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रोबोट युद्ध: रूस-बेलारूस ने विध्वंसक लड़ाकू मशीनों को उतारा, क्या यूक्रेन पर चढ़ाई करने वाले हैं पुतिन?

माना जा रहा है कि रूस और बेलारूस काफी ज्यादा आक्रामक है और यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कभी भी जंग छिड़ने की आशंका जताई है। अगर जंग होती है तो फिर कई और देश इसमें शामिल हो सकते हैं।

मॉस्को, सितंबर 13: एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आशंका जताई है कि रूस कभी भी उनके खिलाफ जंग का ऐलान कर सकता है तो दूसरी तरफ रूस ने ऐसे-ऐसे विध्वंसक रोबोटिक हथियारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे बर्बादी मचना तय माना जा रहा है। कहने के लिए रूस अपने सबसे खास दोस्त बेलारूस के साथ युद्धाभ्यास कर रहा है, लेकिन रूस की जो तैयारी है और रूस ने युद्धाभ्यास में जिन हथियारों को उतारा है, उससे साफ जाहिर होता है कि दुनिया बहुत बड़े जंग की तरफ कही कदम ना बढ़ा दे।

युद्धाभ्यास या ऐलान-ए-युद्ध?

युद्धाभ्यास या ऐलान-ए-युद्ध?

रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वो लारूस के साथ बड़े सैन्य अभ्यास के सक्रिय मुख्य चरण के दूसरे दिन नए लड़ाकू रोबोट और सामरिक वाहनों का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने इस युद्धाभ्यास का नाम 'जापड़-2021' दिया है, जो जो अगले गुरुवार तक रूस और बेलारूस के पश्चिमी किनारों पर चलेगा। जिसमें यूरोपीय संघ की सीमाओं के नजदीकी क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, रूस और बेलारूस जिस आक्रामकता के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं, उसने यूक्रेन और कुछ नाटो देशों को चिंतित कर दिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सैनिकों ने प्लेटफॉर्म-एम लड़ाकू रोबोट का इस्तेमाल किया, जो दूर से नियंत्रित होते हैं और ग्रेनेड लांचर और मशीन गन से लैस होते हैं। रूसी की तरफ से नए सरमत-2 टैक्टिकल वाहनों का भी इस्तेमाल किया गया है।

पहली बार ऐसा युद्धाभ्यास

पहली बार ऐसा युद्धाभ्यास

रूसी समाचार एजेंसियों ने दावा किया कि ऐसा पहली बार हो रहा है और ये अपने आप में पहली तरह का ऐसा युद्धाभ्यास है, जब इस तरह के हार्डवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने मॉस्को से एक अरब डॉलर से अधिक के हथियार खरीदने की योजना के बीच आज अभ्यास की समीक्षा की। उम्मीद है कि पुतिन अगले सप्ताह अभ्यास की समीक्षा करेंगे। लाइव फायर ड्रिल 'ज़ापद-2021' युद्ध खेलों का परिणाम है, और अगले गुरुवार तक रूस और बेलारूस के पश्चिमी किनारों पर चलेगी। कुछ साइटें नाटो और यूरोपीय संघ की सीमाओं के करीब हैं, और उनकी इस विध्वंसक युद्धाभ्यास ने यूक्रेन और पोलैंड सहित पड़ोसियों को टेंशन में डाल दिया है।

यूक्रेन ने जताई जंग की आशंका

यूक्रेन ने जताई जंग की आशंका

हालांकि, रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वो जो युद्धाभ्यास कर रहा है, वो किसी भी देश को ध्यान में रखकर नहीं कर रहा है। लेकिन यूक्रेन के जनरल स्टाफ के प्रमुख मेजर-जनरल विक्टर गुलेविच ने कहा कि रूस का ये अभ्यास पश्चिमी देशों के लिए एक संकेत है और दोनों देश मिलकर अपती ताकत के जरिए डराना चाहते हैं। वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश की सीमाओं और उसके सहयोगी देशों के पास नाटो फोर्स की गतिविधि बढ़ने के खिलाफ रूस के युद्धाभ्यास को 'समझदार' करार दिया है। वहीं, यूक्रेन और नाटो के सदस्य पोलैंड और लिथुआनिया जैसे पड़ोसियों का कहना है कि सीमा के इतने करीब इतने बड़े युद्धाभ्यास को अंजाम देना भड़काऊ कदम है। वहीं, एस्टोनियाई रक्षा बलों के कमांडर मार्टिन हेरेम ने शुक्रवार शाम एक साक्षात्कार में कहा, "हमें यह महसूस करने की जरूरत है कि आने वाले वर्षों में वास्तव में एस्टोनिया पर हमला हो सकता है।"

कितना खतरनाक है रूस का युद्धाभ्यास

कितना खतरनाक है रूस का युद्धाभ्यास

एस्टोनिया की तरफ से कहा गया है कि रूस का मकसद एस्टोनिया पर कब्जा करना या देश पर नियंत्रण हासिल करना नहीं है। बल्कि वो देश अस्थिरता फैलाकर उसके मजे लेना चाहता है। वहीं, रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि युद्धाभ्यास में 2 लाख सैन्यकर्मी, करीब 80 विमान और हेलीकॉप्टर, 15 जहाज तक और लगभग 300 टैंक भाग ले रहे हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैनिक अक्टूबर के मध्य तक अपने स्थायी ठिकानों पर लौट आएंगे।

क्यों है मंडरा रहा है महायुद्ध की आशंका?

क्यों है मंडरा रहा है महायुद्ध की आशंका?

जानकारों की मानें तो रूस और यूक्रेन के बीच का विवाद काफी ज्यादा बढ़ चुका है और युद्ध की आशंका दुनिया पर मंडरा रही है। ऐसे में अगर दोनों देशों में युद्ध होता है तो रूस और अमेरिका सीधे तौर पर एक दूसरे के सामने आ जाएंगे। अमेरिका रूस के खिलाफ खड़ा हो जाएगा और यूक्रेन की मदद करने मैदान में आ जाएगा। और अगर अमेरिका यूक्रेन की मदद में आता है तो फिर दुनिया के कई और देशों को युद्ध में ना चाहते हुए शामिल होना पड़ेगा। खासकर नाटो देशों को लड़ाई का हिस्सा बनना पड़ेगा। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति का कहना है कि रूस असल में विवाद को खत्म करना ही नहीं चाहता है। उन्होंने कहा है कि रूस नहीं चाहता है कि युद्ध की आशंका खत्म हो, या फिर बातचीत के आधार पर मुद्दों को सुलझाया जा सके।

अमेरिका को संदेश देने की कोशिश?

अमेरिका को संदेश देने की कोशिश?

रूस और बेलारूस काफी करीबी देश हैं। जानकारों का तो यही कहना है कि बेलारूस के राष्ट्रपति रूस के राष्ट्रपति पुतिन के हाथों की कठपुतली हैं। रूस जो युद्धाभ्यास कर रहा है, वो पिछले 10 सालों में किया जा रहा सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है, जिसमें रूस रोबोटिक हथियारों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर रहा है और विरोधियों को डराने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि रूस का ये युद्धाभ्यास अमेरिका को साफ तौर पर संदेश देने की कोशिश है। 9 सितंबर को शुरू हुआ ये युद्धाभ्यास 16 सितंबर तक चलेगा और माना जा रहा है कि रूस की तरफ से और भी भयानक हथियारों को टेस्ट किया जा सकता है।

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