जापान के सेना निर्माण के ऐलान से तिलमिलाए रूस-चीन, जापानी द्वीप के पास करेंगे शक्ति प्रदर्शन

जापान के सेना निर्माण के फैसले के बाद रूस और चीन ने एक साथ मिलकर नौसैनिक युद्धाभ्यास का ऐलान किया है। ये युद्वभ्यास दुनिया के सबसे विवादित समुद्री क्षेत्र में होगा।

Russia and China unite for live-fire naval exercises

Image: Xinhua Twitter

रूस ने चीन की नौसेना के साथ मिलकर पूर्वी चीन सागर में युद्धाभ्यास करने का ऐलान किया है। यह युद्धाभ्यास बुधवार यानी कि 21 दिसंबर से शुरू होगा जोकि एक सप्ताह 27 दिसंबर तक चलेगा। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रूस, चीन की नौसेना के साथ मिलकर आपसी नौसैनिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। रूस-चीन का यह युद्धाभ्यास का ऐलान जापान के सेना निर्माण के फैसले के बाद आया है।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान

रूसी रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान

रूसी रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस युद्धाभ्यास का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंधों को बेहतर और प्रगाढ़ बनाना है। इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति का माहौल बनेगा। इस युद्धाभ्यास में रूस की ओर से वारयाग मिसाइल क्रूजर, मार्शल शापोशनिकोव विध्वंसक और प्रशांत बेड़े के दो जंगी जहाज युद्धाभ्यास में हिस्सा लेंगे। वहीं, बयान के मुताबिक चीन की तरफ से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी 2 डेस्ट्रॉयर, 2 गश्ती जहाज, एक सप्लाई शिप और एक पनडुब्बी भेजेगी।

चीन की तरह से टिप्पणी का इंतजार

चीन की तरह से टिप्पणी का इंतजार

इसके अलावा चीन की सेना की तरफ से पैसिफिक फ्लीट के एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर्स को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी रक्षा मंत्रालय के बयान पर चीनी सेना ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। आपको बता दें कि चीन ने अब तक यूक्रेन पर रूस के अकारण हमले की निंदा करने से इनकार कर दिया है, जबकि रूस को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ा दी है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच चीन-रूसी व्यापार दोनों देशों के लिए बढ़ता जा रहा है और अब यह रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है।

जापान ने सेना निर्माण का किया ऐलान

जापान ने सेना निर्माण का किया ऐलान

बतादें कि जापान ने हाल में ही सेना के निर्माण का ऐलान कर दिया है। जापान ने कहा है, कि वह अकल्पनीय रकम 320 अरब डॉलर खर्च कर सैन्य निर्माण शुरू करेगा और जापान ने साफ कर दिया है, कि उसका फोकस चीन रहने वाला है। जापान ने कहा है, कि वो ऐसे हथियारों पर पैसे खर्च करेगा, जो उसे चीन पर हमला करनवे में सक्षम बनाएगा और वो ऐसे मिसाइलों का निर्माण करेगा, जो उसे किसी भी वक्त संघर्ष के लिए तैयार रखेगा।

युद्धाभ्यास से बढ़ेगी जापान की टेंशन

युद्धाभ्यास से बढ़ेगी जापान की टेंशन

जापान की इस घोषणा के एक हफ्ते से भी कम समय में रूस ने भी अपने रक्षा बजट में वृद्धि करने की घोषणा की है। रूस ने जापान के सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि वह लंबी दूरी के हथियार हासिल करेगा। इससे पहले जून में टोक्यो ने कहा था कि उसने एक सप्ताह के भीतर आठ रूसी और चीनी युद्धपोतों को अपने जलक्षेत्र के पास ट्रैक किया है। अब अचानक पूर्वी चीन सागर जो कि जापान के बेहद नजदीक है, वहां चीनी-रूसी नौसेना के युद्भ्यास के ऐलान ने जापान की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

सेनकाकू द्वीप को लेकर हैं विवाद

सेनकाकू द्वीप को लेकर हैं विवाद

बतादें कि रूस-चीन जिस पूर्वी चीन सागर में युद्धाभ्यास कर रहे हैं। वहां मौजूद द्वीप समूहों को लेकर चीन और जापान के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। चीन के जहाज बार-बार सेनकाकू द्वीप के आसपास के जापानी क्षेत्रीय जल में अनधिकार प्रवेश करते रहते हैं जिसे लेकर जापान अपनी नाराजगी जताता रहता है। सेनकाकू द्वीप पर 8 द्वीपों का एक समूह है, जिसका क्षेत्रफल 7 वर्ग किलोमीटर है। इस द्वीपसमूह को जापान में सेनकाकू, चीन में दियाओयू और हॉन्गकॉन्ग में तियायुतई के नाम से जाना जाता है। 1970 में सेनकाकू पर तेल के समृद्ध भंडार होने का अनुमान लगाया गया जिसके बाद यहां पर कब्जा करने की होड़ मच गई।

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