Pakistan: बर्बाद या स्थिर.. भारत के हित में कैसा पाकिस्तान अच्छा है? जानिए क्या कहते हैं इंडियन एक्सपर्ट्स

इमरान खान अब आर्मी से खुलकर भिड़ गये हैं और पाकिस्तान में पहली बार आर्मी हेडक्वार्टर्स पर हमले किए गये हैं। सेना के खिलाफ पहली बार जनता में गुस्सा फूटा है।

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Pakistan India: पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हुआ है, जब आर्मी के खिलाफ देश का एक बड़ा हिस्सा खड़ा हो गया है और ये भी पहली बार हुआ है, जब आर्मी ने किसी नेता के आगे घुटने टेका हो। इमरान खान की रिहाई इस बात का सबूत है, कि पहले राउंड की लड़ाई में शहबाज शरीफ और आर्मी की हार हुई है।

इमरान खान गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा करने के आदेश दे दिए, जिसके बाद शहबाज शरीफ ने देश की सर्वोच्च अदालत के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। कुल मिलाकर स्थिति ये है, कि पाकिस्तान आर्थिक संकट और राजनीतिक लड़ाई के बीच बुरी तरह से फंसा हुआ है और पूरी संभावना है, कि अगले महीने देश दिवालिया हो जाएगा।

इमरान खान और उनकी पार्टी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। शहबाज शरीफ सरकार स्पष्ट रूप से खान को चुनावी लड़ाई में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश कर रही है। वर्तमान पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) गठबंधन सरकार और इसका समर्थन करने वाली सेना, यही चाहती है, कि इमरान खान को दोषी ठहराकर जेल भिजवाया जाए और उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए।

लिहाजा, पाकिस्तान की सरकार आगे जाकर, इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), को एक आतंकवादी संस्था भी कह सकती है और इस तरह चुनाव में भाग लेने से रोक सकती है।

कुल मिलकर पाकिस्तान में जो कलह पिछले साल शुरू हुआ था, वो फिलहाल खत्म नहीं होने वाला है। लिहाजा, इससे एक सवाल उठता है, कि क्या यह स्थिति भारत के लिए अच्छी है? भारतीय विश्लेषक पाकिस्तान में राजनीतिक संकट को कैसे देखते हैं? आईये समझते हैं।

भारत पर क्या फर्क पड़ेगा?

भारतीय एक्सपर्ट्स पाकिस्तान संकट को भारत के लिए दो तरह से देखते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, पाकिस्तान की अंदरूनी लड़ाई भारत की सैन्य ताकतों को राहत देता है, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान में मची अफरा-तफरी भारत के लिए भी खतरा बन सकती है।

लेकिन, पारंपरिक सोच और सुझाव यही है, कि पाकिस्तान में संकट भारत के लिए अच्छी खबर है। ओआरएफ के रिसर्च फेलो सुशांत शरीन कहते हैं, कि "एक मजबूत पाकिस्तान हमेशा भारत के लिए खतरा रहेगा, लेकिन अस्थिर पाकिस्तान, खासकर मौजूदा जो हालात हैं, वो भारत के लिए परफेक्ट है।"

इमरान खान ने कम से कम इतना तो कर ही दिया है, कि पाकिस्तानी सेना को लेकर देश की जनता को बांट दिया है। और इमरान खान की राजनीतिक प्रसिद्धि का मतलब ये है, सेना को कमजोर करती है। लिहाजा, ये स्थिति जितनी दिनों तक चलेगी, पाकिस्तानी सेना का ध्यान भारतीय मोर्चे की तरफ उतना ही कम केंद्रित हो पाएगा।

प्रोफेसर राजेश राजागोपालन कहते हैं, कि "पाकिस्तान के मौजूदा संकट से भारत को कुछ अल्पकालिक तरीकों से लाभ होता है। यह संभावित रूप से भारत को आतंकवादी और पारंपरिक युद्ध के खतरे, दोनों से कम से कम तत्काल भविष्य के लिए राहत देता है। पाकिस्तान की मौजूदा घरेलू राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियां या तो उनके सैन्य या राजनीतिक नेताओं को जोखिम भरे बाहरी दुस्साहस में शामिल होने से रोकेंगी"।

हालांकि, प्रोफेसर राजेश राजागोपालन ये भी कहते हैं, भारत के लिए एकमात्र बड़ा खतरा उसके परमाणु हथियार हैं। पाकिस्तान की बिगड़ती स्थिति से खतरा ये होता है, कि जितनी स्थिति बिगड़ेगी, उसके परमाणु हथियार गलत हाथों में या आतंकी तत्वों के पास जा सकते हैं।"

क्या भारत को पाकिस्तान की मदद करनी चाहिए?

इस सवाल को लेकर राजनीतिक एक्सपर्ट्स अलग अलग राय रखते हैं। भारत के कई एक्सपर्ट्स कहते हैं, कि भारत को चाहिए, कि पाकिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाए, और इसके लिए मानवीय पहलुओं का हवाला दिया जाता है।

लेकिन, सुशांत शरीन कहते हैं, कि "किसी भी हाल में नहीं"। सुशांत शरीन के मुताबिक, "भारत को अलर्ट रहना चाहिए। भारत को हर परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए"। उन्होंने कहा, कि "अगर भारत मदद करता है और पाकिस्तान के हालात सुधरते हैं, तो फिर भी वो भारत को परेशान ही करेगा"। सुशांत शरीन के मुताबिक, " पाकिस्तान की सेना अपनी छवि सुधारने के लिए भारत के खिलाफ कोई एडवेंचर कर सकती है, लिहाजा भारत को इसको लेकर तैयार रहना चाहिए।"

सुशांत शरीन कहते हैं, कि "भारत के लिए इमरान खान बहुत अच्छा है, इमरान खान ने भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। वो पाकिस्तान को ही डैमेज कर रहे हैं"। उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान भारत के लिए दुश्मन देश है। इमरान खान ने सऊदी अरब, यूएई, ओमान, अरब देश,अमेरिका.. सबके साथ पाकिस्तान के संबंधों को खराब किया है, जबकि एक वक्त अरब देश में सिर्फ पाकिस्तान था"।

सुशांत शरीन आगे कहते हैं, कि "मैं एक ऐसे व्यक्ति को पाकिस्तान की सत्ता में क्यों चाहूंगा, जो पाकिस्तान को मजबूत बनाएगा। स्थिर बनाएगा। मैं एक ऐसे व्यक्ति को सत्ता में चाहूंगा, जो पाकिस्तान को बांटकर रखे, जैसा इमरान ने किया है। मैं एक ऐसे व्यक्ति को चाहूंगा, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दे, जैसा इमरान ने किया है और मैं एक ऐसे व्यक्ति को पसंद करूंगा, जो पाकिस्तान की आर्मी को बर्बाद करे, जैसा इमरान खान ने किया है, जो पाकिस्तान की एकमात्र संस्था है, जिसने पाकिस्तान को एक साथ रखा है"।

हालांकि, प्रोफेसर राजेश राजागोपालन कहते हैं, कि "इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है, कि आंतरिक संकट से जनता का ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ आतंकवादी उकसावे को सटीक रूप से लागू किया जा सकता है। और यही मुझे तस्वीर के दूसरे पहलू पर ले आता है।

इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखते हुए, भारतीय विदेश नीति के विशेषज्ञ प्रोफेसर अविनाश पालीवाल का तर्क है, कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है?

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    उन्होंने लिखा है, कि "... न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि पड़ोसियों, विशेषकर भारत के लिए भी ये एक खतरनाक स्थिति है। हो सकता है कि पाकिस्तान के पास अपने टैंकों को चलाने के लिए ईंधन न हो, लेकिन चल रहे हंगामे के दौरान देश को एकजुट करने के लिए और देश के ऊपर फिर से नियंत्रण हासिल करने के लिए पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम का उल्लंघन कर दे"।

    हालांकि, सुशांत शरीन ये भी कहते हैं, कि अगर पाकिस्तानी सेना भारत को उकसाने आती है, तो वो बैकफायर भी कर सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति ऐसी है ही नहीं, कि वो चार भी लड़ाई लड़ सके। लेकिन, वो सावधान करते हुए कहते हैं, कि "पिछला इतिहास यह भी बताता है, कि पाकिस्तानी सेना भी कुछ तर्कहीन कार्रवाई कर सकती है, जो उसके दृष्टिकोण से पूरी तरह से तर्कसंगत है"।

    कुल मिलाकर एक्सपर्ट्स इस राय पर एकमत हैं, कि भारत को सीमा पर अलर्ट रहना चाहिए, क्योंकि स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर भारत में पाकिस्तानी शरणार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो सकता है। लिहाजा, भारत को सीमा पर ऐसी स्थिति का निर्माण करना चाहिए, जिससे पाकिस्तान में भगदड़ के हालात मचने पर भारत की तरफ शरणार्थी ना मुड़ें।

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