत्यधिक सक्षम मध्यम दूरी की विमान-रोधी मिसाइलें थीं, जो पहली बार 1990-1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान प्रमुखता से इस्तेमाल की गईं थीं। ये अपनी लाइन से कुछ दूरी पर रूस के विमानों को मार गिराने में सक्षम हैं।

अमेरिकी मिसाइलों से रूस पर कहर
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन यूक्रेन को उन्नत रॉकेट सिस्टम प्रदान करने के लिए तैयार हो गये हैं जो लंबी दूरी के रूसी लक्ष्यों पर 'सटीक' के साथ हमला कर सकते हैं। 70 करोड़ डॉलर के हथियार पैकेज का बुधवार को अनावरण होने की संभावना है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया है कि, हथियारों में हिमर, उच्च गतिशीलता वाले आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम हैं जो 80 किमी (50 मील) तक के लक्ष्य को मार सकते हैं। अमेरिकी हथियारों के पैकेज में रडार सिस्टम, सर्विलांस रडार सिस्टम, एडिशनल जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल और एंटी आर्मर वीपन शामिल है, जो रूसी सेना में भीषण तबाही मचा सकते हैं। लिहाजा, माना यही जा रहा है, कि दोनों ही देशों के लिए ये लड़ाई एक दलदल की तरह बन गई है और अगर रूस डोनबास पर कब्जा कर लेता है, तो ही इस युद्ध के खत्म होने की संभावना जताई जा सकती है।












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