तालिबान के मुद्दे पर रूस ने दिया झटका, व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया को दी ये नसीहत
मास्को, 21 अगस्त: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तालिबान का स्वागत करते हुए कहा है कि पश्चिम को अफगानिस्तान पर 'बाहरी मूल्य' नहीं थोपने चाहिए। रूस का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब चीन भी तालिबान को मान्यता देने की ओर बढ़ रहा है और तालिबान अपने 20 साल वाले अंदाज में लौटते हुए दिखने लगा है। लेकिन, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में पुतिन जो बातें कही हैं, उससे तालिबान का हौसला बढ़ सकता है। क्योंकि, पाकिस्तान तो हमेशा से ही उसके साथ है और चीन भी अपना असली चेहरा दिखा चुका है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भी तालिबान पसंद है
रूस के राष्ट्रपति ने कथित 'गैरजिम्मेदार नीति' की आलोचना की है और कहा है कि 'आप बाहर से राजनीतिक जीवन का मानक और बर्ताव दूसरे लोगों पर थोप नहीं सकते।' पुतिन बोले कि अफगानिस्तान में 20 साल के अमेरिकी सैन्य अभियान पर ध्यान देना रूस के हित में नहीं है, जिसका अंत काबुल एयरपोर्ट उन अराजक तस्वीरों के साथ खत्म हुआ, जिसमें अमेरिका अपने नागरिकों को निकालने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों की मदद का आह्वान किया है। लेकिन, इन तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया है कि सुधरने के वादे के बावजूद कट्टर इस्लामी तालिबान ने सत्ता में आते ही अपना क्रूर चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है।

'तालिबान की सच्चाई के साथ आगे बढ़ना होगा'
रूस के राष्ट्रपति ने कहा है कि वह चाहते हैं कि अफगानिस्तान में स्थिरता आए और उन्होंने दुनिया भर के देशों से कहा है कि इस देश को खत्म होने से बचाए। सबसे बड़ी बात कि पुतिन ने यह बयान क्रेमलिन में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ टेलिविजन पर प्रसारित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया हैं। उन्होंने कहा है कि 'यही सच्चाई है और हमें इन्हीं सच्चाइयों के साथ आगे बढ़ना होगा, अफगानिस्तान को ढहने से बचाने के लिए।' दोनों नेताओं ने कहा है कि मर्केल की रूस यात्रा के दौरान अफगानिस्तान चर्चा का सबसे अहम मसला रहा। इस दौरान उन्होंने पड़ोसी मुल्कों में अफगानिस्तान से 'शरणार्थियों की आड़ में' 'आतंकियों' के घुसने पर रोक लगाने पर भी जोर दिया।

तालिबान के साथ रूस के लगातार संपर्क में रहने की बात
दरअसल, रूस सावधानी के साथ अफगानिस्तान के नए शासकों को लेकर आशावादी है और आतंकियों से इसलिए संपर्क करना चाहता है, ताकि इन कोशिशों के जरिए वह अपने पड़ोस के पूर्व सोवियत देशों में पैदा होने वाली अस्थिरता को टाल सके। रूस ने तालिबान को 'उग्रवादी' संगठन मानकर बैन कर रखा है, लेकिन बीते वर्षों में उससे लगातार संपर्क में है और पिछले महीने भी तालिबान के आतंकियों को कई बार मास्को में स्वागत कर चुका है। चीन के बाद रूस ने ऐसे वक्त में तालिबान के प्रति दरियादिली दिखानी शुरू की है, जब वह सुधरने के दावे तो कर रहा है, लेकिन ऐसे कई सबूत हैं,जिससे साबित होता है कि यह वही क्रूर तालिबान है जो 20 साल पहले था।

झूठे साबित हो रहे हैं सुधरने के तालिबानी दावे
तालिबान ने दो दशक पहले अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन के साथ हाथ मिलाया था और महिलाओं के साथ अत्याचार की हदें पार कर दी थीं। पिछले दिनों काबुल से ही ऐसी दर्जनों तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, जिसमें अफगानिस्तान का राष्ट्रीय झंडा उठाने वालों पर तालिबान के आतंकियों ने हमले किए हैं। उधर मानवाधिकार संगठन कहलाने वाले एमनेस्टी इंटरनेशनल ने खुलासा किया है कि पिछले महीने गजनी पर कब्जा करने के बाद इसने 9 हजारा पुरुषों का नरसंहार कर दिया। इनमें तो 3 को बहुत ही प्रताड़ित करके मारा गया। इसी तरह एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक हेरात के पास बदगिस प्रांत के प्रमुख जनरल हाजी मुल्ला अचाकजई को भी बहुत बर्बर तरीके से मार डाला गया।












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